संगठन में पद पैसों से, सरकारी क्लब पर करोड़ों खर्च को लेकर कांग्रेस में सियासी बवालराजनीति
3 घंटे पहले· 3

संगठन में पद पैसों से, सरकारी क्लब पर करोड़ों खर्च को लेकर कांग्रेस में सियासी बवाल

बिहार में कांग्रेस के सृजन साथी कार्यक्रम पर पार्टी के भीतर से ही सवाल उठे हैं, जबकि कर्नाटक में भारत जोड़ो यूथ क्लब योजना पर बीजेपी ने सरकारी पैसे के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है.

कांग्रेस पार्टी इन दिनों बिहार और कर्नाटक में लिए गए अपने दो अलग अलग फैसलों को लेकर मुश्किल में फंसती दिख रही है. एक तरफ बिहार में संगठन में पद पाने के लिए तय की गई शर्तों पर पार्टी के अपने ही नेता सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक में सरकारी खर्च से बनाए जा रहे युवा क्लबों के नाम को लेकर विपक्ष कांग्रेस को घेर रहा है. दोनों मामलों में आरोप एक जैसा है, पैसे और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल पार्टी को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है.

बिहार में सृजन साथी योजना क्यों बनी विवाद की वजह

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी बीपीसीसी ने 11 अप्रैल को एक नया कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका नाम रखा गया सृजन साथी जनसंपर्क कार्यक्रम. प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इसे संगठन में पारदर्शिता लाने और जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने का जरिया बताया था. मकसद यह था कि पार्टी के भीतर पदों का बंटवारा सिर्फ ऊपर के नेताओं की मर्जी से नहीं, बल्कि जमीनी समर्थन के आधार पर हो. लेकिन जैसे ही इस योजना की शर्तें सामने आईं, पार्टी के भीतर ही इस पर सवाल खड़े होने लगे.

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योजना का तरीका कुछ इस तरह है, संगठन में पद पाने के इच्छुक किसी भी नेता को पहले अपने समर्थकों को सृजन साथी के तौर पर जोड़ना होगा. हर समर्थक का डिजिटल पंजीकरण कराने के लिए 50 रुपये जमा करने होंगे. जितने ज्यादा समर्थक जुड़ेंगे, पद के लिए सिफारिश उतनी मजबूत मानी जाएगी. इस हिसाब से अगर कोई नेता 3,000 सृजन साथी जोड़ लेता है, तो उसे प्रदेश उपाध्यक्ष पद के लिए सिफारिश मिल सकती है. 2,000 सृजन साथी जोड़ने पर महासचिव, 1,000 पर सचिव और सिर्फ 200 सदस्य जोड़ने पर जिला स्तर के पद तक पहुंचा जा सकता है.

क्या अब पद पैसों से तय होंगे

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह पूरी व्यवस्था मेहनत और वैचारिक प्रतिबद्धता से ज्यादा आर्थिक हैसियत को अहमियत देती है. एक वरिष्ठ नेता के हवाले से यह बात सामने आई है कि अगर कोई शख्स करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर 3,000 लोगों का पंजीकरण करा दे, तो वह सीधे प्रदेश उपाध्यक्ष बनने की सिफारिश का हकदार बन जाएगा. सवाल यही उठ रहा है कि जो कार्यकर्ता सालों से बिना किसी लाभ की उम्मीद के पार्टी के लिए काम करते आए हैं, उनकी मेहनत का क्या होगा, अगर पैसे वाले नए लोग रातोंरात ऊंचे पद तक पहुंच जाएं.

कटिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस पूरे मॉडल का खुलकर विरोध किया है. उनका कहना है कि यह तरीका पार्टी की पुरानी परंपरा और उसके संविधान, दोनों के खिलाफ जाता है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतने बड़े बदलाव को लागू करने से पहले संगठन के वरिष्ठ नेताओं से कोई सलाह मशविरा तक नहीं किया गया. यह विवाद अब पार्टी हाईकमान तक भी पहुंच चुका है, सूत्रों के मुताबिक इसकी जानकारी राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तक भी दी जा चुकी है.

हालांकि बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं. उनकी दलील है कि यह कोई सदस्यता अभियान नहीं है, बल्कि संगठन को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआईसीसी की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है. उनका तर्क है कि अब तक नेताओं को पद पाने के लिए दिल्ली और पटना के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे और लॉबिंग करनी पड़ती थी, लेकिन अब हर नेता का असली जनाधार डिजिटल तरीके से नापा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी.

