कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बारह अक्टूबर को केंद्र सरकार के कामकाज और चुनावी निगरानी तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन की तरफ से उच्चतम न्यायालय तक प्रस्तावित विरोध मार्च निकालने से ठीक पहले संवाददाताओं से चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के विभिन्न प्रमुख मंत्रालयों और जांच एजेंसियों के भीतर तैनात दो सौ से अधिक अधिकारी सीधे तौर पर उनके संपर्क में बने हुए हैं। राहुल गांधी के अनुसार ये सभी आंतरिक तंत्र से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां विपक्ष तक लगातार पहुंचा रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सच उनके पक्ष में खड़ा है और सरकार के भीतर काम करने वाले लोग भी मौजूदा व्यवस्था की कार्यप्रणाली से असहज महसूस कर रहे हैं।
जांच एजेंसियों और मंत्रालयों से जानकारी मिलने का दावा
संवाददाताओं के सामने अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दो सौ से अधिक अधिकारी विपक्ष को नियमित तौर पर जरूरी तथ्य और इनपुट दे रहे हैं। इनमें प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी, केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक तंत्र के अंदर बैठे इन लोगों की तरफ से बहुत बड़ी तादाद में सूचनाएं साझा की जा रही हैं। उनका तर्क था कि देश की प्रमुख संस्थाओं में काम करने वाले कई लोग इस बात को समझ रहे हैं कि तंत्र पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, इसलिए वे अंदरूनी सच्चाई बाहर लाने के लिए विपक्ष का सहयोग कर रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और कानूनी लड़ाई
विपक्षी गठबंधन की मुख्य मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने को लेकर है। राहुल गांधी ने बताया कि इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस यानी इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेता ज्ञानेश कुमार के आचरण और फैसलों के विरोध में देश की शीर्ष अदालत में एक औपचारिक याचिका दायर करने जा रहे हैं। उन्होंने इसे महज एक दिन का विरोध प्रदर्शन मानने से पूरी तरह इनकार किया। उनका कहना था कि यह संविधान को बचाने के लिए शुरू किया गया एक लंबा और निरंतर चलने वाला संघर्ष है। उन्होंने याद दिलाया कि जनता और विपक्ष का यह प्रतिरोध हाल के चार या पांच दिनों में अचानक शुरू नहीं हुआ है, बल्कि यह लड़ाई पिछले कई सालों से लगातार लड़ी जा रही है।
राजधानी में सुरक्षा घेराबंदी और नागरिकों को रोके जाने का आरोप
विरोध मार्च को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में किए गए व्यापक सुरक्षा प्रबंधों पर राहुल गांधी ने कड़ा ऐतराज दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी को प्रशासन ने पूरी तरह से एक सैन्य छावनी या किले के रूप में बदल कर रख दिया है। शहर के तमाम रास्तों पर हजारों की संख्या में पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती कर दी गई है। राहुल गांधी ने यह आरोप भी लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली की ओर आने वाले आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं को जानबूझकर रास्ते में रोका जा रहा है। लोगों को बसों से नीचे उतारा जा रहा है और ट्रेनों से भी जबरन हटाया जा रहा है ताकि वे दिल्ली पहुंचकर अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज न करा सकें।
प्रशासनिक टकराव और सुरक्षा बलों के भीतर का विमर्श
सड़क पर सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बीच राहुल गांधी ने अपनी रणनीति को पूरी तरह अलग बताया। उनका कहना था कि विपक्ष इस बात से भलीभांति वाकिफ है कि सड़कों पर बीस से तीस हजार पुलिस जवानों की दीवार खड़ी की जाएगी। लेकिन विपक्ष का मुख्य उद्देश्य देश की जनता को यह दिखाना है कि मौजूदा सरकार किस प्रकार हर कीमत पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार जितना अधिक इस पद पर बैठे व्यक्ति का बचाव करेगी, जनता की नजरों में उसकी असलियत उतनी ही खुलकर सामने आएगी।
इसके अलावा राहुल गांधी ने सुरक्षा एजेंसियों के आंतरिक माहौल पर भी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस, भारत तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के भीतर भी कई सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बलों के जवान और अधिकारी आपस में यह चर्चा कर रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े उपद्रवी तत्वों को सड़कों पर मनमानी करने की छूट क्यों दी जा रही है, जबकि अपने अधिकारों की मांग करने वाले देशभक्त नौजवानों पर बल प्रयोग कराया जा रहा है। राहुल गांधी ने यहां तक दावा किया कि पचास प्रतिशत पुलिसकर्मी निजी बातचीत में विपक्ष के कदम का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि विपक्ष का उठाया गया कदम पूरी तरह जायज है।
ज्ञानेश कुमार को सीधा संदेश और लंबी लड़ाई का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे शब्दों में आगाह किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष उनके कामकाज पर नजर बनाए हुए है और लाखों नागरिक उनके आचरण को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मी भी अब यह सवाल पूछने लगे हैं कि ऐसे आचरण वाले लोगों की सुरक्षा में उन्हें क्यों झोंका जा रहा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि चाहे इस लड़ाई में कुछ दिन लगें, कई महीने बीत जाएं या फिर कई सालों तक संघर्ष करना पड़े, विपक्षी गठबंधन किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। उनका मानना है कि जो लोग झूठ और अनुचित व्यवस्था की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं, अंततः उनकी ही हिम्मत टूटेगी।



















