पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले उत्तराखंड के नैनीताल में प्राकृतिक नजारों और झील की खूबसूरती के अलावा कई स्थानीय कलाएं भी लोगों का दिल जीत रही हैं। यहाँ की चहल-पहल भरी माल रोड पर टहलते वक्त पर्यटकों का ध्यान रंग-बिरंगे ऊन के धागों से सजे अनोखे स्टॉल की तरफ आसानी से खिंच जाता है। यहाँ पारंपरिक हुनर के जरिए हाथों से ऐसे रिस्ट बैंड तैयार किए जा रहे हैं, जो शहर घूमने आने वाले लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं।
पसंद का रंग और नाम चुनने की पूरी आजादी
इस हस्तनिर्मित रिस्ट बैंड की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पूरी तरह से खरीदार की इच्छा के अनुसार तैयार किया जाता है। स्टॉल पर पहुँचने वाले सैलानी अपनी पसंद का रंग संयोजन और बनावट चुन सकते हैं। इसके साथ ही, वे इस बैंड पर अपना नाम, अपने परिजनों या किसी खास दोस्त का नाम भी लिखवा सकते हैं। कुछ ही पलों में बनकर तैयार हो जाने वाली यह छोटी सी चीज नैनीताल के सफर को हमेशा के लिए यादगार बना देती है और घर लौटने पर अपनों को देने के लिए एक नायाब तोहफा साबित होती है।
महज 5 मिनट में बनकर होता है तैयार
आमतौर पर लोगों को लगता है कि हाथ से की जाने वाली बारीक बुनाई में लंबा वक्त लगता होगा, लेकिन यहाँ ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस काम में जुटे स्थानीय कारीगर चंद प्रकाश के अनुसार, वे एक रिस्ट बैंड को मात्र 5 मिनट के भीतर बुनकर तैयार कर देते हैं। सैलानी जैसे ही अपनी पसंद के रंग और लिखवाए जाने वाले नाम की जानकारी देते हैं, चंद प्रकाश अपनी उंगलियों की कलाकारी से तुरंत उसे खूबसूरत आकार दे देते हैं।
जेब पर भारी नहीं पड़ती यह यादगार निशानी
पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर अक्सर यादगारी चीजें काफी महंगी मिलती हैं, मगर यह कस्टमाइज्ड ऊनी बैंड बेहद किफायती है। चंद प्रकाश के मुताबिक, इस हस्तनिर्मित रिस्ट बैंड की कीमत करीब ₹50 से ₹100 के बीच रखी गई है। इतने कम बजट में सैलानियों को नैनीताल के इस सफर से जुड़ी एक ऐसी सुंदर और व्यक्तिगत निशानी मिल जाती है, जो मशीन से बनी आम चीजों से कहीं अधिक मूल्यवान महसूस होती है।
अल्मोड़ा के सल्ट से निकलकर नैनीताल में बनाई पहचान
मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के निवासी चंद प्रकाश पिछले करीब 7 वर्षों से लगातार हाथ से रिस्ट बैंड तैयार करने का काम कर रहे हैं। वे विभिन्न रंगों के धागों और अनूठे पैटर्न का उपयोग करके पर्यटकों के लिए ये उत्पाद तैयार करते हैं। बीते सात सालों की लगन और मेहनत के दम पर उनके द्वारा बनाए गए यह ऊनी बैंड अब माल रोड पर आने वाले सैलानियों के बीच एक मुख्य आकर्षण का रूप ले चुके हैं।
हाथों की बुनाई में छिपी रचनात्मकता और पुरानी यादें
इन बैंडों के निर्माण में किसी भी तरह की आधुनिक मशीन का सहारा नहीं लिया जाता। कारीगर अपने हाथों से अलग-अलग रंगों के ऊन को आपस में पिरोते हुए अक्षरों और डिजाइनों को उभारते हैं। यही वजह है कि हर एक रिस्ट बैंड में शिल्पकार की मेहनत और उसका रचनात्मक नजरिया साफ झलकता है।
माल रोड की शाम में रंग-बिरंगे धागे सैलानियों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं। बहुत से लोग अपने हाथों में इसे पहनकर सैर करते हैं और कई लोग इसे अपने साथ संजोकर ले जाते हैं। रंगीन ऊन की यह साधारण सी बुनाई कई लोगों को अपने बचपन के दिनों और स्कूल के समय बांधी जाने वाली डोरियों की याद दिला देती है। अपनेपन की भावना से जुड़े होने के कारण नैनीताल के मुसाफिरों के लिए यह सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि पुरानी स्मृतियों से जुड़ने का एक जरिया बन जाता है। यदि आप शहर से विदा लेते समय किसी दोस्त या भाई-बहन के लिए कोई आत्मीय उपहार तलाश रहे हैं, तो यह छोटा सा व्यक्तिगत तोहफा एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है।
























