सोशल मीडिया पर भड़काऊ और अभद्र टिप्पणी करने वाले युवाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग को लेकर सर्वोच्च अदालत में एक महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है। एयरफोर्स के एक रिटायर्ड अफसर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद इंटरनेट पर गाली-गलौज करने वाले छात्रों को सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया जाए। शीर्ष अदालत इस मामले पर विचार करने के लिए सहमत हो गई है और याचिका पर आगामी बुधवार को सुनवाई तय की गई है। अपनी अर्जी में रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने राजधानी में हुए हिंसक प्रदर्शन का संदर्भ देते हुए आयोजकों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
जंतर-मंतर पर हुए संसद मार्च और पुलिस के साथ हिंसक झड़प
यह पूरा विवाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी की अगुआई में हजारों छात्रों ने संसद भवन की तरफ मार्च निकालने का प्रयास किया था। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन जल्द ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षाबलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। दूसरी ओर, उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसक टकराव में कई पुलिसकर्मियों समेत अनेक छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।
इंटरनेट पर गाली-गलौज और पीएम मोदी पर भड़काऊ टिप्पणी
संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सोशल मीडिया पर फूट पड़ा। दर्जनों युवाओं ने लाठीचार्ज के विरोध में वीडियो रिकॉर्ड करके विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए, जिनमें पुलिस प्रशासन के खिलाफ बेहद अभद्र और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इस दौरान कई ऐसे वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हुए जिनमें प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर पीएम मोदी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करते देखे गए। एक वायरल वीडियो में एक नाबालिग लड़की पीएम मोदी और उनकी दिवंगत मां के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करती नजर आई। इस वीडियो के सामने आने के बाद भारी जनाक्रोश पैदा हुआ और पुलिस ने संबंधित लड़की के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
नाबालिग की माफी, पीएम मोदी का संदेश और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया
मामला तूल पकड़ने के बाद 15 वर्षीय लड़की ने एक अन्य वीडियो जारी करके पूरे देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने स्वीकार किया कि वह दूसरों के उकसावे में आ गई थी और उसने आवेश में आकर अमर्यादित टिप्पणी की थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीएम मोदी ने भी एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने देश की बेटियों द्वारा अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई और कहा कि देश के युवाओं को सही दिशा देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने गलती स्वीकार करने वाले युवाओं को क्षमा करने की बात भी कही। इस विवाद पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी सवाल उठाया था कि हमारी बेटियां इतनी आसानी से कैसे बहक जाती हैं। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा, जहां इंटरनेट पर गाली-गलौज और आयोजकों की जवाबदेही पर अहम रुख सामने आ सकता है।


















