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अमित शाह के 10 बड़े फैसले, जिन्होंने बदल दी देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की तस्वीरराजनीति
22 अक्तू॰ 2026, 4:58 pm (5 दिन पहले)· 0

अमित शाह के 10 बड़े फैसले, जिन्होंने बदल दी देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की तस्वीर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा, न्याय प्रणाली और सीमा प्रबंधन को पूरी तरह से बदल दिया है।

देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। बात चाहे जम्मू-कश्मीर से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम की हो या फिर देश की न्याय प्रणाली को आधुनिक रूप देने की, कई ऐसे नीतिगत कदम उठाए गए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के समीकरणों को पूरी तरह से नया आकार दिया है। सीमाओं की चौकसी बढ़ाने से लेकर पूर्वोत्तर के अशांत क्षेत्रों में शांति बहाली तक और उग्रवाद की जड़ों पर प्रहार करने से लेकर सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने तक, गृह मंत्रालय के स्तर पर लिए गए फैसलों ने देश की आंतरिक और बाह्य स्थिति को काफी हद तक मजबूत किया है। इन तमाम फैसलों के दूरगामी परिणामों ने देश की सुरक्षा और विकास की प्राथमिकताओं को एक नई दिशा दी है।

अनुच्छेद 370 की समाप्ति और प्रशासनिक पुनर्गठन

अगस्त 2019 के दौरान संसद में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया गया। इस प्रावधान के हटने के बाद उस भू-भाग को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों यानी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इस राजनीतिक फैसले ने देश के उस हिस्से को मुख्यधारा से जोड़ने और वहां प्रशासनिक व्यवस्था को सीधे देश के बाकी हिस्सों की तरह लागू करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित किया, जिससे वहां के स्थानीय विकास और व्यवस्था में मूलभूत बदलाव आए।

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नागरिकता संशोधन कानून के जरिए शरणार्थियों को राहत

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून को अमल में लाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पड़ोसी देशों से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आने वाले शरणार्थियों के लिए नागरिकता के रास्ते आसान बनाना था। इस नियम के दायरे में उन अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को रखा गया, जिन्हें अपने मूल देशों में धर्म के आधार पर भेदभाव और अत्याचार का सामना करना पड़ा था। इस नीतिगत निर्णय ने मानवीय आधार पर उन पीड़ित लोगों को देश में कानूनी पहचान और सुरक्षा देने का काम किया जो वर्षों से उपेक्षित जीवन जी रहे थे।

आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव

देश के न्याय तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को आखिरकार अलविदा कह दिया गया। उनकी जगह भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS और भारतीय साक्ष्य अधिनियम यानी BSA को लागू किया गया। इन नए कानूनों के लागू होने से अदालती मुकदमों की सुनवाई, पुलिस जांच और अपराधियों को सजा दिलाने की पूरी प्रक्रिया कम समय लेने वाली और आधुनिक तकनीक पर आधारित हो गई, जिससे न्याय मिलने की रफ्तार में भी तेजी आई है।

वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई

देश के केंद्रीय और पूर्वी हिस्सों में फैले नक्सलवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए सुरक्षाबलों ने आक्रामक रणनीतियों का सहारा लिया। संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ-साथ विकासोन्मुखी नीतियों को भी उतनी ही तेजी से लागू किया गया। इन समन्वित अभियानों की वजह से वामपंथी उग्रवाद की नींव हिल गई और देश के इन अंदरूनी हिस्सों में हिंसा की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे वहां के स्थानीय नागरिकों के लिए सामान्य जीवन जीने के रास्ते खुले।

पूर्वोत्तर में बोडो शांति समझौता

असम राज्य में दशकों से चले आ रहे अलगाववादी संघर्ष और खून-खराबे के दौर को हमेशा के लिए समाप्त करने के वास्ते 27 जनवरी 2020 को एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता हुआ। केंद्र सरकार, असम सरकार, ABSU और NDFB के प्रतिनिधियों के बीच इस ऐतिहासिक बोडो शांति समझौते पर मुहर लगाई गई। इस समझौते के जरिए वर्षों पुरानी अशांति को समाप्त करने में बड़ी सफलता मिली और क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित शांति और स्थिरता की बहाली सुनिश्चित हो सकी।

आतंकवाद पर आर्थिक और कानूनी प्रहार

राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए NIA और UAPA जैसे कानूनों को और अधिक शक्तिशाली तथा प्रभावी बना दिया गया। इन कानूनी संशोधनों के माध्यम से देश की जांच एजेंसियों को घरेलू और बाहरी स्तर पर असामाजिक तथा आतंकवादी तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए अभूतपूर्व अधिकार प्राप्त हुए। इन शक्तियों के मिलने से आतंकी संगठनों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने और उनके नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने में बहुत मदद मिली है.

