राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक माहौल में भारी उबाल ला दिया है। दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं, राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी, की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पूरे मध्य प्रदेश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। प्रदेश के अलग-अलग कोनों में मुख्य विपक्षी दल के साथ-साथ युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भारी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं। इन कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई जिलों में उग्र आंदोलन शुरू कर दिया है, जिसके चलते आम जनजीवन भी खासा प्रभावित हुआ है।
भोपाल में पीसीसी चीफ की गिरफ्तारी और जबलपुर में तीखी झड़प
राजधानी भोपाल में प्रदर्शनकारियों ने सीधे राजभवन का घेराव करने की कोशिश की, जहां स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। राजभवन के बाहर सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए। इस दौरान पुलिस बल ने कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें पार्टी के पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी भी शामिल हैं। दूसरी ओर, जबलपुर शहर के मालवीय चौक पर भी सैकड़ों की तादाद में कार्यकर्ताओं ने विशाल धरना दिया। इस उग्र विरोध प्रदर्शन में पूर्व सांसद और तेलंगाना राज्य की कांग्रेस प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने भी हिस्सा लिया। जब प्रदर्शनकारी विरोध स्वरूप एक पुतला जलाने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस और उनके बीच तीखी झड़प हो गई। हालात इस कदर बेकाबू होने लगे कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को मजबूरन वाटर केनन (पानी की बौछार) का भारी इस्तेमाल करना पड़ा।
पुतला दहन की योजना विफल, नरसिंहपुर में रात भर चला धरना
विरोध की यह आग देवास जिले के हाटपिपल्या क्षेत्र तक भी पहुंची। देवगढ़ चौराहे पर युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के सदस्यों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंकने की योजना बनाई थी। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सतर्कता दिखाते हुए पुतला दहन से ठीक पहले उसे प्रदर्शनकारियों के हाथों से छीन लिया। अपनी योजना के विफल होने से नाराज कार्यकर्ताओं ने वहीं खड़े होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं नरसिंहपुर में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला रात के अंधेरे में भी नहीं थमा। राहुल गांधी की गिरफ्तारी से आक्रोशित कार्यकर्ता रात करीब 9 बजे ही कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। इस मौके पर पूर्व विधायक सुनील जायसवाल ने राज्य और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए रोजगार की कमी और हाल ही में निरस्त हुई परीक्षाओं के गंभीर मुद्दे उठाए।
चक्काजाम से थमी यातायात की रफ्तार और तेज आंदोलन की चेतावनी
कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर यातायात बाधित कर अपना विरोध दर्ज कराया। रतलाम जिले में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने स्टेशन रोड थाने के ठीक बाहर बड़ा चक्का जाम कर दिया। सड़क के बीचों-बीच भारी संख्या में कांग्रेसियों के बैठ जाने से आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और सीएसपी सहित कई आला अधिकारियों को भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहना पड़ा। इसी तरह शाजापुर में बस स्टैंड के समीप जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर बैठकर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। दतिया के प्रसिद्ध किला चौक पर भी स्थानीय कांग्रेस कमेटी ने मोदी सरकार के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताया। इसके अलावा, रायसेन जिले के बेगमगंज और मंडीदीप इलाकों में भी कांग्रेस का व्यापक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यहां जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर सीधे तौर पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि दिल्ली में मासूम बच्चों पर लाठियां बरसाना सरकार की क्रूरता को दर्शाता है। साथ ही, उन्होंने यह खुली चेतावनी भी दी कि भाजपा आम जनता की आवाज को बलपूर्वक नहीं दबा सकती और आने वाले समय में यह आंदोलन और भी तेज होगा।



















