अलवर शहर के खदाना मोहल्ले में रहने वाले 75 साल के दिनेश चंद अग्रवाल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। अकेले रहने वाले बुजुर्ग के हाथ और पैर बांध दिए गए थे, मुंह पर कपड़ा कसकर लपेटा गया था और घर के अंदर सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा था। शुरुआत में इसे लूट के इरादे से की गई हत्या माना गया, लेकिन अब पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश को पांच लोगों ने मिलकर अंजाम दिया, जिनमें दो नाबालिग और तीन युवक बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तह तक पहुंच चुकी है कि आखिर बुजुर्ग के घर में यह वारदात किसने और कैसे अंजाम दी।
पांच में से दो को हिरासत में लिया, बाकी जल्द दबोचे जाएंगे
पुलिस ने इस मामले में करण पुत्र रामजीलाल, जो दारुकुटा मोहल्ले का रहने वाला है, और तेजू उर्फ तेजपाल, जो मालवीय नगर के सरकारी क्वार्टर में रहता है, को डिटेन कर लिया है। पुलिस के मुताबिक वारदात में दो नाबालिग भी शामिल थे, जिन्हें जल्द ही निरुद्ध किया जाएगा। एक और युवक को गिरफ्तार करने की तैयारी भी चल रही है। यानी पांचों संदिग्धों में से दो अभी पुलिस की हिरासत में हैं, जबकि बाकी तीन पर जल्द शिकंजा कसे जाने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि सभी पांचों आरोपी आपस में जुड़े हुए हैं और इस वारदात की योजना मिलकर बनाई गई थी।
12 घंटे की अनवरत मेहनत से सुलझी गुत्थी
पुलिस के अनुसार आरोपियों की पहचान करना आसान नहीं था। जांच टीमों ने बिना रुके लगातार 12 घंटे तक काम किया, तब जाकर तकनीकी साक्ष्यों और दूसरे सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचा जा सका। इतनी सघन मशक्कत के बाद ही पुलिस इतने कम समय में इस चर्चित मामले को सुलझाने में कामयाब रही।
हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा, दम घुटने से गई जान
पुलिस जांच में यह भी साफ हुआ कि बदमाशों ने पहले दिनेश चंद अग्रवाल के हाथ-पैर बांधे और फिर उनके मुंह पर कपड़ा कसकर बांध दिया। जांच में मौत की वजह दम घुटना पाई गई, यानी इसी तरीके से बुजुर्ग की जान गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी घर में रखे कीमती सामान की तलाश में जुटे रहे। पुलिस के मुताबिक घर से सिक्के भी चोरी हुए थे, जिन्हें आरोपियों ने बाद में बाजार में बेच दिया। इस पूरे मामले में पुलिस का अनुसंधान अभी भी जारी है।
20 घंटे तक किसी को भनक तक नहीं लगी
दिनेश चंद अग्रवाल अपने खदाना मोहल्ले वाले मकान में अकेले रहते थे, यही वजह रही कि वारदात के करीब 20 घंटे बाद तक किसी को इसकी जानकारी ही नहीं मिल सकी। परिवार के मुताबिक वह रोज दोपहर और रात का खाना खाने के लिए स्कीम नंबर 4 में रहने वाले अपने बेटे के घर जाया करते थे। लेकिन जिस रात वह खाना खाने नहीं पहुंचे, तो परिजनों को चिंता होने लगी। रात करीब साढ़े 9 बजे बेटा और पोती उन्हें देखने उनके घर पहुंचे।
चारपाई पर मिला शव, अलमारियां टूटी और सामान बिखरा
जब परिवार के लोग घर के अंदर पहुंचे तो कमरे में चारपाई पर दिनेश चंद अग्रवाल का शव पड़ा मिला। उनके हाथ, पैर और मुंह कपड़ों से बंधे हुए थे। घर की अलमारियां खुली और टूटी हुई मिलीं, जबकि पूरा सामान बिखरा पड़ा था। दिनेश चंद अग्रवाल नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल के सगे मामा थे और पूर्व सीएमएचओ डॉ. सुबोध अग्रवाल के चचेरे भाई भी थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एफएसएल और डॉग स्क्वायड की टीमों को भी बुलाया गया, साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की गई।
नए नोटों और नकदी की जानकारी बनी शक की वजह?
पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल ने बताया था कि दिनेश चंद अग्रवाल बेहद स्वाभिमानी इंसान थे और अक्सर बैंक से नए नोट लाकर जरूरतमंद लोगों को दिया करते थे। उनके पास कई बार नकदी भी रहती थी। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि किसी को उनके घर में नकदी होने की जानकारी पहले से थी, और उसी जानकारी के आधार पर इस वारदात की साजिश रची गई। पुलिस का कहना है कि मामले की गुत्थी अब काफी हद तक सुलझा ली गई है। बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी, और चोरी हुए सामान समेत पूरे घटनाक्रम की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।











