देश में स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को बड़ा विस्तार देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज 3 को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये की इस व्यापक परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश के बिजली पारेषण तंत्र को अत्याधुनिक बनाना और सौर तथा पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से पैदा होने वाली बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड तक आसानी से पहुंचाना है। इस फैसले के अमल में आने से देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली नेटवर्क पहले से कहीं अधिक मजबूत और स्थिर बनेगा।
135 गीगावाट स्वच्छ बिजली और विशाल बैटरी बैकअप का लक्ष्य
इस तीसरे चरण के तहत विशाल स्तर पर पारेषण लाइनें और उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। परियोजना के माध्यम से 135 गीगावाट नवीकरणीय बिजली की सुगम निकासी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में स्थापित बड़े सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित बिजली को मांग वाले औद्योगिक और आवासीय केंद्रों तक ले जाना संभव हो सकेगा। ग्रिड में उत्पादन के उतार-चढ़ाव को संतुलित रखने के लिए परियोजना में 50 गीगावाट घंटे क्षमता का बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र भी शामिल किया गया है। यह भंडारण प्रणाली दिन के समय उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा को सहेजकर रखेगी और रात के पीक ऑवर्स में निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध कराएगी।
विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में खुलेंगे नौकरियों के नए रास्ते
इस बड़े निवेश से देश के औद्योगिक क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भारी रफ्तार मिलने की संभावना है। पारेषण टावरों, हाई-वोल्टेज केबलों, ट्रांसफार्मरों और उन्नत ग्रिड उपकरणों की बड़े पैमाने पर मांग पैदा होगी, जिसका सीधा फायदा घरेलू विनिर्माण इकाइयों को पहुंचेगा। बुनियादी ढांचे के विस्तार के चलते निर्माण और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हजारों कुशल तथा अकुशल कामगारों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। परियोजना के लागू होने से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बिजली प्रवाह की तकनीकी बाधाएं दूर होंगी और ग्रिड ट्रिपिंग जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।
नरेंद्र मोदी ने साझा किए परियोजना के मुख्य स्तंभ
केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस कदम पर जानकारी साझा करते हुए नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसके दूरगामी प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज 3 का यह फैसला देश को स्वच्छ बिजली, अधिक सशक्त ग्रिड और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से 135 GW बिजली की निकासी और 50 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता सुनिश्चित होगी, जिससे विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में काम के नए रास्ते बनेंगे।
जनता की प्रतिक्रिया
इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्साह व्यक्त किया और इसे भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों तथा बुनियादी ढांचे को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया। कई लोगों ने इस बात पर संतोष जताया कि बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज शामिल होने से ग्रिड स्थिरता की पुरानी चुनौतियों का ठोस समाधान निकलेगा।






























