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पार्टनर से खुद की तुलना करते रहते हैं? मनोविज्ञान कहता है यह हमेशा बुरी आदत नहींरिश्ते
18 अग॰ 2026, 12:00 am (1 घंटे पहले)· 2

पार्टनर से खुद की तुलना करते रहते हैं? मनोविज्ञान कहता है यह हमेशा बुरी आदत नहीं

नए शोध के मुताबिक लोग रिश्ते में आने के बाद भी अपने पार्टनर से दिन में कई बार खुद की तुलना करते हैं, और यह आदत सिर्फ असुरक्षा नहीं बल्कि रिश्ते को समझने का एक जरिया भी हो सकती है।

अपने पार्टनर को देखकर मन ही मन उससे अपनी तुलना कर बैठना, ज्यादातर लोगों को शर्मिंदा करने वाली आदत लगती है। लेकिन मनोविज्ञान से जुड़े शोध बताते हैं कि यह आदत डेटिंग ऐप पर स्वाइप करने के दौर के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि रिश्ता पक्का होने और सालों साथ रहने के बाद भी दिन में कई बार लौट आती है। और यह सिर्फ असुरक्षा की निशानी नहीं है, इसकी वजहें कहीं ज्यादा दिलचस्प हैं।

पुराने शोध पहले ही बता चुके हैं कि लोग जिंदगी के किसी भी और रिश्ते, दोस्त, परिवार या सहकर्मी से ज्यादा अपने रोमांटिक पार्टनर से खुद की तुलना करते हैं। नए अध्ययन में यह समझने की कोशिश की गई कि आखिर किस तरह के लोग यह तुलना ज्यादा करते हैं, और वे ऐसा करते क्यों हैं। जवाब इस बात पर टिका निकला कि तुलना किस चीज की हो रही है।

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तुलना के दो अलग-अलग तरीके

शोधकर्ता पार्टनर के बीच होने वाली तुलना को दो हिस्सों में बांटते हैं। पहली तरह की तुलना काबिलियत या हुनर से जुड़ी होती है, जैसे कौन बेहतर बॉलिंग करता है, यह मामूली भी हो सकता है, या कौन बेहतर मां-बाप साबित हो रहा है, जैसा गंभीर सवाल भी। दूसरी तरह की तुलना राय और फैसलों से जुड़ी होती है, जहां कोई अपनी सोच को सही मानने से पहले पार्टनर की राय से मिलाकर देखता है। मसलन कोई बड़ी खरीदारी करने से पहले यह सोचना कि क्या पार्टनर को भी यह सौदा अच्छा लगेगा। यही आदत वोट डालने, बच्चों की परवरिश या किसी भी ऐसे फैसले में दिखती है जहां निजी राय आखिरकार किसी काम में बदलने वाली हो।

कौन ज्यादा तुलना करता है, और क्यों

यह जानने के लिए कि काबिलियत वाली तुलना सबसे ज्यादा कौन करता है, शोधकर्ताओं ने रॉबिन एडेलस्टीन और स्टीफन गार्सिया के साथ मिलकर अमेरिका में रोमांटिक रिश्तों में मौजूद 1,100 से ज्यादा वयस्कों पर सर्वे किया। लोगों से पूछा गया कि वे अपने प्रदर्शन की तुलना पार्टनर से कितनी बार करते हैं, साथ ही उनके आत्मसम्मान, रिश्ते से संतुष्टि और बुनियादी जानकारी भी दर्ज की गई।

नतीजा साफ था। कम उम्र के लोग, कम आत्मसम्मान वाले लोग, और ऐसे लोग जिनका रिश्ता नया था और जो अपने रिश्ते से ज्यादा संतुष्ट नहीं थे, वही सबसे ज्यादा हिसाब रखते पाए गए कि कौन किस काम में बेहतर है। पुरुषों के साथ रिश्ते में रह रहे पुरुषों ने किसी भी और समूह से ज्यादा ऐसी तुलना करने की बात कही, हालांकि सर्वे में सिर्फ 37 ऐसे पुरुष शामिल थे, इसलिए इस नतीजे को एहतियात के साथ ही देखा जाना चाहिए।

राय वाली तुलना में कहानी उल्टी निकली। जो लोग अपनी राय को पार्टनर की राय से परखते थे, वे घबराए हुए नए जोड़े नहीं बल्कि लंबे और ज्यादा खुशहाल रिश्तों में रह रहे लोग थे, जो पार्टनर की राय को खतरा नहीं बल्कि एक सहारा मानते थे।

असुरक्षित शुरुआत बनाम भरोसेमंद पुराना रिश्ता

इन दोनों पैटर्न को साथ रखकर देखें तो दो तरह के किरदार सामने आते हैं। पहला किरदार है एक युवा, कम भरोसेमंद पार्टनर का, जो रिश्ते की शुरुआत में है और अब भी तय नहीं कर पाया कि यह रिश्ता चलेगा या नहीं, और लगातार यह तौलता रहता है कि वह उतना दे रहा है जितना उसे मिल रहा है। यह ठीक वैसी ही मन:स्थिति है जैसी ट्वाइलाइट की बेला स्वान की होती है, जो हमेशा यही सोचती रहती है कि एडवर्ड उसके लायक है भी या नहीं। जब लोगों से सीधे पूछा गया कि वे तुलना क्यों करते हैं, तो दो वजहें बार-बार सामने आईं, रिश्ते में बराबरी जांचना और यह अंदाजा लगाना कि रिश्ता किस दिशा में जा रहा है। एक शख्स ने अपनी बेचैनी को साफ शब्दों में बयां करते हुए कहा कि वह सोचता रहता है कि क्या वह पार्टनर के लिए उतना कर रहा है जितना पार्टनर उसके लिए करती है।

