ग्लैमर, मनोरंजन और ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में कदम रखने से पहले ही कंटेस्टेंट्स पर एक खास तरह का परफेक्ट लुक हासिल करने का भारी दबाव रहता है। 'लॉक अप 2' और 'स्प्लिट्सविला X6' जैसे लोकप्रिय रियलिटी शो से पहचान बनाने वाली स्टार आकांक्षा चौधरी ने इस दबाव से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तैयारी के दौरान उन्होंने अपने चेहरे को ज्यादा शार्प और तराशा हुआ दिखाने के लिए कई तरीकों पर विचार किया था। उन्होंने कॉस्मेटिक प्रोसीजर के लिए की गई अपनी तैयारियों, पैसों की बचत के लिए सख्त लाइफस्टाइल और इस दौरान झेली गई मुश्किलों के बारे में खुलकर बातचीत की है।
प्लास्टिक सर्जरी और नोज जॉब की अफवाहों को किया खारिज
सोशल मीडिया पर आकांक्षा चौधरी के लुक को लेकर अक्सर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। इंटरनेट पर कई वीडियो में यह दावा किया गया था कि उन्होंने अपने चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी करवाई है और नोज जॉब यानी नाक की सर्जरी का सहारा लिया है। आकांक्षा ने इन तमाम दावों और अफवाहों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी नाक की कोई सर्जरी नहीं करवाई है और लोगों द्वारा बनाए जा रहे ऐसे वीडियो पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भले ही उन्होंने नाक की सर्जरी न कराई हो, लेकिन एक समय वह अपने चेहरे की बनावट बदलने के लिए दूसरे मेडिकल प्रोसीजर पर गंभीरता से विचार कर रही थीं।
मिस यूनिवर्स से पहले शार्प चेहरे की मांग का दबाव
आकांक्षा ने बताया कि जब वह मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए अपनी तैयारी शुरू कर रही थीं, तब इंडस्ट्री के लोगों ने उन पर चेहरे को अधिक स्लिम बनाने का लगातार दबाव बनाया। ब्यूटी पेजेंट और मॉडलिंग की दुनिया में तराशे हुए चेहरे को सफलता की कुंजी माना जाता है। आकांक्षा के मुताबिक, उन्हें बार-बार यह कहा गया कि गालों की चर्बी कम किए बिना इस फील्ड में आगे बढ़ना नामुमकिन है। इसी सलाह के बाद उन्होंने बकल फैट रिमूवल नाम की सर्जिकल प्रक्रिया के बारे में सोचना शुरू किया। यह एक ऐसा प्रोसीजर है जिसमें गालों के अंदरूनी फैट को हटाकर चेहरे को कटिंगदार और शार्प लुक दिया जाता है।
मुंबई का सफर, पैसों की बचत और तरबूज वाली डाइट
इस सर्जरी की सलाह को आकांक्षा ने बहुत गंभीरता से लिया था। वह इस प्रोसीजर को करवाने के लिए खास तौर पर मुंबई आईं और एक specialist डॉक्टर से परामर्श भी लिया। सर्जरी के लिए जरूरी भारी-भरकम रकम जुटाने के लिए उन्होंने अपनी दैनिक दिनचर्या और खाने-पीने की आदतों में बेहद कड़ा बदलाव किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत खर्चों में भारी कटौती की ताकि पैसे जमा किए जा सकें। एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने खुद को सख्त डाइट पर रखा और पूरे दिन में सिर्फ एक बार तरबूज खाकर गुजारा किया। पैसों की बचत और दुबले होने के इस जुनून के बीच उन्होंने सर्जरी से पहले इंजेक्शन वाले ट्रीटमेंट का विकल्प चुना।
हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद नहीं मिला कोई फायदा
आकांक्षा ने बताया कि गालों की चर्बी कम करने के लिए उन्होंने नॉन-सर्जिकल इंजेक्शन ट्रीटमेंट शुरू करवाया। उन्होंने लगभग चार से पांच हफ्तों तक लगातार यह इलाज लिया, जिसमें डॉक्टर उनके गालों में इंजेक्शन लगाते थे। इस पूरे प्रोसेस पर उन्होंने करीब 40,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक खर्च कर डाले। हालांकि, इतनी बड़ी रकम और हफ्ते भर के दर्द के बावजूद उन्हें मनचाहा परिणाम हासिल नहीं हुआ। आकांक्षा ने अफसोस जताते हुए कहा कि कई हफ्तों तक चले इस ट्रीटमेंट के बाद भी उनके चेहरे पर कोई बदलाव नजर नहीं आया। आखिरकार उन्होंने किसी भी तरह की परमानेंट फेशियल सर्जरी न करवाने का फैसला किया और अपने नेचुरल लुक के साथ ही आगे बढ़ने का मन बनाया।



















