बच्चा जब बात-बात पर भड़कने लगे या नाराज रहने लगे, तो घर में अक्सर इसे जिद और नखरा मान लिया जाता है। लेकिन हर गुस्से के पीछे सिर्फ शरारत नहीं होती। कई बार बच्चा अपने डर, मन का बोझ या किसी के गलत बर्ताव को शब्दों में बयां नहीं कर पाता और यही बात गुस्से, चिड़चिड़ेपन या उदासी के रूप में बाहर आती है। अगर अचानक आपके बच्चे का स्वभाव बदलने लगे, तो इसे यूं ही टाल देना ठीक नहीं।
हर गुस्सा जिद नहीं — कभी-कभी यह मदद की पुकार है
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, बच्चे का हर गुस्सा महज जिद नहीं होता। कई बार यह उसकी एक खामोश गुहार होती है, जिसमें वह कहना चाहता है कि वह भीतर से परेशान है। यही वजह है कि व्यवहार में अचानक आया बदलाव हल्के में लेने की चीज नहीं है। दरअसल बच्चों में मानसिक तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन की शुरुआत अक्सर पहले शरीर और रोजमर्रा के बर्ताव में झलकती है। अगर इन शुरुआती संकेतों को समय रहते न पकड़ा जाए, तो आगे चलकर ये दिक्कतें और गहरी हो सकती हैं।
ये 6 लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर बच्चे में हर बात पर गुस्सा और हताशा के साथ कुछ खास लक्षण लगातार नजर आ रहे हैं, तो इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। नीचे दिए संकेतों पर ध्यान दें:
- लगातार हताशा: बच्चा बार-बार निराश महसूस करे या किसी भी काम में दिलचस्पी न दिखाए।
- सिर और पेट दर्द की शिकायत: बिना किसी साफ वजह के बार-बार सिर या पेट में दर्द की शिकायत करना।
- बढ़ता चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर झुंझला जाना और चिढ़ना।
- अचानक मूड बदलना: पल भर पहले खुश और अगले ही पल उदास या गुस्सैल हो जाना।
- हर बात पर गुस्सा: हर छोटी बात पर भड़क उठना या झगड़ालू अंदाज में पेश आना।
इन लक्षणों का लगातार बने रहना इस बात का इशारा हो सकता है कि बच्चे के मन में कुछ चल रहा है, जिसे वह कह नहीं पा रहा।
सिर्फ शरारत समझने की भूल न करें
नेशनल हेल्थ मिशन ने माता-पिता से अपील की है कि बच्चों के इस तरह के बर्ताव को महज शैतानी न मान लें। इसके पीछे स्कूल का दबाव, दोस्तों से किसी तरह की परेशानी, घर-परिवार की कलह या अकेलेपन का अहसास छिपा हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चे से खुलकर बातचीत की जाए, उसकी बातों को धैर्य से सुना जाए और जरूरत महसूस हो तो किसी बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की सलाह ली जाए।
माता-पिता बनें पहले और सबसे अच्छे दोस्त
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि माता-पिता को बच्चे का सबसे पहला और सबसे भरोसेमंद दोस्त बनना चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर डांटने के बजाय उसे समझने की कोशिश करना ज्यादा कारगर है। अगर ऊपर बताए गए 6 लक्षण बार-बार और लगातार दिख रहे हैं, तो इन्हें अनदेखा करना ठीक नहीं। समय रहते थोड़ा सा ध्यान देने से बच्चे की कई आने वाली परेशानियों को शुरुआत में ही रोका जा सकता है।













