उच्च न्यायपालिका में प्रशासनिक बदलावों के तहत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के कई उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अपनी सिफारिशएं भेजी हैं। इस नए कदम से दिल्ली, बॉम्बे, पटना, इलाहाबाद, राजस्थान, कलकत्ता और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण उच्च न्यायालयों में स्थायी नेतृत्व तय करने की दिशा में प्रगति हुई है। कॉलेजियम के इन प्रस्तावों का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों में लंबे समय से चल रही शीर्ष पदों की रिक्तियों को भरना और कार्यवाहक जजों को पूर्णकालिक जिम्मेदारी सौंपना है।
पांच राज्यों के उच्च न्यायालयों में नई नियुक्तियां
कॉलेजियम की सिफारिशों के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जज वी कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत जज महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की जिम्मेदारी देने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा, कई उच्च न्यायालयों में पहले से कार्यवाहक के रूप में सेवाएं दे रहे जजों को पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश बनाने की तैयारी है। इस क्रम में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसी तरह जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्त करने की बात कही गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत रविंद्र विठ्ठलराव घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश पद के लिए अनुशंसित किया गया है।
मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट पर फिलहाल रोक
यद्यपि कई बड़े राज्यों के लिए मुख्य न्यायाधीशों के नामों पर सहमति बन गई है, लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश की तैनाती पर कॉलेजियम ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। इन दोनों न्यायालयों में शीर्ष नियुक्ति को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट होनी बाकी है।
कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित इन नामों के बाद अब नियुक्ति की आधिकारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक चरण पूरे होने के बाद ही केंद्र सरकार की ओर से इन मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।



















