अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च और उम्मीदवारों के साथ समन्वित अभियान व्यय पर दशकों पुरानी सीमाएं खत्म कर दी हैं। इस ऐतिहासिक फैसले ने अमेरिका के चुनावी वित्त कानूनों को एक झटके में बदल दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर इस निर्णय को रिपब्लिकन पार्टी और पहले संशोधन की बड़ी जीत करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है
इस फैसले से वो सीमाएं समाप्त हो गई हैं जो राजनीतिक दलों को उनके उम्मीदवारों के साथ मिलकर असीमित धनराशि खर्च करने से रोकती थीं। ये प्रतिबंध इसलिए बनाए गए थे ताकि कोई पार्टी किसी एक उम्मीदवार के लिए बेलगाम धन जुटाने का जरिया न बन जाए। अब पाबंदियां हटने के बाद राजनीतिक दल संघीय चुनावी वित्त कानून का उल्लंघन किए बिना अपने उम्मीदवारों की चुनावी लड़ाई में कहीं ज्यादा संसाधन झोंक सकेंगे।
कोर्ट ने पहले संशोधन की यह व्याख्या दी कि राजनीतिक खर्च भाषण की स्वतंत्रता का एक रूप है और इस पर लगाई गई सीमाएं असंवैधानिक हैं। पार्टी और उम्मीदवार के बीच समन्वित तरीके से किया गया खर्च इसी संवैधानिक संरक्षण के दायरे में आता है और इसे सरकारी कानून से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
ट्रंप का ट्रूथ सोशल पर जश्न
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर इस फैसले का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने लिखा:
सुप्रीम कोर्ट ने अभी राजनीतिक खर्च से प्रतिबंध हटाए! रिपब्लिकन के लिए और सबसे जरूरी, पहले संशोधन के लिए बड़ी जीत!
ट्रंप ने इस फैसले को सिर्फ पार्टी की जीत नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार की रक्षा के रूप में पेश किया। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तात्कालिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी ढांचे को इससे सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि वे काफी समय से इन पाबंदियों को हटाने की मांग करते रहे थे।
पहला संशोधन और राजनीतिक धन का जटिल रिश्ता
अमेरिका में दशकों से यह बहस चली आ रही है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहां खत्म होती है और राजनीतिक भ्रष्टाचार कहां शुरू होता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक के बाद एक फैसलों में यह स्थापित किया है कि चुनावी अभियान पर खर्च करना पहले संशोधन के तहत संरक्षित अभिव्यक्ति है। इस ताजे फैसले में यही तर्क पार्टी और उम्मीदवार के बीच के समन्वित खर्च पर भी लागू किया गया है, और चुनावी सुधारों के हिमायतियों द्वारा लंबे समय से टिकाई गई एक श्रेणी की पाबंदी खत्म कर दी गई है।
व्यापक न्यायिक परिदृश्य
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब सुप्रीम कोर्ट एक के बाद एक बड़े और विवादास्पद निर्णय सुना रहा है। हाल के महीनों में कोर्ट ने चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में जाति के इस्तेमाल को सीमित किया है और मतदान अधिकार कानून के अहम प्रावधानों को कमजोर किया है। इससे पहले कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप की आपातकालीन टैरिफ नीति को गैरकानूनी ठहराया था, जिसके बाद ट्रंप ने न्यायाधीशों पर जोरदार हमला बोला था। लेकिन राजनीतिक खर्च का यह नया फैसला ट्रंप के पक्ष में आया और उन्होंने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया।
आगे क्या बदलेगा
समन्वित खर्च की सीमाएं हटने के बाद राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के साथ उन तरीकों से पैसा लगा सकेंगे जो पहले कानूनन वर्जित थे। राजनीतिक रणनीतिकारों का अनुमान है कि यह फैसला आने वाले चुनावी चक्रों में पार्टियों की रणनीति और संसाधन तैनाती के तरीकों को बड़े पैमाने पर बदल देगा, और पार्टी तंत्र को व्यक्तिगत चुनावी मुकाबलों में और ज्यादा ताकतवर बना देगा।




















