राजस्थान के अधिकांश हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के लौटने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकी है. मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार मानसून वापसी की सीमा रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर गुजर रही है. राज्य के भीतर यह रेखा उदयपुर तक विस्तृत हो चुकी है, जिससे आगामी दो से तीन दिनों की अवधि में प्रदेश के शेष बचे इलाकों से भी इसके पूरी तरह विदा होने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह मुफीद नजर आ रही हैं. मानसूनी हवाओं की पकड़ कमजोर होते ही राज्य भर में वर्षा की गतिविधियों में भारी कमी दर्ज की गई है, जिसके चलते अक्टूबर महीने के शुरुआती दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा.
बीते चौबीस घंटों में बारिश और तापमान की स्थिति
बीते चौबीस घंटों की मौसमी हलचल पर नजर डालें तो प्रदेश के चुनिंदा इलाकों में ही बादलों की मौजूदगी देखी गई. इस दौरान जयपुर, टोंक, उदयपुर और बीकानेर जिलों के कुछ सीमित क्षेत्रों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज हुई. वहीं पश्चिमी रेगिस्तानी भूभाग में गर्मी का असर बरकरार है, जहां फलोदी जिले में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 38.0 डिग्री सेल्सियस मापा गया. वर्षा में आई इस व्यापक कमी के बाद अब अधिकतम और न्यूनतम तापमान में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की गुंजाइश नहीं दिख रही है. आने वाले करीब एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश भूभाग में सूखा और साफ मौसम बना रहेगा. 1 अक्टूबर को लेकर भी राज्य के किसी भी जिले के लिए कोई विशेष मौसमी चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया है, जिसका अर्थ है कि सभी जिले सामान्य मौसमी श्रेणी में शामिल हैं. हालांकि स्थानीय मौसमी दशाओं की वजह से पूर्वी राजस्थान के कुछ सीमित स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी या बहुत हल्की वर्षा की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन बड़े पैमाने पर बारिश होने के कोई आसार नहीं हैं.
दिन में तेज धूप और रात के समय हल्की ठंडक का दौर
मानसून के जाने के साथ ही राजस्थान के दैनिक मौसम में एक खास बदलाव नजर आने लगा है. दिन के वक्त तेज धूप खिलने से वातावरण में उमस और गर्मी का प्रभाव बना रहेगा, लेकिन रात ढलते ही पारे में क्रमिक गिरावट शुरू हो जाएगी, जिससे कई इलाकों में हल्की गुलाबी ठंडक का अहसास होने लगा है. सीकर और समूचे शेखावाटी अंचल सहित उत्तरी राजस्थान के विभिन्न जिलों में रात और अलसुबह का मौसम काफी सुहावना और खुशनुमा रहने की उम्मीद है. इसके विपरीत, पश्चिमी राजस्थान के खुले और रेतीले हिस्सों में दिन के समय सूरज की तपिश अधिक परेशान कर सकती है, जिसकी पुष्टि फलोदी के 38.0 डिग्री सेल्सियस तापमान से होती है. पश्चिमी भाग में विकसित हो रही एंटी-साइक्लोनिक यानी प्रति-चक्रवाती गतिविधियों के असर से दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी भी दर्ज की जा सकती है.
एक से पांच अक्टूबर तक मुख्यतः शुष्क रहेगा मौसम
कैलेंडर के पहले पांच दिनों यानी 1 अक्टूबर और 2 अक्टूबर से लेकर 3, 4 और 5 अक्टूबर तक पूरे राज्य में वर्षा से जुड़ी गतिविधियां बेहद सीमित और कमजोर रहेंगी. इन पांच दिनों में अधिकांश जिलों में आसमान पूरी तरह साफ रहेगा और खिली हुई तेज धूप निकलेगी. स्थानीय वायुमंडलीय नमी के चलते केवल पूर्वी राजस्थान के गिने-चुने इलाकों में मामूली हल्की फुल्की फुहारें पड़ सकती हैं, लेकिन इसे किसी व्यापक बारिश के दौर के तौर पर बिल्कुल नहीं देखा जा सकता. कुल मिलाकर पूरा पहला हफ्ता शुष्क परिस्थितियों के नाम रहने वाला है.
छह अक्टूबर के बाद नए पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मिजाज
अक्टूबर के पहले हफ्ते के समापन की ओर बढ़ते ही मौसमी हवाओं का रुख एक बार फिर पलटने के मजबूत संकेत दिख रहे हैं. करीब 6 और 7 अक्टूबर के आसपास पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक नया सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे सकता है. इस प्रणाली के असर से राजस्थान के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बादलों का जमावड़ा शुरू होगा और रुक-रुक कर वर्षा का दौर फिर से सक्रिय हो सकता है. पंजाब और हरियाणा की सीमाओं से सटे इलाकों में इस मौसमी बदलाव का सबसे पहला असर दिखाई देने की संभावना जताई गई है. विशेष रूप से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, रावतसर, नोहर, भादरा, सूरतगढ़ और अनूपगढ़ जैसे इलाकों में आकाश में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और बारिश की शुरुआत हो सकती है.
सात से नौ अक्टूबर के बीच बारिश का नया दौर संभव
अनुमान के मुताबिक 7 अक्टूबर से लेकर 9 अक्टूबर के दौरान उत्तरी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश का एक नया स्पैल सक्रिय हो सकता है. इस दौरान कुछ जगहों पर तेज गति से बारिश होने के साथ-साथ बादलों की गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है. हालांकि इस बारिश की वास्तविक तीव्रता और फैलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाला पश्चिमी विक्षोभ कितना ताकतवर रहता है और उसकी गति किस दिशा में केंद्रित होती है. इसके तुरंत बाद 10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर के दौरान भी आने वाले संभावित पश्चिमी विक्षोभों की गतिविधियों पर मौसम वैज्ञानिकों की करीबी नजर बनी रहेगी.
हरियाणा पर बने मौजूदा चक्रवाती परिसंचरण का कमजोर प्रभाव
वर्तमान मौसमी तंत्र की बात करें तो इस समय उत्तर हरियाणा और उसके आसपास के वायुमंडल में एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के स्वरूप में सक्रिय है. यह तंत्र समुद्र तल से लगभग 1.5 किलोमीटर से लेकर 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई के मध्य फैला हुआ है. इसके साथ ही ऊपरी क्षोभमंडल में लगभग 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर उत्तर दिशा की ओर एक ट्रफ रेखा भी मौजूद है. हालांकि इस मौजूदा मौसमी संरचना का असर राजस्थान के भूभाग पर काफी कमजोर पड़ चुका है, जिस वजह से इसका राज्य के मौसम पर कोई बड़ा या प्रभावी असर देखने को नहीं मिल रहा है और प्रदेश में व्यापक सूखापन बना हुआ है.


















