राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा की उपस्थिति और लोकप्रियता में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है. कॉकरोच जनता पार्टी और इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित विभिन्न अभियानों में सक्रिय नेहा बोरा की तस्वीरें और रील आए दिन सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं. कभी सुरक्षा बलों के घेरे से बाहर निकलकर बैरिकेड तोड़ती तो कभी पुलिस द्वारा जबरन बस में बिठाई जाती नेहा बोरा के वीडियो इंटरनेट पर खूब पसंद किए गए. हालांकि, दो विशेष तस्वीरों ने उनके राजनीतिक कद को अचानक काफी बढ़ा दिया. इनमें से पहली तस्वीर में वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती नजर आईं, जबकि दूसरी तस्वीर में वह एक वाहन की छत पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेताओं के साथ खड़ी दिखीं.
एनएसयूआई कैडर के भीतर पनपा असंतोष
नेहा बोरा को मिल रही इस तवज्जो ने कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के भीतर नाराजगी और असहजता का माहौल पैदा कर दिया. सड़क पर लगातार चले प्रदर्शनों के दौरान जहाँ पार्टी के समर्पित युवा कार्यकर्ता और छात्र नेता राहुल गांधी से हाथ तक मिलाने के लिए जूझते रहे, वहीं वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वालीं नेहा बोरा सीधे केंद्रीय नेतृत्व के साथ मंच साझा करती दिखीं. कई दिनों तक चले इन विरोध प्रदर्शनों में एनएसयूआई के कई पदाधिकारियों को राहुल गांधी तक पहुँचने के प्रयास में धक्के खाने पड़े, जबकि नेहा बोरा बड़ी आसानी से राहुल गांधी के साथ कदमताल करती नजर आ रही थीं. इससे छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष फैल गया.
'वी द छोटू': डिजिटल मंच पर दर्ज कराया विरोध
पार्टी कैडर की यही अंदरूनी कसक जल्द ही एक अनोखे विरोध के रूप में सामने आई. दिल्ली एनएसयूआई के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप के एक सदस्य ने समूह का नाम बदलकर ‘वी द छोटू’ कर दिया. जब इस नाम के पीछे का कारण पूछा गया तो असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने बेहद तीखे अंदाज में अपनी व्यथा व्यक्त की. उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की स्थिति चाय की दुकान पर काम करने वाले उस 'छोटू' जैसी हो गई है, जिसे केवल चाय लाने या बर्तन उठाने के निर्देश दिए जाते हैं. कार्यकर्ताओं का दर्द था कि वे रैलियों और प्रदर्शनों के लिए भीड़ जुटाने का काम तो करते हैं, लेकिन जब पहचान और सम्मान देने की बात आती है तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है.
राहुल गांधी ने चाय पर बुलाई बैठक, सुलझा विवाद
व्हाट्सएप ग्रुप का यह बदला हुआ नाम करीब तीन दिनों तक कायम रहा. 12 अक्टूबर को, जिस दिन इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च हुआ था, उसी दिन यह नाम बदला गया था और यह करीब 15 अक्टूबर तक इसी रूप में रहा. जब इस अंदरूनी नाराजगी की जानकारी राहुल गांधी तक पहुँची, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कदम उठाया. उन्होंने एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और सेवा दल के लगभग 60 युवा नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया. इस प्रत्यक्ष मुलाकात और संवाद के बाद युवा कार्यकर्ताओं की शिकायतें दूर हुईं और व्हाट्सएप ग्रुप का नाम पुनः सामान्य कर दिया गया.
जेन जी नेतृत्व और कांग्रेस का नया रुख
नेहा बोरा को दी जा रही तवज्जो को कांग्रेस द्वारा जेन जी यानी नई पीढ़ी के युवा चेहरों को अपने मंचों पर स्थान देने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने के कारण नेहा बोरा को राहुल गांधी की चाय बैठक में भी शामिल किया गया, जहाँ उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में भी हिस्सा लिया.
























