तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में स्थित प्रसिद्ध अन्नामलाईयार मंदिर के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां धार्मिक आस्था के नाम पर जानलेवा जोखिम उठाने से एक श्रद्धालु की जान चली गई। अंधविश्वास और चमत्कार की उम्मीद में आंध्र प्रदेश के रहने वाले 36 वर्षीय मणिकुमार दो अति संकरे पत्थर के खंभों के बीच से निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी वे वहां बुरी तरह फंस गए। पत्थरों के बीच शरीर कस जाने और सांस रुकने की वजह से तड़प-तड़पकर उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने मंदिर परिसर में वर्षों से चली आ रही जोखिमभरी मान्यताओं और वहां सुरक्षा इंतजामों के अभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिरिवालम परिक्रमा और इदुक्कू पिल्लैयार मंदिर का महत्व
तिरुवन्नामलाई स्थित अन्नामलाईयार मंदिर भगवान शिव के प्रमुख और अत्यंत पवित्र मंदिरों में गिना जाता है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद भक्त पहाड़ी के चारों ओर 14 किलोमीटर लंबी गिरिवालम परिक्रमा करते हैं। इस पवित्र धार्मिक पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालु अष्ट लिंगम, विभिन्न साधु-संतों के आश्रमों और कई छोटे-बड़े मंदिरों के दर्शन करते हैं। इसी परिक्रमा मार्ग पर इदुक्कू पिल्लैयार मंदिर स्थित है, जिसे भगवान गणेश के संकरे मार्ग वाले मंदिर के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर दो पत्थरों के बीच स्थित बेहद संकरे रास्ते के लिए श्रद्धालुओं के बीच विशेष रूप से चर्चित है।
बीमारियों से मुक्ति की अंधश्रद्धा और अनोखी परंपरा
स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के आसपास लगे सूचना पट्टों के अनुसार, इन दो संकरे खंभों के बीच से खुद को निचोड़कर निकालने की परंपरा दशकों से चली आ रही है। लोगों में यह दृढ़ विश्वास है कि जो व्यक्ति इस बेहद तंग अंतर से सफलतापूर्वक निकल जाता है, उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उसकी सभी नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाती हैं। इसके अलावा, इस प्रक्रिया को जादू-टोने और ऊपरी साए का असर खत्म करने का जरिया भी माना जाता है। श्रद्धालु यह सोचकर इस जोखिम को उठाते हैं कि इससे शरीर का पुराना दर्द, माइग्रेन और अन्य गंभीर बीमारियों से तुरंत राहत मिल जाएगी। वहीं, नवविवाहित जोड़े संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर यहां विशेष रूप से मत्था टेकते हैं और इस तंग रास्ते से गुजरने की कोशिश करते हैं।
शुक्रवार रात का भयानक हादसा और मणिकुमार की मौत
इसी चमत्कारिक दावे और अटूट विश्वास के झांसे में आकर आंध्र प्रदेश के राजामहेंद्रवरम (राजमुंदरी) निवासी 36 साल के मणिकुमार ने शुक्रवार की रात इस तंग रास्ते से गुजरने की कोशिश की। उनका शरीर भारी था, जिसके कारण वे दोनों पत्थर के खंभों के बीच बेहद कसकर फंस गए। निकलने की हर कोशिश के साथ उनका शरीर और ज्यादा उलझता गया, जिससे उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत दमकल विभाग और नागरिक बचाव दल को सूचित किया। मौके पर पहुंचे बचाव कर्मियों और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद मणिकुमार को पत्थरों के बीच से बाहर निकाला और आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि दम घुटने के कारण उनकी जान गई है।
रविवार को टला एक और बड़ा हादसा
मणिकुमार की दुखद मौत का खौफ अभी शांत भी नहीं हुआ था कि रविवार को फिर से हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उसी इदुक्कू पिल्लैयार मंदिर में उमड़ पड़ा। इस दौरान सुरक्षा की अनदेखी के चलते एक और खौफनाक घटना घटित हुई। आंध्र प्रदेश की ही एक अत्यधिक वजन वाली महिला श्रद्धालु ने उसी संकरे पत्थर के रास्ते से गुजरने का प्रयास किया। देखते ही देखते वह भी दो खंभों के बीच फंस गईं और सांस न ले पाने के कारण तड़पने लगीं। मौके पर चीख-पुकार मच गई। गनीमत यह रही कि आसपास खड़े अन्य श्रद्धालुओं ने बिना समय गंवाए मुस्तैदी दिखाई और भारी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर खींच लिया। समय रहते मदद मिलने से महिला की जान बच गई और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
प्रशासन, एचआरएंडसीई विभाग और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार दो हादसों के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि आस्था के नाम पर इस तरह का जानलेवा खेल खुलेआम चलने दिया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (एचआरएंडसीई) और जिला प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। मंदिर परिसर में स्पष्ट और बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए, जिन पर अधिक वजन या शारीरिक रूप से असुरक्षित लोगों को इस रास्ते में न जाने की साफ सलाह दी जाए। साथ ही, श्रद्धालुओं की शारीरिक स्थिति और फिटनेस को जांचने के लिए स्पष्ट नियम बनाने, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करने और पुलिस की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई है ताकि भविष्य में किसी और की जान इस तरह के अंधविश्वास की भेंट न चढ़े।




















