अमरीकी आयात शुल्कों से बचने के लिए चीन द्वारा अपनाए जा रहे एक व्यापक तंत्र का व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। इस व्यवस्था के तहत चीन 40 से अधिक व्यापारिक साझेदार देशों का इस्तेमाल मध्यस्थ के रूप में करके अपने सामान को अमेरिका भेज रहा है। इस अवैध ट्रांसशिपमेंट से अमेरिकी खजाने को 19 अरब से 26 अरब डॉलर तक के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
ट्रांसशिपमेंट का खेल कैसे चलता है
चीनी निर्माता अपने उत्पादों पर लगने वाले भारी अमेरिकी सीमा शुल्क से बचने के लिए सामान को सीधे अमेरिका भेजने के बजाय तीसरे देशों में भेजते हैं। वहां इन सामानों पर लगे लेबल बदलकर या मामूली बदलाव करके यह दिखाया जाता है कि उत्पाद किसी अन्य देश में बना है। इसके बाद इन्हें बिना अतिरिक्त टैरिफ के अमेरिकी बाजार में प्रवेश करा दिया जाता है। पुणे के रास्ते अमेरिकी सीमा शुल्क से बचकर भेजे गए चीनी पंपों का मामला इस तरीके का एक प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है।
भारत को शीर्ष जोखिम श्रेणी में रखा गया
व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, चीन की इस टैरिफ चोरी में भारत को टियर 1 यानी उच्च जोखिम वाले देशों की सूची में रखा गया है। भारत के अलावा 40 से अधिक अन्य देशों के रास्तों का इस्तेमाल भी चीनी सामान को लाउंडर करने और अमेरिकी आयात नियमों को चकमा देने के लिए किया जा रहा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर प्रभाव
इस बड़े पैमाने की सीमा शुल्क चोरी का सीधा असर अमेरिकी उद्योग और रोजगार पर पड़ रहा है। इस अवैध व्यापार गतिविधियों के कारण अमेरिका में लगभग 4,50,000 नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। खजाने को हो रहे 19 अरब डॉलर से 26 अरब डॉलर के राजस्व घाटे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस रिपोर्ट को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ने सीमा शुल्क चोरी के इस बड़े ट्रांसशिपमेंट घोटाले का ब्योरा सामने रख दिया है।


























