राष्ट्रीय राजधानी में इस समय चल रहा भारी राजनीतिक गतिरोध अब तेजी से मध्य प्रदेश में भी अपना असर दिखा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे हैं, और अब इस विरोध प्रदर्शन की गूंज मध्य प्रदेश विधानसभा के भीतर भी बहुत स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है। जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं और छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस की सख्ती को लेकर जो आक्रोश दिल्ली में है, वह अब भोपाल में एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। राज्य के कांग्रेस विधायकों ने अपने केंद्रीय नेतृत्व के कदम से प्रेरणा लेते हुए अपने इस आंदोलन को सीधे राज्य के सबसे बड़े कार्यकारी दफ्तर तक ले जाने का फैसला किया। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुवाई में कांग्रेस के तमाम विधायक मुख्यमंत्री के कक्ष के ठीक बाहर धरने पर बैठ गए हैं। विरोध कर रहे इन नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दिल्ली में हो रही घटनाओं की तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग रखी। उनका यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि किस तरह स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे अब एक साथ जुड़ रहे हैं, जिससे अलग-अलग राजनीतिक मोर्चों पर विपक्ष एकजुट होकर खड़ा हो रहा है।
कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी पर भारी बवाल
मुख्यमंत्री दफ्तर के बाहर शुरू हुए इस धरने का तात्कालिक कारण मध्य प्रदेश विधानसभा के पटल पर हुआ एक तीखा विवाद था। विपक्षी दल कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर यह मांग रखी थी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों और राजनीतिक हस्तियों पर हुई पुलिस की कार्रवाई के संबंध में सदन में विस्तार से चर्चा की जाए। हालांकि, सत्ता पक्ष की तरफ से इस मांग का कड़ा विरोध किया गया। इसी दौरान राज्य के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हस्तक्षेप करते हुए विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया और सवाल उठाया कि दिल्ली की घटना का मध्य प्रदेश विधानसभा से क्या लेना-देना है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यहां इसका क्या काम?" उनका यह बयान, जिसमें दूसरे राज्य की घटना को सदन में उठाने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया गया था, कांग्रेस खेमे को तुरंत भड़काने वाला साबित हुआ। मंत्री के इस रवैये को बेहद असंवेदनशील और लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने वाला बताते हुए, उमंग सिंघार ने अपने साथी विधायकों को लामबंद किया। इसके तुरंत बाद सभी विधायक मुख्यमंत्री कक्ष की ओर मार्च करते हुए वहां फर्श पर बैठ गए और यह ऐलान किया कि जब तक कैलाश विजयवर्गीय अपने शब्दों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगते, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। इस धरने के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सत्ताधारी प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह सुनियोजित तरीके से विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है और स्थापित लोकतांत्रिक परंपराओं की खुलेआम अनदेखी कर रहा है।
नीट की गड़बड़ियों पर दिग्विजय सिंह का आक्रामक रुख
एक तरफ जहां विधानसभा में अफरा-तफरी का माहौल था, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नीट परीक्षा में हुई भारी धांधली को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक अलग और बेहद आक्रामक मोर्चा खोल दिया। दिग्विजय सिंह ने जनता को याद दिलाया कि व्यापक स्तर पर हुई इन अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने ही उठाई थी। शिक्षा से जुड़ी संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में अपने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए, सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की गहरी जानकारी है कि व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार कैसे पनपता है और परीक्षाओं में होने वाले घोटालों को किस सटीक तंत्र के जरिए अंजाम दिया जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के शीर्ष स्तर पर जवाबदेही की भारी कमी को लेकर गहरी निराशा व्यक्त की। दिग्विजय सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि नीट पेपर लीक विवाद के इतने बड़े पैमाने पर फैलने के बावजूद, कोई भी व्यक्ति सीधे तौर पर एनटीए के अध्यक्ष से पूछताछ करने को तैयार नहीं है या ऐसा करने में सक्षम नहीं दिख रहा है। उन्होंने संसदीय समिति की एक विशेष बैठक का जिक्र किया जहां उन्होंने खुद एनटीए प्रमुख से तीखे सवाल पूछे थे, लेकिन अधिकारी ने सीधे जवाब देने से बचते हुए किसी भी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ लिया था।
