वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से युद्ध रोककर शांति का मार्ग अपनाने का आग्रह करने के ठीक बाद, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कीव पहुंच गए हैं। इस दौरे को जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में भारत के बढ़ते राजनयिक प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।
कीव की पहली आधिकारिक यात्रा और शांति संदेश
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का कीव में स्वागत किया। उन्होंने इसे किसी भी भारतीय विदेश मंत्री का यूक्रेन का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा बताया। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और शांति बहाली की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन में बातचीत की शुरुआत करते हुए युद्ध के लंबे खिंचने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह संघर्ष अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। जयशंकर ने भारत के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि आज का युग युद्ध का नहीं है और किसी भी समस्या का स्थाई समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता।
बिश्केक शिखर सम्मेलन और भारत की मध्यस्थता का प्रस्ताव
विदेश मंत्री ने दो दिन पहले बिश्केक में आयोजित एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का हवाला दिया। बिश्केक में पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से स्पष्ट कहा था कि अनिश्चितकालीन युद्ध के बजाय अब संघर्ष को समाप्त किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने रेखांकित किया था कि युद्ध का हर बीतता दिन केवल अधिक मौतों और भारी तबाही का कारण बनता है।
कीव में अपनी वार्ता का ब्योरा देते हुए डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हालांकि शांति का रास्ता खोजना मुख्य रूप से संघर्ष में शामिल पक्षों का दायित्व है, लेकिन यदि भारत किसी भी तरह से समाधान में सहायता कर सकता है, तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार है। यूक्रेन के विदेश मंत्री के साथ हुई बैठक का मुख्य विषय यही रहा कि इस जारी संकट को कूटनीतिक संवाद के जरिए कैसे हल किया जाए।




















