केंद्र सरकार नियमित शीतकालीन सत्र के आयोजन से पहले संसद का एक विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित बैठक की अवधि लगभग दो से तीन दिन रहने का अनुमान है, जिसका आयोजन मौजूदा महीने के अंतिम सप्ताह अथवा आगामी माह के प्रारंभ में किया जा सकता है। चूंकि सदन के वर्तमान सत्र का औपचारिक सत्रावसान अभी नहीं हुआ है, इसलिए विधायी प्रक्रियाओं के तहत इस विशेष बैठक को आहूत करने की संभावनाएं काफी प्रबल मानी जा रही हैं।
महिला आरक्षण विधेयक पर केंद्रित रह सकता है विधायी एजेंडा
इस संभावित विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को प्रमुखता से पेश किए जाने और चर्चा के केंद्र में रखे जाने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक प्राथमिकताओं के तहत महिला कोटे से संबंधित सुधारों को आगे बढ़ाने के स्पष्ट संकेत पहले भी मिलते रहे हैं। इसके साथ ही परिसीमन और चुनावी सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण विधायी विषयों पर भी विचार-विमर्श की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है।
औपचारिक तिथियों और कार्यसूची की घोषणा की प्रतीक्षा
सत्र के प्रस्तावित समय और संभावित एजेंडे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तो देखी जा रही हैं, किंतु आधिकारिक तौर पर तारीखों और विस्तृत कार्यसूची का औपचारिक ऐलान होना अभी शेष है। संसदीय परंपरा के अनुसार बैठक से पूर्व सर्वदलीय चर्चा और दोनों सदनों के विधायी कामकाज की रूपरेखा तैयार की जाती है। सभी राजनीतिक दलों की नजरें अब सरकार द्वारा जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना पर टिकी हुई हैं।
