कर्नाटक में भारत जोड़ो यूथ क्लब पर क्यों मचा हंगामा

दूसरी तरफ कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने राज्यभर में 10 हजार भारत जोड़ो यूथ क्लब बनाने का फैसला किया है. सरकारी आदेश के मुताबिक इनमें से 6,000 क्लब गांवों की पंचायतों में और बाकी 4,000 क्लब शहरी इलाकों में खोले जाएंगे. हर क्लब पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, यानी पूरी योजना पर कुल मिलाकर करीब 1,000 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से खर्च होंगे. सरकार का कहना है कि इन क्लबों के जरिए युवाओं को खेलकूद, सामाजिक गतिविधियों, नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों और सामुदायिक कामों से जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल हो सके.

लेकिन असली विवाद इन क्लबों के नाम को लेकर है. बीजेपी का सीधा आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के नाम पर एक सरकारी योजना खड़ी कर दी है और जनता से वसूले गए टैक्स के पैसे का इस्तेमाल पार्टी के राजनीतिक अभियान को मजबूत करने में किया जा रहा है. विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार वाकई युवाओं के लिए क्लब बनाना चाहती थी, तो इसके लिए किसी राजनीतिक यात्रा का नाम चुनने की क्या जरूरत थी.

कांग्रेस के लिए दोनों मोर्चों पर मुश्किल हालात

बिहार और कर्नाटक के ये दोनों विवाद मिलकर कांग्रेस को असहज स्थिति में ला खड़ा करते हैं. बिहार में खुद पार्टी के भीतर से यह सवाल उठ रहा है कि क्या आगे संगठन में तरक्की का पैमाना जनसेवा और मेहनत नहीं, बल्कि पैसा बन जाएगा. वहीं कर्नाटक में विपक्ष यह पूछ रहा है कि क्या सरकारी योजनाओं को किसी राजनीतिक अभियान के नाम पर चलाना सही ठहराया जा सकता है. एक तरफ पार्टी अपने संगठनात्मक सुधार की जरूरत को सही ठहरा रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और पार्टी के भीतर के ही कुछ नेता लगातार इन फैसलों पर सवाल दागे जा रहे हैं. आने वाले दिनों में यह दोनों विवाद राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस के लिए एक नई सिरदर्दी बन सकते हैं, खासकर तब जब पार्टी खुद को संगठनात्मक रूप से मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है.

सवाल-जवाब

सृजन साथी जनसंपर्क कार्यक्रम क्या है?
यह बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का 11 अप्रैल को शुरू किया गया कार्यक्रम है, जिसमें नेताओं को संगठन में पद पाने के लिए समर्थकों को सृजन साथी के तौर पर पंजीकृत कराना होता है.
एक सृजन साथी बनाने के लिए कितने पैसे देने होंगे?
हर समर्थक का डिजिटल पंजीकरण कराने के लिए 50 रुपये जमा करने होंगे.
कितने सृजन साथी जोड़ने पर कौन सा पद मिल सकता है?
3,000 सृजन साथी जोड़ने पर प्रदेश उपाध्यक्ष, 2,000 पर महासचिव, 1,000 पर सचिव और 200 सदस्यों पर जिला स्तर का पद मिल सकता है.
इस योजना का विरोध किसने किया है?
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के अलावा कटिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इसका खुलकर विरोध किया है.
क्या यह मामला राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे तक पहुंचा है?
सूत्रों के मुताबिक इस विवाद की जानकारी राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तक दी जा चुकी है.
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम इन आरोपों पर क्या कहते हैं?
वे इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि यह सदस्यता अभियान नहीं बल्कि एआईसीसी से मंजूर एक पायलट प्रोजेक्ट है.
कर्नाटक में भारत जोड़ो यूथ क्लब योजना क्या है?
कर्नाटक सरकार राज्यभर में 10,000 भारत जोड़ो यूथ क्लब बनाने जा रही है, जिनमें से 6,000 ग्राम पंचायतों में और 4,000 शहरी इलाकों में होंगे.
इस पूरी योजना पर कितना खर्च आएगा और बीजेपी का आरोप क्या है?
हर क्लब पर करीब 10 लाख रुपये यानी कुल मिलाकर करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे, और बीजेपी का आरोप है कि यह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के नाम पर टैक्स के पैसे से चलाया जा रहा राजनीतिक अभियान है.

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