उदयपुर नगर निगम के महापौर चुनाव में मतदान से ठीक पहले एक अप्रत्याशित और बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। महापौर पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे दिनेश भट्ट की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब पार्षदों की खरीद-फरोख्त और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच राजनीतिक बाड़ेबंदी की जा रही थी। इस आकस्मिक घटना ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया है और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
चुनावी बाड़ेबंदी के बीच अचानक बिगड़ी तबीयत
चुनावी सरगर्मियों के बीच पार्षदों को एकजुट रखने के लिए की गई बाड़ेबंदी के दौरान दिनेश भट्ट को अचानक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं महसूस हुईं। उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत एक निजी चिकित्सालय ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। दिनेश भट्ट के अचानक अस्वस्थ होने और अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही उनके समर्थकों और स्थानीय नेताओं में चिंता की लहर दौड़ गई है। उदयपुर नगर निगम चुनाव में इस बार मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है। पार्षदों को विरोधी खेमे के संपर्क से दूर रखने के लिए कड़ी घेराबंदी की गई थी। इसी दौरान भट्ट के अस्वस्थ होने की खबर ने पार्टी के रणनीतिकारों को सकते में डाल दिया।
सबसे मजबूत दावेदार के हटने से बदला समीकरण
महापौर की इस चुनावी जंग में दिनेश भट्ट को सबसे मजबूत और अग्रणी उम्मीदवार माना जा रहा था। संगठन के भीतर उनके नाम पर लगभग सहमति बन चुकी थी और केवल उनके नाम की औपचारिक घोषणा होना ही शेष था। समर्थक भी उनकी उम्मीदवारी का जश्न मनाने की तैयारियों में जुटे थे। लेकिन ऐन वक्त पर उनकी सेहत खराब होने से नेतृत्व के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। इस अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए आलाकमान को तुरंत अपनी रणनीति बदलनी पड़ी और नए विकल्पों पर विचार करना पड़ा।
पारस सिंघवी के नाम की अचानक घोषणा
दिनेश भट्ट के अस्पताल में भर्ती होने के बाद महापौर प्रत्याशी को लेकर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई थी। चुनावी समय सीमा को देखते हुए संगठन ने तुरंत कदम उठाया और असमंजस की स्थिति को समाप्त करते हुए पारस सिंघवी को नया उम्मीदवार घोषित कर दिया। सिंघवी की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद अब पूरे स्थानीय संगठन को नए सिरे से लामबंद किया जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए वरिष्ठ नेता लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सिंघवी के नाम के इस औचक ऐलान ने चुनावी मुकाबले को एक नया मोड़ दे दिया है, और अब नए सिरे से चुनावी गोटियां बिछाई जा रही हैं।




















