भारत में दो ऐसे कॉस्मेटिक उत्पाद सामने आए हैं जिनके लेबल पर पाकिस्तान में निर्मित होने की बात लिखी है, लेकिन जिन्हें भारतीय बाजार में बेचने की कानूनी इजाजत नहीं मिली थी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 8 सितंबर, 2026 को गोरी ब्यूटी क्रीम और चंदनी व्हाइटनिंग क्रीम को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की। संगठन ने कहा कि दोनों उत्पादों के पास आयात के लिए जरूरी पंजीकरण प्रमाणपत्र नहीं है और निर्धारित सीमा से अधिक भारी धातुएं मिली हैं, जिनसे विषाक्त प्रभाव सहित स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। उपभोक्ताओं से इन्हें खरीदने और इस्तेमाल करने से मना किया गया है।
इस चेतावनी से दो अलग सवाल सामने आते हैं: माल की असली उत्पत्ति क्या है और आयातित कॉस्मेटिक के लिए जरूरी कागजात कौन सी हैं। उपलब्ध जानकारी उत्पादों की स्थिति और स्वास्थ्य चेतावनी बताती है, लेकिन उन्हें देश में लाने वाला चैनल नहीं बताती।
व्यापार प्रतिबंध का समयक्रम
पाकिस्तान से जुड़े भारतीय व्यापार नियम एक साथ नहीं बने, बल्कि कई चरणों में कड़े हुए। फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाले आयातों पर सीमा शुल्क 200% कर दिया। अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति में बदलाव के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार रोक दिया।
सबसे बड़ा बदलाव 2 मई 2025 को आया। विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने तुरंत प्रभाव से पाकिस्तान में उत्पन्न या पाकिस्तान से निर्यात किए गए सभी माल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात, साथ ही उसके पारगमन पर रोक लगा दी। यह आदेश आगे के आदेश तक लागू है। किसी तीसरे देश से घुमाकर भेजने से पाकिस्तानी उत्पाद की कानूनी स्थिति स्वत: नहीं बदलती।
नियम का केंद्रीय सवाल उत्पाद के रास्ते का नहीं, उसकी उत्पत्ति का है। अगर कोई सामान पाकिस्तान में बना है, तो उसे दुबई, यूएई या किसी अन्य देश से होकर भारत भेजने से उसका मूल देश नहीं बदलता। इसलिए कागजों पर पाकिस्तानी कॉस्मेटिक को सामान्य कानूनी आयात प्रक्रिया से भारतीय दुकान तक पहुंचना संभव नहीं होना चाहिए। फिर भी गोरी और चंदनी भारत में मिलीं, लेकिन इस तथ्य से कोई एक खास मार्ग साबित नहीं हो जाता।
यह क्रम इसलिए अहम है कि किसी तीसरे देश का लेबल उत्पाद के मूल स्थान को मिटा नहीं सकता। प्रतिबंध उत्पत्ति और माल की आवाजाही से जुड़ा है, इसलिए मार्ग बदलना कानूनी स्थिति बदलने जैसा नहीं है।
तीसरे देशों से माल आने के सामने आए मामले
पाकिस्तानी माल को तीसरे देश के नाम पर भारत लाने के मामले सामने आए हैं। DRI ने ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट के तहत अलग-अलग जांचों में ऐसे मामले दर्ज किए, जिनमें पाकिस्तान में बने माल को दुबई होकर भारत भेजा गया और कथित तौर पर उनकी उत्पत्ति गलत बताई गई।
जून 2025 में एजेंसी ने 39 कंटेनर जब्त करने की जानकारी दी, जिनमें दुबई से होकर आए 1,115 मेट्रिक टन पाकिस्तानी माल के थे। सितंबर 2025 में, यानी चेतावनी से एक वर्ष पहले, 28 कंटेनरों में 800 टन पाकिस्तानी कॉस्मेटिक्स और सूखी खजूर जब्त किए गए; इनकी कीमत ₹12 करोड़ बताई गई। ये कंसाइनमेंट जेबेल अली, दुबई से होकर आए थे और कॉस्मेटिक्स को कथित तौर पर यूएई में बना बताया गया था। इस मामले में एक कस्टम्स ब्रोकर को गिरफ्तार किया गया।
अगस्त 2026 में DRI को फिर 364 टन पाकिस्तानी सूखी खजूर मिले, जिन्हें पाकिस्तान से दुबई ले जाया गया था और यूएई मूल का बताकर भारत भेजा गया था। 14 सितंबर, 2026 को एजेंसी ने 362 टन से अधिक पाकिस्तानी सूखी खजूर जब्त किए, जो जेबेल अली, यूएई से आए थे। दस्तावेजों में यूएई को उत्पादक देश दिखाया गया था, जबकि प्राथमिक जांच में पता चला कि माल मूल रूप से कराची, पाकिस्तान से भेजा गया था।
