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भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में फिर 2 प्रसूताओं की मौत, 60 दिनों में 7 महिलाओं की जान जाने से हड़कंपराजस्थान
31 जुल॰ 2026, 3:15 pm (3 घंटे पहले)· 2

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में फिर 2 प्रसूताओं की मौत, 60 दिनों में 7 महिलाओं की जान जाने से हड़कंप

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के महात्मा गांधी अस्पताल में बुधवार को दो प्रसूताओं की अत्यधिक रक्तस्राव से मौत हो गई। पिछले दो महीनों में 7 मौतों के बाद चिकित्सा विभाग ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई में बुधवार शाम को दो प्रसूताओं की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद जिला स्वास्थ्य प्रशासन हरकत में आ गया है और चिकित्सा विभाग ने उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। दम तोड़ने वाली महिलाओं में शाहपुरा क्षेत्र के दातड़ा गांव की सुगना बैरवा और भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर की रानी बंजारा शामिल हैं। पिछले दो महीनों में इस अस्पताल में कुल 7 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिसके बाद सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

शाहपुरा से रेफर हुई सुगना बैरवा की गंभीर स्थिति और इलाज की कोशिश

भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी क्षेत्र के दातड़ा गांव की 22 वर्षीया सुगना बैरवा दूसरी बार मां बनी थीं। सुगना का प्रसव शाहपुरा कस्बे के सैटेलाइट अस्पताल में सामान्य तरीके से कराया गया था। हालांकि, प्रसव के तुरंत बाद ही उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

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महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचते-पहुंचते सुगना की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उनकी पल्स और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर चुके थे। सुगना के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर गिरकर मात्र 1.8 ग्राम रह गया था और प्लेटलेट्स की संख्या केवल 4000 बची थी। डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुगना को तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। अस्पताल प्रशासन ने कई यूनिट ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाकर उनकी जान बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पटेल नगर की 18 वर्षीया रानी बंजारा का पहला प्रसव बना दुखद अंत

दूसरी दर्दनाक घटना भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर निवासी 18 वर्षीया रानी बंजारा के साथ हुई। रानी पहली बार मां बनी थीं और बच्चे के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था। हालांकि, डिलीवरी के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सामान्य प्रसव होने के बावजूद रानी को अचानक तान आने लगी और एम्बोलिज्म की शिकायत हुई, जिससे उन्हें गंभीर पीपीएच यानी पोस्टपार्टम हेमरेज हो गया।

अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण रानी बंजारा की भी मौत हो गई। महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर अरुण गौड़ ने बताया कि कोटड़ी क्षेत्र की सुगना को बेहद क्रिटिकल स्थिति में शाहपुरा से रेफर करके लाया गया था, जबकि रानी बंजारा का प्रसव सामान्य हुआ था लेकिन डिलीवरी के बाद उन्हें अचानक तान आने और पीपीएच की समस्या के कारण जान गंवानी पड़ी।

जून महीने में हुई मौतों का इतिहास और मंत्री के निर्देश

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले जून महीने के प्रथम पखवाड़े में भी इसी अस्पताल में चार प्रसूताओं सहित पांच महिलाओं की मौत हो गई थी। उस समय यह मुद्दा पूरे देश में सुर्खियों में रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्वयं जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार करने के साथ ही जांच के कड़े निर्देश दिए थे।

स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद भीलवाड़ा जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए थे। कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर अरुण गौड़ ने गंभीर और उच्च जोखिम वाली प्रसूताओं के इलाज के लिए एक विशेष वार्ड की स्थापना कराई थी। इस वार्ड का मुख्य उद्देश्य बीमारी से ग्रस्त या क्रिटिकल स्थिति वाली महिलाओं को तत्काल और बेहतर प्रसव सुविधाएं उपलब्ध कराना था।

विशेष वार्ड बनने के बाद भी व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

अस्पताल परिसर में विशेष क्रिटिकल केयर वार्ड बनाए जाने के बावजूद बुधवार को एक ही शाम दो महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि रेफरल सिस्टम और आपातकालीन सुविधाओं में अभी भी कई खामियां हैं, जिसके कारण समय पर सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। शाहपुरा सैटेलाइट अस्पताल से महात्मा गांधी अस्पताल तक मरीज को लाने के दौरान हुई देरी और अस्पताल में क्रिटिकल स्थिति को संभालने की क्षमता पर फिर से बहस छिड़ गई है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजीव शर्मा का बयान और जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए भीलवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉक्टर संजीव शर्मा ने तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि दोनों मामलों के हर तथ्य की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

डॉक्टर संजीव शर्मा ने बताया कि शाहपुरा से रेफर होकर आई सुगना और पटेल नगर की रानी दोनों की मौत का मुख्य कारण अत्यधिक रक्तस्राव रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के पुराने रिकॉर्ड और डेटा की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रसव के बाद अचानक स्थिति बिगड़ने के पीछे क्या कारण रहे और क्या इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में बुधवार को क्या हादसा हुआ?
अस्पताल में दो प्रसूताओं की अत्यधिक रक्तस्राव और चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण मौत हो गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
जान गंवाने वाली दोनों प्रसूताओं के नाम और उम्र क्या हैं?
मृतक महिलाओं में शाहपुरा क्षेत्र के दातड़ा गांव निवासी 22 वर्षीया सुगना बैरवा और भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर निवासी 18 वर्षीया रानी बंजारा शामिल हैं।
पिछले दो महीनों में महात्मा गांधी अस्पताल में कितनी महिलाओं की जान जा चुकी है?
पिछले दो महीनों में इस अस्पताल में कुल 7 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिसमें जून की शुरुआत में हुई 5 महिलाओं की मौतें भी शामिल हैं।
चिकित्सकों के अनुसार दोनों महिलाओं की मौत की मुख्य वजह क्या रही?
अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर अरुण गौड़ के अनुसार, मौतों का मुख्य कारण अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच), एम्बोलिज्म और प्रसव के बाद तान आना रहा।
मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने क्या निर्देश दिए हैं?
सीएमएचओ डॉक्टर संजीव शर्मा ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और पुराने मेडिकल रिकॉर्ड व डेटा की गहन पड़ताल के निर्देश जारी किए हैं।
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