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चुनावी इतिहास याद दिलाते हुए भाजपा ने राहुल गांधी के दावों को नकारा, मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद पर दिया जवाबराजनीति
24 सित॰ 2026, 6:48 pm (32 दिन पहले)· 3

चुनावी इतिहास याद दिलाते हुए भाजपा ने राहुल गांधी के दावों को नकारा, मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद पर दिया जवाब

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार विरोधी लहर के मसले पर राहुल गांधी के बयानों को खारिज करते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के चुनावी अतीत पर तीखे सवाल उठाए।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर विपक्ष की तरफ से की गई बयानबाजी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के फौरन बाद भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए उनके तर्कों को जमीनी हकीकत से दूर बताया। भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सार्वजनिक मंच से दावा किया कि विपक्षी नेतृत्व में देश की राजनीतिक वास्तविकताओं और चुनावी इतिहास को लेकर गंभीर समझ का अभाव है।

एंटी-इनकम्बेंसी के दावों पर चुनावी अतीत का हवाला

सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी नेता के उस कथन पर सीधे सवाल उठाए जिसमें उन्होंने सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकम्बेंसी को केवल मौजूदा दौर की परिघटना बताया था। भाजपा नेता ने कहा कि चुनावी इतिहास बताता है कि कांग्रेस के खिलाफ दशकों तक चलने वाली सत्ता विरोधी लहर बेहद मजबूत और अटूट रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि साल 1967 के बाद से कांग्रेस तमिलनाडु की सत्ता में दोबारा कभी कदम नहीं रख पाई, जबकि उस समय भारतीय जनता पार्टी का कोई वजूद भी नहीं था। इसी तरह पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि साल 1977 से 2011 तक वामपंथियों ने वहां लगातार 34 साल तक शासन किया और 1977 के बाद कांग्रेस राज्य में कभी वापस नहीं लौटी।

पुराने चुनावी तौर-तरीकों और नतीजों पर सवाल

विपक्षी दल के लंबे शासनकाल की परिस्थितियों का ब्योरा देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने मतदाता पहचान पत्र से पहले के दौर की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस जमाने में बूथ पर कब्जे, मतपेटियों की लूट और खुलेआम गोलीबारी जैसी घटनाओं के बीच चुनाव संपन्न होते थे। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में शायद ही कोई ऐसा चुनाव बीतता था जिसमें हिंसा, मौतें और घायलों की खबरें न आती हों। भाजपा नेता के अनुसार उस समय कांग्रेस के खिलाफ जनभावनाओं के बावजूद नतीजे अलग आते थे, जिसे आज का नेतृत्व नजरअंदाज कर देता है।

चुनाव आयोग के फैसले और नेतृत्व पर सियासी तंज

संस्थागत प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि निर्वाचन आयोग में कोई भी फैसला बहुमत के आधार पर तय होता है। SIR से संबंधित जो भी कदम उठाए गए हैं, वे तीनों चुनाव आयुक्तों के बहुमत के आधार पर ही लिए गए हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमीन से जुड़े हुए नेता हैं, जबकि राहुल गांधी जमीन से उड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी अपने बलबूते एक भी संसदीय सीट जीतने में सक्षम नहीं हैं और रायबरेली से उनका चुनाव भी समाजवादी पार्टी के समर्थन की बैसाखी पर टिका हुआ था।

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सवाल-जवाब

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के किस बयान पर पलटवार किया?
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और देश में एंटी-इनकम्बेंसी को लेकर दिए गए बयानों पर पलटवार किया।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा प्रवक्ता ने क्या तथ्य रखे?
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 1967 के बाद और बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं लौट पाई।
पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने कितने वर्षों तक शासन किया था?
वामपंथियों ने पश्चिम बंगाल में साल 1977 से 2011 तक लगातार 34 साल शासन किया था।
चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सुधांशु त्रिवेदी ने क्या स्पष्ट किया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग में SIR समेत सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों के बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
राहुल गांधी की रायबरेली जीत पर भाजपा नेता ने क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी रायबरेली से समाजवादी पार्टी के सहयोग की बैसाखी के सहारे चुनाव जीते हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·32 दिन पहले

सुधांशु त्रिवेदी का बयान सुनकर मुझे अपने कॉलेज के दिनों की बहस याद आ गई, जब हम घंटों इतिहास के फैसलों और बूथ कैप्चरिंग के पुराने दौर पर बात करते थे। चुनाव आयोग और पुराने राजनीतिक इतिहास पर यह तीखी बहस देखकर लगता है कि सियासत में पुरानी यादें कभी पुरानी नहीं होतीं।

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

राजनीति में पुराने दिनों के इतिहास और बूथ कैप्चरिंग की यादें निकाल कर लाना अब आम हो गया है। चुनाव आयोग पर सवाल उठते ही हर बार पुरानी सरकारों के बहाने ढूंढ लिए जाते हैं, लेकिन जनता को आज के मुद्दों पर सीधा जवाब चाहिए होता है।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·32 दिन पहले

रविकेश जी, बंगाल में 34 साल लेफ्ट का राज वाकई लंबा था, पर आज की बात होनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

यूपी की राजनीति कवर करते हुए कई बार पुराने दौर के किस्से सुने हैं जब लोग बताते थे कि कैसे मतपेटियां लूट ली जाती थीं और बूथ पर कब्जा आम बात थी। सुधांशु जी ने तमिलनाडु और बंगाल का जो इतिहास याद दिलाया है, वो सही है क्योंकि वहां दशकों से कांग्रेस की वापसी नहीं हो पाई है। राहुल को जमीन की हकीकत समझने के लिए इन राज्यों के चुनावी आंकड़े देखने चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

रोहन जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं, तमिलनाडु और बंगाल का पुराना चुनावी इतिहास यही सच्चाई बयां करता है।

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