देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार पिछले कुछ दिनों से सुस्त पड़ी हुई है, आसमान में बादल तो नजर आ रहे हैं लेकिन बारिश गायब है। इसी बीच मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 60 घंटे मौसम के लिहाज से बेहद अहम साबित होंगे। बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक संभावित लो प्रेशर एरिया बनने जा रहा है, और समुद्र के ऊपर बनने वाले ऐसे सिस्टम अक्सर जमीन की ओर बढ़ते हुए नमी खींचकर मानसून को नई ताकत दे देते हैं। इसी वजह से माना जा रहा है कि मानसून एक बार फिर जोर पकड़ सकता है। इसका असर सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, कई राज्यों में तेज आंधी, वज्रपात, अचानक बाढ़, जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन जैसे हालात भी बन सकते हैं, क्योंकि पहाड़ी मिट्टी लगातार बारिश से पहले ही ढीली पड़ चुकी होती है। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून का यह चरण सबसे ज्यादा असरदार माना जा रहा है, इसलिए जिन इलाकों में गर्मी और उमस ने पिछले कुछ दिनों से लोगों को परेशान कर रखा था, वहां मौसम अचानक करवट ले सकता है। हालांकि राहत की यह बारिश अपने साथ कई मुश्किलें भी लेकर आएगी, खासकर नदी किनारे बसे इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और शहरी जलभराव वाले शहरों में प्रशासन और आम लोगों दोनों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
22 राज्यों में अलर्ट, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर सबसे ज्यादा असर
मौसम विभाग ने 22 राज्यों के लिए अलग-अलग स्तर की भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। इनमें सबसे ज्यादा असर पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में देखने को मिलेगा। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 17 जुलाई से भारी बारिश का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई गई है। इसके उलट दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम है, हालांकि मौसम में अचानक बदलाव और तेज हवाएं लोगों को चौंका सकती हैं। बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश की वजह से बाढ़ और जलभराव का खतरा भी बढ़ता जा रहा है, यही वजह है कि मौसम विभाग स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को लगातार सतर्क रहने की सलाह दे रहा है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को सबसे ज्यादा जोखिम वाले राज्यों में गिना जा रहा है, क्योंकि इन इलाकों में पहले से ही नदियां और पहाड़ी ढलानें संवेदनशील मानी जाती हैं।
देशभर की मौसमी तस्वीर पर नजर डालें तो साफ है कि मानसून का अगला दौर बड़ी उथल-पुथल लेकर आने वाला है। एक तरफ पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में झमाझम बारिश होगी, तो दूसरी तरफ पश्चिम और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है। यानी मानसून का यह दौर पूरे देश में एक जैसा असर नहीं दिखाएगा, बल्कि इलाके के हिसाब से बहुत अलग तस्वीर पेश करेगा। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बनने वाला यह मौसमी तंत्र अगले कुछ दिनों में पूरे मानसून के ट्रैक को प्रभावित करने वाला है, जिससे यह तय होगा कि नमी वाली हवाएं किन राज्यों की तरफ ज्यादा बढ़ेंगी।
मौसम विभाग के अनुसार 15 से 20 जुलाई के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कुल 22 राज्यों में कहीं भारी तो कहीं बहुत भारी बारिश दर्ज हो सकती है। कुछ इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात की भी चेतावनी दी गई है, जिससे खुले में काम करने वालों और खेतों में मौजूद लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली-एनसीआर में बादल तो छाएंगे, बारिश अब भी दूर
राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों में मानसून की चाल अभी भी धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 15 से 19 जुलाई तक आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे, लेकिन व्यापक बारिश की उम्मीद फिलहाल नहीं है। 15 जुलाई को अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 16 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग वैसा ही बना रहेगा। 17 से 19 जुलाई के बीच बादलों की आवाजाही जरूर बनी रहेगी, लेकिन बारिश के आसार बेहद कम हैं। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के लोगों को गर्मी और उमस से फिलहाल पूरी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, यानी बादल दिखने के बावजूद यहां इंतजार अभी लंबा खिंच सकता है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश और आंधी का डबल अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मौसम तेजी से बदलाव लेने वाला है। मौसम विभाग ने पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, हरदोई, शाहजहांपुर, बाराबंकी, लखनऊ, रायबरेली, कानपुर, इटावा, जालौन, बांदा, आगरा, औरैया और हमीरपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी दी है। प्रयागराज और उसके आसपास के इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। किसानों और खुले मैदानों में काम करने वाले लोगों को खास एहतियात बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि तेज आंधी और वज्रपात एक साथ आने पर खेतों में मौजूद लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है।
बिहार के सीमांचल में मूसलाधार बारिश, कई जिलों में बाढ़ की आशंका
बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिख रहा है। मौसम विभाग ने अररिया और किशनगंज में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा समस्तीपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, बांका और बेगूसराय समेत कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जो सीमांचल के जिलों में हर साल की एक बड़ी चुनौती रही है। हालांकि पटना, गया और नालंदा में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य बना रहने का अनुमान है, यानी राज्य के भीतर भी बारिश का असर एक जैसा नहीं रहेगा।
पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी का सीधा असर, भारी बारिश का अनुमान
पश्चिम बंगाल में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाला है, क्योंकि यह राज्य सीधे बंगाल की खाड़ी से सटा हुआ है। अलीपुर मौसम केंद्र ने कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के ज्यादातर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। राज्य के कई हिस्सों में येलो वॉर्निंग लागू कर दी गई है। यहां 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जो पहाड़ी और तराई वाले इलाके होने के चलते भूस्खलन के लिहाज से भी संवेदनशील माने जाते हैं। लगातार बारिश की वजह से निचले इलाकों में जलभराव और कुछ जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बनने का खतरा बना हुआ है, ऐसे में राज्य प्रशासन को नदी किनारे और तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ानी होगी।











