जापान में उपभोक्ता कीमतों की सालाना दर अगस्त में 1.9% पर ही टिकी रही और पिछले 1.9% वाले पठन से आगे नहीं बढ़ी। जापान स्टैटिस्टिक्स ब्यूरो ने यह नया आंकड़ा शुक्रवार को जारी किया। नतीजा बैंक ऑफ जापान के करीब 2% महंगाई लक्ष्य से थोड़ा नीचे है, इसलिए अब बाज़ार की नज़र ब्याज दर को लेकर अगले फैसले पर है।
महंगाई दर वहीं क्यों दिखती है
राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का अगस्त वाला सालाना आंकड़ा पिछले पठन जैसा है। 1.9% का मतलब है कि कीमतें एक साल पहले की तुलना में अभी भी बढ़ी हुई हैं, लेकिन महंगाई की दर 1.9% से किसी नए स्तर पर नहीं गई। यह अंतर जरूरी है क्योंकि आंकड़ा केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के बेहद पास है, फिर भी उसे छूता नहीं है। इसलिए एक ही रिपोर्ट में दो बातें साफ हैं: महंगाई 2% के आसपास बनी हुई है, लेकिन नए राष्ट्रीय पठन में उसकी रफ्तार और तेज़ होने का संकेत नहीं मिला।
केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी
बैंक ऑफ जापान (BoJ) देश का केंद्रीय बैंक है और वहीं यहां की मौद्रिक नीति तय करता है। इसकी जिम्मेदारी में बैंकनोट जारी करना और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा तथा मौद्रिक नियंत्रण संभालना शामिल है। इसी ढांचे के तहत महंगाई का लक्ष्य करीब 2% रखा गया है। अगस्त का CPI नीति निरीक्षकों के लिए अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि असली राष्ट्रीय दर लक्ष्य से कितनी दूर है, हालांकि केवल एक महीने का आंकड़ा आगे की पूरी नीति-राह तय नहीं करता।
ढील से कसाव तक
मौजूदा नीति का सिलसिला 2013 में अपनाई गई बेहद ढीली मौद्रिक व्यवस्था से शुरू हुआ था। उस वक्त जापान में महंगाई लंबे समय से कम थी, और बैंक ऑफ जापान अर्थव्यवस्था को गति देकर कीमतों में वाधा लाना चाहता था। इस दृष्टिकोण की बुनियाद क्वांटिटेटिव ऐंड क्वॉलिटेटिव ईजिंग (QQE) पर रखी गई। इसके तहत केंद्रीय बैंक नोट छापकर सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी संपत्तियां खरीदता था ताकि वित्तीय प्रणाली में तरलता बढ़े। यह सामान्य बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सस्ती फंडिंग और महंगाई को बढ़ावा देने की लगातार कोशिश थी।
अगला बड़ा कदम 2016 में आया। पहले नकारात्मक ब्याज दरें लागू हुईं, फिर बैंक ने अपने 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की उपज पर सीधा नियंत्रण स्थापित किया। इन दोनों उपायों ने उधार की स्थितियों को और ढीला रखा तथा बॉन्ड बाज़ार के एक अहम हिस्से को नीति से बांध दिया। मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें बढ़ाईं। इससे बेहद ढीली नीति से प्रभावी ढंग से पीछे हटने की शुरुआत हुई, लेकिन निवेशक फिर भी अतिरिक्त कसाव की संभावना तौल रहे थे।
येन की कमजोरी ने कीमतों को कैसे छुआ
इस विशाल प्रोत्साहन का असर सिर्फ घरेलू वित्त तक सीमित नहीं रहा। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में जापान की नीति बहुत ढीली रही, जिससे येन अपने मुख्य मुद्रा साथियों के मुकाबले कमजोर हुआ। कमजोर येन के जरिए बाहर से आने वाली कीमतें घरेलू महंगाई को तेज़ करने लगीं। येन की कमजोरी ने जापान में महंगाई को बैंक ऑफ जापान के 2% लक्ष्य से ऊपर धकेलने में योगदान दिया।
मामला 2022 और 2023 में और गंभीर हुआ क्योंकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतियां अलग दिशा में चलने लगीं। बैंक ऑफ जापान अपनी असामान्य रूप से ढीली स्थिति बनाए रखे हुए था, जबकि दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक दशकों के उच्च स्तर की महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरें तेज़ी से बढ़ा रहे थे। इससे येन और अन्य मुद्राओं के बीच अंतर बढ़ा, येन की आकर्षकता घटी और उसका मूल्य नीचे खिसका। यह प्रक्रिया वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के साथ मिली। साथ ही बढ़ते वेतन की संभावना ने भी महंगाई को सहारा दिया, क्योंकि ऊंची कमाई को कीमतों की वृद्धि को बनाए रखने वाला अहम घटक माना गया।