सहकारिता मंत्रालय का गठन और सहकार से समृद्धि

देश की ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने के लिए एक लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए अलग से सहकारिता मंत्रालय का सृजन किया गया। इस नए मंत्रालय के माध्यम से पैक्स यानी PACS के कामकाज का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और देश के कोने-कोने में सहकारिता आंदोलन को अधिक पारदर्शी तथा उपयोगी बनाया जा रहा है। इससे ग्रामीण स्तर पर किसानों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का एक नया और बड़ा मंच मिल रहा है।

सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा का डिजिटल कवच

देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित, चौकस और अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया गया। इसमें ड्रोन सर्विलांस, स्मार्ट फेंसिंग और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इन तकनीकी उपायों से सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास तो हो ही रहा है, साथ ही साथ सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और तमाम अवैध गतिविधियों पर पैनी तकनीकी नजर रखना भी संभव हो पाया है।

पूर्वोत्तर राज्यों में अन्य ऐतिहासिक शांति समझौते

पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में उग्रवाद से जुड़े पुराने और जटिल संघर्षों को सुलझाने के लिए सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण शांति समझौतों और आत्मसमर्पण अभियानों को भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसके सकारात्मक परिणाम यह निकले कि हजारों की संख्या में भटके हुए युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा का दामन थामा और अपने-अपने क्षेत्रों के विकास में सक्रिय रूप से योगदान देना शुरू किया।

आपदा प्रबंधन और राहत तंत्र का आधुनिकीकरण

देश में किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा या आपातकालीन स्थिति से तुरंत और प्रभावी तरीके से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF को अत्याधुनिक साजो-सामान से पूरी तरह लैस किया गया। इसके साथ ही देश भर में एक एकीकृत आपदा चेतावनी तंत्र भी स्थापित किया गया, जिसकी मदद से संभावित आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित किया जा सके और कम से कम समय में अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।

सवाल-जवाब

अनुच्छेद 370 को कब समाप्त किया गया था?
अगस्त 2019 में संसद के माध्यम से अनुच्छेद 370 को समाप्त किया गया था।
नागरिकता संशोधन कानून कब लागू हुआ था?
दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून को लागू किया गया था।
बोडो शांति समझौता कब साइन हुआ था?
बोडो शांति समझौते पर 27 जनवरी 2020 को हस्ताक्षर किए गए थे।
सहकारिता मंत्रालय के गठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सहकारिता मंत्रालय का गठन ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया गया है।
औपनिवेशिक कानूनों की जगह किन नए कानूनों को लाया गया है?
पुराने कानूनों की जगह BNS, BNSS और BSA को लागू किया गया है।
एनआईए और यूएपीए कानूनों में बदलाव क्यों किए गए?
आतंकवाद के वित्तपोषण और राष्ट्र-विरोधी ताकतों पर प्रभावी ढंग से नकेल कसने के लिए इन्हें मजबूत किया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·4 दिन पहले

देश की सुरक्षा नीतियों में इतने बड़े बदलाव देखना वाकई दिलचस्प है। जिस तरह से आतंकवाद और सीमाओं के मामलों पर सख्त रुख अपनाया गया है, उसका असर लंबे समय तक देश की व्यवस्था पर दिखेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जब मैं श्रीनगर गया था, तो वहां के दुकानदारों से बात कर माहौल में आए बदलाव को खुद महसूस किया था।

Ananya Iyer@ananya-iyer·4 दिन पहले

रविकेश जी, मैं भी पिछले साल कश्मीर गई थी और डल झील के पास लोगों से मिलकर वहां की बदली हुई रौनक को खुद महसूस किया था।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को हटाकर नए आपराधिक कानून लाना वाकई बहुत जरूरी था। सालों पुरानी अदालती प्रक्रियाओं से लोग परेशान हो चुके थे, उम्मीद है अब मामलों का निपटारा जल्दी होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। जब मैं पहली बार तीस हजारी कोर्ट गया था, तो दशकों पुराने मुजलिमों और फाइलों की भीड़ देखकर दंग रह गया था। उम्मीद है इन नए कानूनों से हालात सच में बदलेंगे।

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