चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच 10 लाख टन कर-मुक्त आयात को मंजूरी, अरविंद केजरीवाल ने एथनॉल नीति पर उठाए सवालनई दिल्ली में मिले भारत और जापान के रक्षा मंत्री, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक पर बनी सहमतिपुणे महारैली से पहले राहुल गांधी ने पूछा सवाल, भारतीय महिला होने के क्या हैं मायनेस्टार प्लस के लोकप्रिय शो 'तेरे लिए' के 16 साल, कैलाश खेर का टाइटल ट्रैक आज भी सोशल मीडिया पर मचा रहा धमालस्कॉटियाबैंक का अनुमान, 1.41 के स्तर की ओर बढ़ सकता है ब्रिटिश पाउंडटॉम क्रूज़ बने डिगर रॉकवेल: आलेहांद्रो जी. इनारितु की नई अपोकैलिप्टिक कॉमेडी में दिखेगा अनोखा लुकतकनीक की मजबूती से चमकी एशियाई मुद्राएं, दक्षिण कोरियाई वॉन ने बनाई बढ़तजर्मनी के मजबूत PPI आंकड़ों से यूरो में तेजी, अमरीकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक दोगुना कियाघर की बालकनी में बिना बाजार के बीज उगाएं रसीले टमाटर, जानिए कटिंग से लेकर कटाई तक का आसान तरीकाबिहार लोकभवन की बड़ी कार्रवाई, दक्षता परीक्षा से दूर रहे 4 आशुलिपिकों को नौकरी से निकाला
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच 10 लाख टन कर-मुक्त आयात को मंजूरी, अरविंद केजरीवाल ने एथनॉल नीति पर उठाए सवालनेता जी
20 अग॰ 2026, 11:40 pm (1 घंटे पहले)· 3

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच 10 लाख टन कर-मुक्त आयात को मंजूरी, अरविंद केजरीवाल ने एथनॉल नीति पर उठाए सवाल

त्योहारों से पहले देश में चीनी की आसमान छूती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 साल में पहली बार 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी है। इस कदम के बाद इथेनॉल उत्पादन नीति और कीमतों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

देश में आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के शुल्क-मुक्त आयात को हरी झंडी दे दी है। पिछले 10 वर्षों के दौरान यह पहला अवसर है जब भारत को अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी बाजारों से चीनी मंगवाने की जरूरत पड़ी है। इस निर्णय का प्राथमिक लक्ष्य बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे खुदरा और थोक दामों में स्थिरता लाना है।

चीनी आयात शुल्क शून्य करने का निर्णय

घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत दूर करने और व्यापारियों को राहत देने के लिए सरकार ने आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है। इस फैसले के तहत 10 लाख टन चीनी पर कोई सीमा शुल्क नहीं चुकाना होगा, जिससे चीनी मिलें और रिफाइनिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीनी की त्वरित खरीद कर सकेंगी। सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब कुछ ही दिनों में रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार शुरू होने वाले हैं। इन अवसरों पर हलवाइयों, मिठाई निर्माताओं और सामान्य परिवारों में चीनी की मांग में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

कीमतों में उछाल और सप्लाई घटने के प्रमुख कारण

हाल के दिनों में चीनी के दामों में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है। महज 17 दिनों की अल्पावधि में चीनी की कीमतें 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गईं। बाजार विशेषज्ञों और नीतिगत विश्लेषणों के अनुसार इस संकट के दो मुख्य कारण हैं। पहला कारण प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की मार के चलते गन्ने की फसल का प्रभावित होना है। दूसरा प्रमुख कारण केंद्र सरकार का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम है। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने गन्ने के रस का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ाया था। इस प्रक्रिया में लगभग 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने को इथेनॉल उत्पादन के लिए भेज दिया गया, जिससे देश में खाद्य उपयोग वाली चीनी का भंडार घट गया।

निर्यात पर रोक के बाद अब आयात का सहारा

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2026 में चीनी के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंसों की अनिश्चितता को देखते हुए यह फैसला लिया गया था। हालांकि निर्यात रोकने के बावजूद घरेलू उत्पादन और खपत के बीच का अंतर समाप्त नहीं हो सका। नतीजतन, त्योहारों के समय बाजार में कमी और महंगाई से बचने के लिए सरकार को आखिरकार आयात शुल्क हटाकर चीनी आयात की अनुमति देनी पड़ी।

अरविंद केजरीवाल ने इथेनॉल नीति पर साधे निशाने

सरकार के इस कदम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं और आर्थिक फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि देश में चीनी की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं क्योंकि गन्ने से बड़े पैमाने पर इथेनॉल बना दिया गया है और अब कमी को पूरा करने के लिए सरकार को आयात शुल्क शून्य करके चीनी मंगवानी पड़ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से शुरू की गई नीति के कारण ही आज देश को चीनी खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है।

चीन के बारे में

चीन पूर्वी एशिया में स्थित एक प्राचीन सभ्यता वाला देश है, जिसका लिखित इतिहास और सांस्कृतिक परंपराएं 6,000 वर्षों से भी अधिक पुरानी हैं। ऐतिहासिक रूप से चीन कई बड़े अविष्कारों का केंद्र रहा है, जिनमें कागज, दिशा-सूचक कम्पास, बारूद और मुद्रण तकनीक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त झोऊ कोऊ दियन गुफा में मिले पेकिंग मानव के जीवाश्म यह दर्शाते हैं कि इस क्षेत्र में 3,00,000 से 5,00,000 वर्ष पूर्व भी मानव आबादी का अस्तित्व था और वे आग के उपयोग में सक्षम थे।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर सरकार के इस निर्णय और अरविंद केजरीवाल के बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने नीतिगत योजना में दूरदर्शिता की कमी और बढ़ती महंगाई पर चिंता व्यक्त की, जबकि अन्य लोगों का कहना था कि ईंधन निर्भरता घटाने के लिए इथेनॉल उत्पादन आवश्यक था और त्योहारों से पहले आयात शुल्क हटाना कीमतों को नियंत्रित करने का एक व्यावहारिक समाधान है।

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सवाल-जवाब

सरकार ने चीनी के आयात को लेकर क्या फैसला किया है?
सरकार ने घरेलू कमी को दूर करने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त यानी शून्य ड्यूटी आयात की अनुमति दी है।
भारत कितने समय बाद चीनी का आयात कर रहा है?
भारत पिछले 10 वर्षों में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में विदेश से चीनी मंगवा रहा है।
चीनी की कीमतों में अचानक तेजी क्यों आई?
मौसम की मार से गन्ने की पैदावार प्रभावित होने और लगभग 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में करने से घरेलू सप्लाई कम हो गई।
अरविंद केजरीवाल ने सरकार की इथेनॉल नीति पर क्या सवाल उठाया?
उन्होंने कहा कि गन्ने से इथेनॉल बनाने की नीति के कारण चीनी की कमी हुई, जिससे 17 दिनों में दाम 20 रुपये बढ़ गए और अब देश को विदेशी मुद्रा खर्च करके चीनी आयात करनी पड़ रही है।
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