समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव गुरुवार को ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने पहुंचे। मुलाकात के दौरान उन्होंने स्वामी जी के चरण छूकर आशीर्वाद लिया और खुद को असली सनातनी बताते हुए गौ-संरक्षण को भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा करार दिया।
शंकराचार्य के चरणों में बैठे नजर आए अखिलेश
मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों के पास बैठे नजर आए। जानकारी के मुताबिक, उनके इस अंदाज से अविमुक्तेश्वरानंद बेहद प्रसन्न हो गए और उन्होंने अखिलेश को आशीर्वाद दिया। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य जी गायों की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने कहा, "गौ-संरक्षण केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का एक महत्वपूर्ण पहलू है और इस दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।"
गौरक्षा को लेकर अखिलेश ने किया वादा
अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से वादा किया कि जब उनकी सरकार बनेगी तो गौरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने यह भी कहा कि भाजपा का हिंदुत्व के प्रति जो प्रेम दिखता है, वह सिर्फ दिखावा है, जबकि असली सनातनी तो समाजवादी हैं। दूसरी ओर, अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मौके पर कहा कि उत्तर प्रदेश में जब सरकार बदलेगी तो सबका हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने राम मंदिर में हुए पाप का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी में सरकार बदलने के बाद चढ़ावे में हुई चोरी की गहराई से जांच कराई जाएगी।
योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुखर हैं शंकराचार्य
दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। वह गाय को राष्ट्र माता घोषित कराने की मुहिम भी चला रहे हैं। अखिलेश यादव और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बढ़ती नजदीकी की एक बड़ी वजह योगी आदित्यनाथ ही बताए जा रहे हैं, क्योंकि योगी दोनों के ही राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर भी बोले अखिलेश
इस मुलाकात के अलावा राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि छोटे-छोटे लोगों पर कार्रवाई करने से क्या हासिल होगा, जिस ट्रस्ट की देखरेख में यह चोरी हुई है, उस पूरे ट्रस्ट को ही भंग कर देना चाहिए। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि चोरी की सजा सिर्फ घोड़े या लगाम को नहीं, बल्कि कोचवान को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ इस्तीफे की लीपापोती से काम नहीं चलेगा, जो लोग पद से हटाए गए हैं, उनके दस्तखत से जो जमीनों के सौदे हुए हैं, उनकी भी न्यायिक जांच होनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने आगे दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से धार्मिक मुद्दों पर अपना रुख बदलती रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस बात से चिंतित हैं कि अयोध्या में भगवान राम और धार्मिक आस्था को किस तरह राजनीतिक हितों से जोड़ा जा रहा है।