दूसरा किरदार है किसी लंबे रिश्ते में मौजूद वह इंसान, जो अपने पार्टनर की समझ और अनुभव का सम्मान करता है और उसे बेहतर फैसले लेने के एक जरिए की तरह इस्तेमाल करता है। इसे पार्क्स एंड रेक की लेस्ली नोप की तरह समझा जा सकता है, जो अक्सर अपने फैसलों को अपनी करीबी साथी ऐन पर्किंस की राय से परखती है। सर्वे में शामिल एक शख्स ने प्यार से लिखा कि उसका पार्टनर जिंदगी के ज्यादातर मामलों में उससे बेहतर है, और यह फासला उसे हतोत्साहित नहीं करता बल्कि लगातार खुद को बेहतर बनाने के लिए उकसाता रहता है।

कभी-कभार तुलना करने वालों की असली वजह

ज्यादातर लोग हालांकि इन दोनों सांचों में पूरी तरह फिट नहीं बैठते। वे कभी-कभार ही अपने पार्टनर से तुलना करते हैं, और जब करते हैं तो दो वजहें बार-बार दिखती हैं, खुद को बेहतर समझना और पार्टनर को बेहतर समझना।

खुद को समझने के मामले में एक शख्स ने बताया कि वह अपनी मेहनत या हुनर की तुलना पार्टनर से इसलिए करता है ताकि अपनी तरक्की नाप सके, क्योंकि अकेले यह अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि वह कितना आगे बढ़ा है। मसलन कुकिंग क्लास पूरी करने वाला कोई शख्स तभी भरोसा कर पाता है कि उसने कुछ सीखा है, जब उसकी बनाई डिश को परिवार वैसी ही तारीफ दे जैसी वह हमेशा पार्टनर की रसोई को देते आए हैं।

पार्टनर को समझने के मामले में तुलना उनकी आदतों और प्रतिक्रियाओं को समझने का जरिया बन जाती है। एक महिला ने बताया कि वह अपने बचपन की तुलना पार्टनर के बचपन से करती है, और इससे उसे यह समझने में मदद मिलती है कि उसका पार्टनर उससे इतना अलग क्यों सोचता, महसूस करता और बर्ताव करता है।

जब तुलना चुभने लगे

इसका मतलब यह नहीं कि तुलना कभी चुभती नहीं। कोई भी मां-बाप यह नहीं सुनना चाहता कि बच्चे को दूसरा वाला मां या बाप ज्यादा पसंद है, और किसी नवविवाहित को यह सवाल अच्छा नहीं लगता कि उसने इतना अच्छा जीवनसाथी कैसे पा लिया। ज्यादातर मामलों में यह तुलना खुद मांगी हुई भी नहीं होती, दूसरे लोग इसे थोप देते हैं, और शायद इसीलिए यह पुरानी कहावत कई जोड़ों पर सटीक बैठती है कि तुलना खुशी चुरा लेती है।

तुलना एक औजार है, दुश्मन नहीं

फिर भी पार्टनर के बीच होने वाली तुलना का असर सिर्फ भावनात्मक नहीं है। यह रिश्ते के भीतर काम की चीज भी साबित होती है। यह जोड़ों को यह आंकने में मदद करती है कि घर के काम बराबरी से बंटे हैं या नहीं, और यह असल फैसलों में भी काम आती है, जैसे कौन कौन सी जिम्मेदारी संभालेगा। यह इंसान को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है, और दोनों पार्टनर को खुद के और एक-दूसरे के बारे में ईमानदार सच सिखाती है।

यानी अपने पार्टनर से खुद की तुलना करना जरूरी नहीं कि रिश्ते में कुछ गड़बड़ होने का इशारा हो। सही मात्रा में इस्तेमाल की जाए तो यह साझा जिंदगी को समझने के एक दिशासूचक यंत्र की तरह काम करती है। खतरा सिर्फ तब पैदा होता है जब इसे बेलगाम छोड़ दिया जाए और यह आत्मसम्मान या भरोसे को कमजोर करने लगे, न कि सिर्फ उसकी जानकारी देने तक सीमित रहे।

सवाल-जवाब

पार्टनर के बीच होने वाली तुलना के कितने प्रकार होते हैं?
दो प्रकार होते हैं, काबिलियत आधारित तुलना यानी कौन किस काम में बेहतर है, और राय आधारित तुलना यानी किसकी राय पर भरोसा किया जाए।
काबिलियत वाली तुलना सबसे ज्यादा कौन करता है?
कम उम्र के लोग, कम आत्मसम्मान वाले लोग और नए, कम संतुष्ट रिश्तों में रहने वाले लोग यह तुलना सबसे ज्यादा करते हैं।
राय वाली तुलना किसमें ज्यादा देखी गई?
यह तुलना लंबे और ज्यादा खुशहाल रिश्तों में रहने वाले लोगों में ज्यादा देखी गई।
सर्वे में कितने लोग शामिल थे?
अमेरिका में रोमांटिक रिश्तों में मौजूद 1,100 से ज्यादा वयस्कों पर सर्वे किया गया।
क्या पार्टनर से तुलना करना हमेशा बुरा होता है?
नहीं, यह रिश्ते में बराबरी आंकने, फैसले लेने और खुद व पार्टनर को बेहतर समझने में मदद कर सकती है, बशर्ते यह आत्मसम्मान को नुकसान न पहुंचाए।
क्या सर्वे में समलैंगिक जोड़े भी शामिल थे?
हां, पुरुषों के साथ रिश्ते में रह रहे पुरुषों ने सबसे ज्यादा काबिलियत वाली तुलना की बात कही, लेकिन इस समूह में सिर्फ 37 लोग शामिल होने से यह नतीजा एहतियात के साथ लिया जाना चाहिए।
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