जोधपुर नगर निगम में बोर्ड गठन को लेकर जारी राजनीतिक सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर लिया है. निगम के सात निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को अपना समर्थन देने का निर्णय लिया है, जिससे पार्टी की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी के कुशल रणनीतिक और राजनीतिक प्रबंधन के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी चर्चा स्थानीय राजनीतिक हलकों में काफी तेज है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों ही मुख्य राजनीतिक दल स्थानीय नगर निकाय प्रशासन पर नियंत्रण हासिल करने के लिए बहुमत जुटाने की पुरजोर कोशिशों में लगे हुए थे.
बोर्ड गठन के समीकरणों में बड़ा बदलाव
जोधपुर नगर निगम में सात निर्दलीय पार्षदों के भाजपा खेमे में शामिल होने से बहुमत का पूरा गणित बदल गया है. भाजपा के साथ आने वाले इन पार्षदों में विशाल सांखला और स्वरूप सिंह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं. इन निर्दलीयों के आने के बाद अब बोर्ड गठन के लिए आवश्यक आंकड़ों को हासिल करने में भाजपा काफी मजबूत स्थिति में आ गई है. इस राजनीतिक उलटफेर से पहले स्पष्ट बहुमत की राह काफी कठिन और अनिश्चित बनी हुई थी, क्योंकि दोनों ही दल निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम में अपना बोर्ड स्थापित करने के लिए भाजपा आगे की रणनीति को किस प्रकार अंतिम रूप देती है, क्योंकि इस अतिरिक्त समर्थन से पार्टी नेतृत्व को अपनी प्रशासनिक योजनाओं को लागू करने में काफी आसानी होगी.
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बनी सहमति
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और नेता मौके पर मौजूद रहे, जो इस राजनीतिक बदलाव के महत्व को दर्शाता है. निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की यह प्रक्रिया राज्य मंत्री ओंकार सिंह लखावत और भाजपा जिला अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुई. इसके साथ ही, चुनाव प्रभारी और पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल तथा सह प्रभारी किशोर सिंह भी इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उपस्थित रहे. वरिष्ठ नेताओं की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी यह साबित करती है कि जोधपुर नगर निगम पर नियंत्रण हासिल करने को लेकर पार्टी संगठन कितना गंभीर था. इन वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति ने निर्दलीय पार्षदों को यह भरोसा दिलाने में मदद की कि भविष्य के प्रशासनिक ढांचे में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
स्थानीय राजनीति पर गहरा असर
सात निर्दलीय पार्षदों के इस फैसले से जोधपुर नगर निगम की भावी राजनीति में हलचल तेज हो गई है. स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को साधने की पार्टी की कोशिशों में इसे एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है. इस कदम ने विपक्षी दलों द्वारा अपना खुद का गठबंधन बनाने की कोशिशों को लगभग समाप्त कर दिया है. आने वाले समय में जोधपुर नगर निगम की सत्ता किस तरह का आकार लेगी, इस पर न केवल राजनीतिक दलों की बल्कि पूरे शहर की बारीक नजर बनी हुई है. इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के भीतर भूपेंद्र सैनी के संगठनात्मक कौशल और उनकी प्रबंधकीय भूमिका की जमकर तारीफ हो रही है. अब मुख्य फोकस नगर निगम के भीतर विभिन्न समितियों के गठन और महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बंटवारे पर रहेगा, जिससे शहर के विकास कार्यों की गति तय होगी.













