राजस्थान के अलवर और खैरथल-तिजारा जिलों में हुई अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। कई दिनों की तेज गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को इस बारिश से जहां राहत मिली, वहीं खेतों में सूखने की कगार पर पहुंच चुकी बाजरा और कपास की फसलों को भी मानो नया जीवन मिल गया। लगातार बारिश न होने से यह फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं और किसान लगातार आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे थे।
किसानों ने बताया, बारिश बनी संजीवनी
इलाके के किसान हवा सिंह यादव, शिवचरण और फराज खान ने कहा कि यह बारिश बाजरा और कपास की फसल के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान की वजह से बाजरे के पौधे मुरझाने लगे थे, लेकिन बारिश होते ही फसलों में जान लौट आई। किसानों को उम्मीद है कि अब पौधों की बढ़वार तेज होगी और आने वाले समय में पैदावार भी अच्छी मिलेगी।
कृषि विभाग की सलाह, अभी भी हो सकती है बुवाई
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बारिश फसलों के लिहाज से बेहद फायदेमंद साबित होगी। जिन किसानों ने अब तक बाजरा और ग्वार की बुवाई नहीं की है, विभाग ने उनसे कहा है कि मौसम पूरी तरह अनुकूल हो चुका है, इसलिए वे जल्द बुवाई कर सकते हैं। साथ ही किसानों को फसलों में कीट-रोगों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। खेतों में पानी जमा न होने देने और जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई और खाद-उर्वरक का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया है ताकि फसल को कोई नुकसान न पहुंचे।
बुवाई का लक्ष्य और अब तक की स्थिति
खैरथल-तिजारा जिले की बात करें तो कृषि विभाग ने इस सीजन बाजरे की बुवाई का लक्ष्य 80,000 हेक्टेयर रखा था। इसके मुकाबले अब तक 79,100 हेक्टेयर जमीन पर बुवाई हो चुकी है, यानी लक्ष्य के लगभग करीब पहुंच गया है। कपास की बुवाई के लिए 10,000 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 3,968 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हुई है। पिछले करीब दो सप्ताह से बारिश न होने के कारण खेतों में नमी की भारी कमी हो गई थी, जिससे फसलों पर असर दिखने लगा था। लेकिन बुधवार को हुई बारिश ने इस संकट को काफी हद तक टाल दिया। अगर आने वाले दिनों में भी मौसम इसी तरह मेहरबान रहा, तो इस बार बाजरा, कपास और ज्वार की पैदावार उम्मीद से बेहतर रहने के पूरे आसार हैं।