बांग्लादेश को लेकर भी DRI के अलग मामलों में तीसरे देश से मार्ग बदलने और उत्पत्ति गलत बताने के आरोप सामने आए। मगर ये मिसालें केवल यह बताती हैं कि अन्य मामलों में ऐसे रास्ते अपनाए गए। गोरी या चंदनी दुबई या बांग्लादेश से आईं, इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। दोनों क्रीम ने भारत तक कौन सा मार्ग अपनाया, यह अब तक सार्वजनिक रूप से तय नहीं हो सका है।
बार-बार जब्ती से यह साफ है कि उत्पत्ति की जानकारी जांच में कितनी अहम है। तीसरे देश का नाम कागजात में बदलाव कर सकता है, लेकिन उत्पाद जहां बना है वहां कोई बदलाव नहीं होता। यही बात दोनों क्रीम के मामले में अनिश्चितता का केंद्र है।
प्रतिबंध के अलावा दो उत्पादों पर स्वास्थ्य और पंजीकरण का सवाल
इन क्रीमों को केवल पाकिस्तान में बने होने के कारण निशाने पर नहीं लिया गया है। मुद्दा यह भी है कि भारत में आयातित कॉस्मेटिक बेचने से पहले उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से मंजूरी और पंजीकरण पूरा करना होता है। कॉस्मेटिक्स नियम, 2020 के तहत आयातित कॉस्मेटिक को भारत में कानूनी तौर पर आयात और बिक्री से पहले पंजीकरण चाहिए।
यह प्रक्रिया अधिकारियों को उत्पाद और उसके निर्माता की पहचान करने में मदद करती है। इसी के जरिए जांचा जाता है कि कॉस्मेटिक भारत की सुरक्षा और गुणवत्ता की शर्तों को पूरा करता है या नहीं। जब बिना इजाजत वाला कॉस्मेटिक बाजार में आ जाता है, तो यह सामान्य नियामक जांच ही छूट जाती है। CDSCO ने स्पष्ट किया कि गोरी और चंदनी को आयात के लिए जरूरी पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया था।
8 सितंबर, 2026 की चेतावनी में CDSCO ने कहा कि दोनों क्रीमों में निर्धारित सीमा से अधिक भारी धातुएं हैं और इससे विषाक्त प्रभाव सहित स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं। रेगुलेटर ने उपभोक्ताओं से उत्पाद न खरीदने और न इस्तेमाल करने की सलाह दी। साथ ही बिक्रेताओं और संबंधित प्रतिष्ठानों से इनकी बिक्री और वितरण रोकने को कहा गया।
एक जरूरी सीमा भी स्पष्ट करना जरूरी है। CDSCO की सार्वजनिक चेतावनी में पारे जैसी कोई खास भारी धातु का नाम नहीं लिया गया है। चेतावनी में यह भी नहीं कहा गया कि इन दोनों उत्पादों में कॉर्टिकोस्टेरॉयड मौजूद हैं। इसलिए ऐसे दावे तभी जोड़े जा सकते हैं जब कोई अलग प्रयोगशाला रिपोर्ट उनकी पुष्टि करे।
खरीदार के लिए इसका मतलब है कि परिचित नाम या बड़े प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी पंजीकरण जांच की जगह नहीं ले सकती। कागजात सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं, इसलिए लिस्टिंग सक्रिय होने के बाद उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत में कानूनी बिक्री के लिए पंजीकरण क्यों जरूरी है
आयातित कॉस्मेटिक को कॉस्मेटिक्स नियम, 2020 के तहत पंजीकरण के बिना भारत में कानूनी तौर पर नहीं बेचा जा सकता। पंजीकरण से अधिकारियों को उत्पाद की पहचान, निर्माता की जानकारी और सुरक्षा तथा गुणवत्ता संबंधी जांच का आधार मिलता है। यदि यह जानकारी ही उपलब्ध न हो, तो बाजार में आए उत्पाद को मानक प्रक्रिया से परखा नहीं जा सकता।
CDSCO के मुताबिक गोरी और चंदनी के पास आयात का आवश्यक पंजीकरण प्रमाणपत्र नहीं था। इसलिए इन्हें सामान्य कानूनी आयात मार्ग से भारतीय दुकानों तक पहुंचने की इजाजत नहीं मिल सकती थी। यह बात अलग है कि उत्पाद बाजार में कैसे दिखे; उनके मिलने से केवल अनियमितता सामने आती है, कोई विशेष मार्ग साबित नहीं होता।
ई-कामर्स पर उत्पादों की लिस्टिंग और मूल देश की गड़बड़ी
ये क्रीमें केवल दुकानों तक सीमित नहीं थीं; इन्हें बड़े ई-कामर्स प्लेटफॉर्मों पर भी बेचने के लिए सूचीबद्ध किया गया था। अमेज़न पर गोरी की एक लिस्टिंग बाद में हटा दी गई। उस लिस्टिंग में उत्पाद के मूल देश के रूप में भारत दिखाया गया था और निर्माता तथा पैक करने वाली इकाई के रूप में नेहा ऑर्गेनिक का नाम था।
