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राजस्थान के अलवर और खैरथल-तिजारा में बारिश ने किसानों की सूखती फसलों को दी नई जिंदगीराजस्थान
10 जुल॰ 2026, 8:03 am (45 दिन पहले)· 3

राजस्थान के अलवर और खैरथल-तिजारा में बारिश ने किसानों की सूखती फसलों को दी नई जिंदगी

अलवर और खैरथल-तिजारा जिलों में हुई बारिश ने सूखने की कगार पर पहुंच चुकी बाजरा और कपास की फसलों को नई जिंदगी दी है, किसानों को अब अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है।

राजस्थान के अलवर और खैरथल-तिजारा जिलों में हुई अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। कई दिनों की तेज गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को इस बारिश से जहां राहत मिली, वहीं खेतों में सूखने की कगार पर पहुंच चुकी बाजरा और कपास की फसलों को भी मानो नया जीवन मिल गया। लगातार बारिश न होने से यह फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं और किसान लगातार आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे थे।

किसानों ने बताया, बारिश बनी संजीवनी

इलाके के किसान हवा सिंह यादव, शिवचरण और फराज खान ने कहा कि यह बारिश बाजरा और कपास की फसल के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान की वजह से बाजरे के पौधे मुरझाने लगे थे, लेकिन बारिश होते ही फसलों में जान लौट आई। किसानों को उम्मीद है कि अब पौधों की बढ़वार तेज होगी और आने वाले समय में पैदावार भी अच्छी मिलेगी।

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कृषि विभाग की सलाह, अभी भी हो सकती है बुवाई

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बारिश फसलों के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित होगी। जिन किसानों ने अब तक बाजरा और ग्वार की बुवाई नहीं की है, विभाग ने उनसे कहा है कि मौसम पूरी तरह अनुकूल हो चुका है, इसलिए वे जल्द बुवाई कर सकते हैं। साथ ही किसानों को फसलों में कीट-रोगों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। खेतों में पानी जमा न होने देने और जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई और खाद-उर्वरक का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया है ताकि फसल को कोई नुकसान न पहुंचे।

बुवाई का लक्ष्य और अब तक की स्थिति

खैरथल-तिजारा जिले की बात करें तो कृषि विभाग ने इस सीजन बाजरे की बुवाई का लक्ष्य 80,000 हेक्टेयर रखा था। इसके मुकाबले अब तक 79,100 हेक्टेयर जमीन पर बुवाई हो चुकी है, यानी लक्ष्य के लगभग करीब पहुंच गया है। कपास की बुवाई के लिए 10,000 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 3,968 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हुई है। पिछले करीब दो सप्ताह से बारिश न होने के कारण खेतों में नमी की भारी कमी हो गई थी, जिससे फसलों पर असर दिखने लगा था। लेकिन बुधवार को हुई बारिश ने इस संकट को काफी हद तक टाल दिया। अगर आने वाले दिनों में भी मौसम इसी तरह मेहरबान रहा, तो इस बार बाजरा, कपास और ज्वार की पैदावार उम्मीद से बेहतर रहने के पूरे आसार हैं।

सवाल-जवाब

अलवर और खैरथल-तिजारा में हाल ही में क्या हुआ?
दोनों जिलों में झमाझम बारिश हुई जिससे सूखने की कगार पर पहुंच चुकी बाजरा और कपास की फसलों को राहत मिली।
बारिश से किन फसलों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ?
बाजरा और कपास की फसलों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, किसानों ने इसे इन फसलों के लिए अमृत के समान बताया।
कृषि विभाग ने किसानों को क्या सलाह दी है?
जिन किसानों ने अभी तक बाजरा और ग्वार की बुवाई नहीं की, उन्हें अब बुवाई करने की सलाह दी गई है क्योंकि मौसम अनुकूल हो गया है, साथ ही कीट-रोगों पर नजर रखने और सिंचाई-उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
खैरथल-तिजारा में बाजरे की बुवाई का लक्ष्य कितना है और अब तक कितनी बुवाई हुई?
बाजरे की बुवाई का लक्ष्य 80,000 हेक्टेयर था, जिसके मुकाबले अब तक 79,100 हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी है।
कपास की बुवाई किस स्थिति में है?
कपास के लिए 10,000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 3,968 हेक्टेयर में बुवाई हुई है।
बारिश से पहले फसलों की क्या स्थिति थी?
करीब दो सप्ताह से बारिश न होने के कारण खेतों में नमी की कमी हो गई थी, जिससे फसलें प्रभावित होने लगी थीं।
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