हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार के बाद सीपीआई(एम) की केरल राज्य समिति ने कोझिकोड में अपनी तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत की है। इस बैठक में पार्टी के राजनीतिक, वैचारिक और सांगठनिक ढांचे का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। कोझिकोड स्थित जिला कमेटी कार्यालय से संलग्न एकेजी ऑडिटोरियम में इस समीक्षा सत्र का आधिकारिक उद्घाटन पोलित ब्यूरो सदस्य और पार्टी के जनरल सेक्रेटरी एम.ए. बेबी ने किया। इस तीन दिवसीय मंथन का मुख्य उद्देश्य उन कारणों को स्पष्ट रूप से पहचानना है जिनकी वजह से चुनावी मैदान में पार्टी को असफलता का सामना करना पड़ा, और साथ ही जमीनी स्तर पर कैडर को पुनः सक्रिय करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है।
संगठनात्मक खामियों और चुनावी विफलता का गहन विश्लेषण
यह बैठक केरल में वामपंथी राजनीति के भावी स्वरूप और दिशा को तय करने के लिहाज से बेहद निर्णायक मोड़ पर आयोजित हो रही है। चुनाव के नतीजों ने पार्टी नेतृत्व को अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने, संगठन की संरचनात्मक कमियों को दूर करने और आम मतदाताओं के साथ टूटते संवाद को बहाल करने के लिए मजबूर किया है। समीक्षा के दौरान केवल हार के तात्कालिक कारणों पर ही चर्चा नहीं हो रही, बल्कि बीते कुछ वर्षों में संगठन के भीतर पनपी गहरी कमजोरियों का भी निष्पक्ष और आत्म-आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जा रहा है।
बैठक की कार्यसूची में पार्टी के राजनीतिक संदेशों की प्रभावकारिता, चुनाव प्रचार की रणनीति, विभिन्न सांगठनिक इकाइयों के बीच आपसी तालमेल और आम जनता की बदलती अपेक्षाओं को समय रहते समझने में पार्टी की विफलता जैसे प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, शीर्ष नेतृत्व, स्थानीय पार्टी इकाइयों और आम नागरिकों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर भी विस्तार से मंथन हो रहा है।
शीर्ष नेतृत्व और 307 प्रतिनिधियों की भागीदारी
कोझिकोड में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कुल 307 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में केरल से आने वाले पोलित ब्यूरो के प्रमुख नेताओं में एम.ए. बेबी, पिनराई विजयन, एम.वी. गोविंदन और ए. विजयराघवन प्रमुख रूप से मौजूद हैं। इसके अलावा, अन्य राज्यों और केंद्रीय स्तर के पांच वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्यों के. बालकृष्णन, बी.वी. राघवलु, अशोक धवले, विजू कृष्णन और यू. वासुकी को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया है ताकि वे पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर सकें।
इन दिग्गज नेताओं के साथ-साथ केरल से आने वाले केंद्रीय कमेटी के सदस्य, राज्य सचिवालय और राज्य कमेटी के पदाधिकारी, जिला सचिवालय के प्रतिनिधि और पार्टी से जुड़े विभिन्न सहयोगी संगठनों के प्रमुख नेता भी इस विस्तृत विचार-विमर्श में शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर नेताओं का जुटना इस बात का संकेत है कि पार्टी चुनावी झटके को कितनी गंभीरता से ले रही है।
निचले स्तर से डेटा जुटाने की नई प्रक्रिया
इस बार सीपीआई(एम) ने अपनी पारंपरिक समीक्षा पद्धति से हटकर एक नई शुरुआत की है। आमतौर पर पार्टी की राज्य कमेटी सबसे पहले चुनाव परिणामों की एक प्रारंभिक समीक्षा रिपोर्ट तैयार करती थी और फिर उस रिपोर्ट को नीचे की कमेटियों में चर्चा के लिए भेजा जाता था। लेकिन इस बार प्रक्रिया को बिल्कुल उलट दिया गया और संगठन के सबसे निचले स्तर की इकाइयों से पहले राय मांगी गई।
पार्टी ने हार के कारणों और अपने कामकाज की शैली पर आम जनता से भी सीधे विचार और फीडबैक प्राप्त किए। जमीनी स्तर से मिले इन जवाबों, अंदरूनी बैठकों के निष्कर्षों और केंद्रीय कमेटी के दिशानिर्देशों को एक व्यापक रिव्यू रिपोर्ट में संकलित किया गया। इसके बाद राज्य कमेटी ने इस दस्तावेज का सूक्ष्म परीक्षण कर इसे मंजूरी दी और चर्चा के लिए विभिन्न इकाइयों को भेजा। निचले स्तर से प्राप्त इसी अंतिम फीडबैक और विस्तृत रिपोर्ट को कोझिकोड की तीन दिवसीय बैठक की मुख्य सामग्री बनाया गया है।



