अमेज़न ने कहा कि तीसरे पक्ष के बिक्रेताओं को भारतीय कानून और कंपनी की नीतियों का पालन करना होता है। रेगुलेटर के ध्यान में आने पर गैर अनुपालन वाली लिस्टिंग हटा दी जाती है। फ्लिपकार्ट ने कहा कि उसने संबंधित कंपनी को चिह्नित कर दिया है और जांच रही है कि उत्पाद उसके नियमों का उल्लंघन करते हैं या नहीं।
मीशो के एक कार्यकारी ने कहा कि लिस्टिंग शायद पहले की हटाने की कसरत से बच गई, क्योंकि मूल देश के रूप में भारत दर्ज था। बाद में इसे हटा दिया गया। गलत मूल देश की जानकारी अहम है, क्योंकि प्लेटफॉर्म जांच के दौरान पाकिस्तानी उत्पाद की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। हांलांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि प्लेटफॉर्मों ने जानबूझकर प्रतिबंधित उत्पादों को बिकने दिया।
दोनों क्रीम बड़े प्लेटफॉर्मों पर मिलने से मामला केवल एक छोटे बिक्रेता के पेज तक सीमित नहीं रहता। गलत मूल देश की जानकारी प्लेटफॉर्म जांच को भ्रमित कर सकती है, इसलिए ऑनलाइन दावे की तुलना असली पैक से जरूरी है।
ग्राहक पैक देखकर क्या जांचें
किसी भी आयातित कॉस्मेटिक को खरीदने से पहले, खासकर ऑनलाइन, सिर्फ वेबसाइट की तस्वीर, बिक्रेता के विवरण या मूल देश की ऑनलाइन जानकारी पर भरोसा न करें। डिलीवरी के बाद असली उत्पाद और उसकी पैकिंग पर छपी जानकारी देखना जरूरी है।
इन जांचों के लिए हर खरीद से पहले प्रयोगशाला परीक्षण की जरूरत नहीं है। लेकिन गायब, अस्पष्ट या आपस में टकराती जानकारी को चेतावनी मानकर उत्पाद इस्तेमाल करने से पहले रुकना जरूरी है।
- निर्माता का नाम और पूरा पता: उत्पाद किसने बनाया और कहां बनाया, यह दोनों जानकारी साफ होनी चाहिए। इससे उत्पाद की पहचान और जिम्मेदार पक्ष को समझने में मदद मिलती है।
- मूल देश: उत्पाद जहां बना है, वह जानकारी पैक पर और ऑनलाइन लिस्टिंग में मेल खानी चाहिए। अगर दोनों जगह अलग देश लिखा है, तो यह जांच का विषय है।
- भारतीय आयातक या वितरक: आयातित कॉस्मेटिक पर उस कंपनी का विवरण होना चाहिए जो उसे भारत लाने की जिम्मेदारी निभा रही है। यह जानकारी उपभोक्ता को संपर्क और जवाबदेही का पता देती है।
- आयात पंजीकरण: आयातित कॉस्मेटिक से जुड़ी जरूरी पंजीकरण जानकारी पैक पर मौजूद होनी चाहिए। इसके बिना केवल ऑनलाइन बिक्री को मंजूरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
- बैच या लॉट नंबर: यह नंबर उत्पाद के खास बैच की पहचान करता है। अगर नंबर अनुपस्थित या अस्पष्ट है, तो उत्पाद की जांच और शिकायत मुश्किल हो सकती है।
- निर्माण और समाप्ति तिथि: तारीखें साफ और बदली हुई न हों। अगर निर्माण या एक्सपायरी तिथि गायब, अस्पष्ट या छेड़छाड़ वाली हो, तो उत्पाद का उपयोग न करें।
- उत्पाद का नाम और पैकिंग: डिलीवरी पर मिला उत्पाद वही होना चाहिए जो वेबसाइट पर दिखाया और बताया गया था। नाम, डिजाइन और पैकिंग में अंतर दिखे तो उपयोग से पहले जांच करें।
ऑनलाइन खरीदारी में एक अतिरिक्त जांच डिलीवरी के बाद करनी चाहिए। वेबसाइट पर लिखी जानकारी की तुलना असली पैक से करें। मिसाल के लिए, अगर ऑनलाइन लिस्टिंग में मेड इन इंडिया लिखा है और मिलने वाली क्रीम पर मेड इन पाकिस्तान छपा है, तो दोनों जानकारी आपस में मेल नहीं खातीं। ऐसी विसंगति को उत्पाद इस्तेमाल करने से पहले जांचना चाहिए।
यदि पैक पर निर्माता, आयातक या जरूरी पंजीकरण जानकारी साफ नहीं है, तो केवल इसलिए उत्पाद को मंजूरीशुदा न मानें कि वह किसी बड़े शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर बिक रहा था। ऑनलाइन लिस्टिंग होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि आयातित कॉस्मेटिक भारत में बेचने के लिए प्राधिकृत है।



