परीक्षा एजेंसियों में गहरी जड़ों तक फैले भ्रष्टाचार के आरोप
परीक्षा प्रणाली के भीतर मौजूद ढांचागत खामियों को विस्तार से समझाते हुए, दिग्विजय सिंह ने एनटीए पर बेहद गंभीर आरोप लगाए और इस पूरी प्रक्रिया को पैसे कमाने का एक विशाल गोरखधंदा करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह भ्रष्टाचार कोई छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि इसमें एक ऐसा गहरा गठजोड़ शामिल है जो प्रश्नपत्र तैयार करने वाले व्यक्तियों से लेकर उसे 13 अलग-अलग भाषाओं में छापने की जिम्मेदारी निभाने वालों तक हर स्तर पर जुड़ा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के कड़े कदम न उठाने के रवैये पर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आखिर वह कौन सी वजह है जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने या उनका इस्तीफा लेने से रोक रही है। इसके अलावा, सिंह ने अब तक की गई दिखावटी दंडात्मक कार्रवाइयों की भी आलोचना की और कहा कि जहां लाखों छात्र इस स्थिति से पीड़ित हैं, वहीं सरकार ने एनटीए अध्यक्ष को बर्खास्त करने के बजाय केवल एक अधिकारी का तबादला करके मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है। अपनी पूरी आलोचना का सार निकालते हुए, दिग्विजय सिंह ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर शिक्षा क्षेत्र का पूरी तरह से व्यवसायीकरण करने का सीधा आरोप लगाया, और कहा कि जो एक बुनियादी सार्वजनिक सेवा होनी चाहिए थी, उसे अब अवैध वित्तीय लाभ कमाने वाले एक बेहद मुनाफे वाले कारोबार में बदल दिया गया है।
दिल्ली हिंसा पर सवाल और सोनम वांगचुक की प्रशंसा
राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ओर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए, दिग्विजय सिंह ने वहां अचानक भड़की हिंसा को लेकर चुभते हुए सवाल उठाए। उन्होंने एक दिन पहले जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान रहस्यमयी तरीके से पत्थरों के प्रकट होने पर गहरी शंका जाहिर की। सिंह ने इस बात की गहन जांच की मांग की कि आखिर पत्थरों से भरे ट्रक उस विरोध स्थल तक पहुंचने में कैसे कामयाब रहे, और उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि इस तरह के हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस उस वक्त क्या कर रही थी। इस बात पर गौर करते हुए कि मध्य दिल्ली कोई ऐसी जगह नहीं है जहां सड़क पर यूं ही पत्थर पड़े मिल जाएं, उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस आयुक्त को इस बारे में जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इसी बातचीत के दौरान, दिग्विजय सिंह ने प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भी जमकर तारीफ की। संसदीय समिति के अध्यक्ष की हैसियत से लेह के अपने दौरे को याद करते हुए, सिंह ने वांगचुक की संस्थाओं के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कार्यकर्ता के उस अनूठे शैक्षणिक मॉडल की सराहना की, जो उन छात्रों को अपनाता है जो पहले फेल हो चुके होते हैं, और फिर उनका मार्गदर्शन करके उन्हें प्रथम श्रेणी अंकों के साथ पास कराता है। सिंह ने वांगचुक द्वारा सौर ऊर्जा के उस अभिनव उपयोग की भी सराहना की, जिसके जरिए वे लद्दाख की भीषण सर्दियों में घर के भीतर के तापमान को माइनस 40 डिग्री से बढ़ाकर रहने लायक माइनस 5, 6 डिग्री तक ले आते हैं। अंत में, जब उनसे मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने की संभावनाओं पर उनका रुख पूछा गया, तो दिग्विजय सिंह ने बेहद सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने यह स्वीकार किया कि यूसीसी तकनीकी रूप से संविधान का ही एक हिस्सा है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वे प्रस्तावित कानून का वास्तविक मसौदा खुद नहीं देख लेते, तब तक वे इस पर कोई भी अंतिम राय नहीं दे सकते।


















