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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद असम प्रशासन की तैयारी, गोलाघाट सीमा क्षेत्र में 18 अगस्त से शुरू होगा बेदखली अभियानअसम
16 अग॰ 2026, 7:59 pm (11 घंटे पहले)· 3

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद असम प्रशासन की तैयारी, गोलाघाट सीमा क्षेत्र में 18 अगस्त से शुरू होगा बेदखली अभियान

असम के गोलाघाट जिले में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरापानी के नं. 2 नेघेरीबिल में रह रहे 59 परिवारों को 18 अगस्त तक जमीन खाली करने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।

असम के गोलाघाट जिले में असम-नागालैंड सीमा पर स्थित मेरापानी क्षेत्र के नं. 2 नेघेरीबिल में 59 परिवारों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई दोबारा शुरू होने जा रही है। जिला प्रशासन और वन विभाग की एक संयुक्त टीम ने रविवार को प्रभावित इलाके का दौरा करके निवासियों को अंतिम बेदखली नोटिस थमाया। अधिकारियों ने इन परिवारों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 18 अगस्त तक अपने मकान खाली कर दें, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हटा कानूनी अड़ंगा

यह पूरा मामला नं. 2 नेघेरीबिल इलाके में वन भूमि पर कब्जे से जुड़ा हुआ है। इससे पहले वन विभाग ने एक बड़े अभियान के तहत 205 परिवारों को इस इलाके से हटा दिया था। हालांकि 59 परिवारों ने इस कार्रवाई का विरोध किया और कानूनी राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने पहले गुवाहाटी उच्च न्यायालय और बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत में मामला लंबित रहने के दौरान इन परिवारों को बेदखली पर स्थगनादेश मिल गया था।

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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बेदखली का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस निर्णय के बाद जिला प्रशासन ने शेष बचे परिवारों को तय समय सीमा के भीतर स्थान खाली करने का आदेश दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि 18 अगस्त तक लोग स्वेच्छा से घर खाली नहीं करते हैं, तो समय सीमा समाप्त होते ही पुलिस बल की मदद से जमीन खाली कराई जाएगी।

ड्रोन कैमरों से निगरानी और प्रशासनिक तैयारियां

प्रस्तावित बेदखली अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे इलाके का व्यापक सर्वेक्षण किया है। रविवार को अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी मकानों पर क्रमिक संख्या दर्ज की और ड्रोन कैमरों की मदद से पूरे क्षेत्र का सटीक नक्शा तैयार किया। इन ड्रोन तस्वीरों के माध्यम से मकानों की वर्तमान स्थिति और भौगोलिक बनावट का आकलन किया गया है ताकि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

इस क्षेत्र में सुरक्षा और तैयारियों का जायजा लेने के लिए इसी साल मई महीने में विशेष मुख्य सचिव एम के यादव ने नं. 2 नेघेरीबिल का दौरा किया था। उनके इस निरीक्षण के दौरान वन विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे थे। उस समय भी ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी की गई थी ताकि यह जांचा जा सके कि पिछले बेदखली अभियान के बाद कहीं कोई नया निर्माण तो नहीं किया गया है।

सवाल-जवाब

गोलाघाट में बेदखली अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
यह बेदखली अभियान असम-नागालैंड सीमा पर स्थित मेरापानी के नं. 2 नेघेरीबिल क्षेत्र में वन भूमि को खाली कराने के लिए चलाया जा रहा है।
कितने परिवारों को बेदखली का अंतिम नोटिस दिया गया है?
जिला प्रशासन और वन विभाग ने कुल 59 परिवारों को 18 अगस्त तक जगह खाली करने का अंतिम नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट का इस मामले पर क्या फैसला आया था?
सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रभावित परिवारों की याचिका खारिज कर दी और बेदखली पर लगी रोक हटा ली।
क्या इससे पहले भी इस इलाके में बेदखली की कार्रवाई हुई थी?
हाँ, वन विभाग ने इससे पहले नं. 2 नेघेरीबिल इलाके से 205 परिवारों को बेदखल कर जमीन खाली कराई थी।
प्रशासन ने तैयारियों के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
अधिकारियों ने मकानों की क्रमिक संख्या दर्ज करने के साथ-साथ इलाके के सर्वेक्षण और मैपिंग के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

यह मामला अंतरराज्यीय सीमा और वन संरक्षण कानूनों के बीच के जटिल संघर्ष को उजागर करता है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय राज्य सरकार को अतिक्रमण हटाने का स्पष्ट अधिकार देता है। आने वाले दिनों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण तरीके से इस अभियान को पूरा करना होगी, जिसके लिए भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती आवश्यक होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 घंटे पहले

यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक पर्यावरण प्रबंधन और राज्य के भू-संसाधनों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। जब इस तरह के उच्च-संवेदनशील सीमाई क्षेत्रों में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है, तो इससे कॉर्पोरेट और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग की स्पष्टता बढ़ती है। निवेशकों और विश्लेषकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि शीर्ष अदालत के फैसलों के बाद कानून का राज और भू-स्वामित्व के मामलों में अनिश्चितता दूर हो रही है, जिससे भविष्य की विकासात्मक नीतियों को सही दिशा मिलेगी।

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