नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक सवाल पूछकर देश में खेलों के प्रति बदलते नजरिए पर चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने नागरिकों से पूछा कि क्या वे खेलों को लेकर समाज की सोच और रवैये में कोई बदलाव महसूस कर रहे हैं। इस सवाल के बाद देश में खेल संस्कृति, बुनियादी ढांचे के विकास और वैश्विक स्तर पर खेलों से जुड़ी नई चुनौतियों पर व्यापक बहस शुरू हो गई है।
खेल संस्कृति और बुनियादी ढांचे में सुधार
नरेंद्र मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में खेलों के विकास और प्रोत्साहन को लेकर नए सिरे से विचार किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों ने खेल विकास की दिशा में अहम भूमिका निभाई है। उदाहरण के तौर पर ओडिशा ने राष्ट्रीय हॉकी टीम को प्रायोजित कर और स्थानीय मैदानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस कर एक मिसाल पेश की है। इसके साथ ही देश भर में जिला स्तर पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, योग्य प्रशिक्षकों की तैनाती करने और युवा एथलीटों के लिए स्पोर्ट्स साइंस की सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।
वैश्विक रुझान और सट्टेबाजी पर बढ़ती चिंताएं
एक तरफ जहां खेलों में युवाओं की रुचि बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों के व्यवसायीकरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा 2 अक्टूबर 2025 को जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग वैध खेल सट्टेबाजी को समाज और खेल दोनों के लिए हानिकारक मानने लगे हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि खेलों के साथ सट्टेबाजी और अत्यधिक व्यावसायिक गतिविधियों का जुड़ना खेल की निष्पक्षता और भावना को प्रभावित कर सकता है, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं जताई जा रही हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
नरेंद्र मोदी के इस सवाल पर नागरिकों ने सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। जहां कई लोगों ने देश में विकसित हो रही खेल संस्कृति और राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना की, वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर आयोजनों के कुप्रबंधन और खेल निधियों के सही उपयोग को लेकर चिंताएं भी व्यक्त कीं।


