2024 में इस रुझान का कुछ हिस्सा पलटा। बैंक ऑफ जापान ने बेहद ढीली नीति छोड़ी तो येन की कमजोरी का पुराना सिलसिला उसी तरह जारी नहीं रहा। अन्य बड़े केंद्रीय बैंकों के मुकाबले नीति का अंतर बदलने से मुद्रा बाज़ार को नया हिसाब लगाना पड़ा। इस पृष्ठभूमि में अगस्त का 1.9% आंकड़ा ऐसे समय सामने आया जब विनिमय दर, ऊर्जा कीमतें और वेतन की उम्मीदें तीनों ने पिछले कुछ वर्षों में महंगाई की तस्वीर बनाई थी।
वैश्विक निवेश में येन की भूमिका
जापान की बेहद कम ब्याज दरों की भूमिका सिर्फ घरेलू नीति तक सीमित नहीं थी। एक दशक से अधिक समय तक इन्होंने दुनिया भर के निवेशों में ट्रिलियनों डॉलर की फंडिंग में मदद की और येन को दुनिया की सबसे सस्ती फंडिंग मुद्राओं में से एक बना दिया। बैंक ऑफ जापान से इस सप्ताह फिर नीति कसाव की उम्मीद के कारण यह फायदा अब नए चरण में प्रवेश कर सकता है। अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने दरें बढ़ा लीं थीं, जबकि जापान लंबे समय तक दुनिया में अपवाद बना रहा।
मुद्रा बाज़ार में मिली-जुली चाल
गुरुवार को वॉल स्ट्रीट बंद होने के बाद AUD/USD ने लगातार तीन दैनिक गिरावटों को पलटा और 0.7100 के स्तर से ऊपर वाले क्षेत्र में लौट आया। अमेरिकी डॉलर के नरम रुख ने जोड़े की यह वापसी सहायता दी। इसी दौरान बाज़ार सहभागी बुधवार को फेडरल रिजर्व (Fed) के सख्त मौद्रिक संकेत को समझ रहे थे। इसलिए डॉलर की चाल के साथ-साथ अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर माहौल भी AUD/USD की दिशा पर असर डाल रहा था।
एशिया में कारोबार खुलने से पहले USD/JPY में उल्लेखनीय नुकसान दिख रहा था और जोड़ा 156.00 के आसपास कारोबार कर रहा था। उसने पिछले तीन दिनों की सकारात्मक लड़ी का कुछ हिस्सा वापस गंवा दिया था और 156.50 स्तर से ठीक पहले ही रुक गया। शुक्रवार की शुरुआत में सारा ध्यान बैंक ऑफ जापान पर रहने की उम्मीद थी। अधिकांश निवेशक 25-bps की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद लेकर बैठे थे। इसलिए येन की चाल में डॉलर की नरमी के साथ बैंक ऑफ जापान से आने वाले नए नीति-संकेत को भी परखा जा रहा था।
सोने में उछाल और तेल में कमजोरी
सोना गुरुवार को तेज़ी से चढ़ा और नए साप्ताहिक शीर्ष पर पहुंचा, लेकिन प्रति ट्रॉय औंस $4,400 के आसपास के इलाके में शुरुआती रुकावट मिली। पीली धातु की यह छलांग लगातार तीन दैनिक गिरावटों को पलटने वाली थी। इसके साथ अमेरिकी डॉलर में हुई हल्की वापसी और कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर नकारात्मक प्रदर्शन भी देखा गया। यानी सोने की वापसी डॉलर और ऊर्जा बाज़ार, दोनों से जुड़े उसी व्यापक बाज़ार माहौल में हुई, जबकि जापान का महंगाई आंकड़ा और बैंक ऑफ जापान का फैसला दरों की उम्मीदों का केंद्र बने हुए थे।
फेडरल रिजर्व का अलग दर संदर्भ
एक अलग फेडरल रिजर्व फैसले में संस्था ने सर्वसम्मति से फेड फंड टार्गेट रेंज (FFTR) को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 3.75%-4.00% किया था। फेडरल रिजर्व ने कहा कि इससे महंगाई को 2% लक्ष्य की ओर जल्दी लौटाने में मदद मिलेगी। यह जानकारी अगस्त के जापानी CPI आंकड़े से अलग संदर्भ की है, लेकिन यह उस विरोधाभास को स्पष्ट करती है कि अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आक्रामक कसाव ला चुकी थीं, जबकि जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा।
अब नीति से क्या उम्मीद है
अब मुख्य सवाल यह है कि 1.9% पर टिकी महंगाई के बीच बैंक ऑफ जापान की संभावित 25-bps वृद्धि कैसे असर करेगी। दर बढ़ना बेहद ढीले दौर से हटने का एक और चरण होगा, जबकि अपरिवर्तित CPI दिखाता है कि कीमतों की वार्षिक दर पिछले राष्ट्रीय पठन से ऊपर नहीं गई। निवेशक एक ओर 2% के करीब महंगाई और दूसरी ओर नीति को और सामान्य बनाने की संभावना को तौल रहे हैं। येन, AUD/USD, सोना और कच्चा तेल अलग-अलग संकेत देते हैं, लेकिन मुख्य मुद्दा वही है कि जापान में महंगाई 2% के पास है और आगे की कार्रवाइयां तय करेंगी कि नीतिगत शर्तें कितनी तेज़ी से कसती हैं।



















