अगर आपकी जन्म तारीख किसी भी महीने की 7, 16 या 25 है, तो अंक ज्योतिष में आपका मूलांक 7 माना जाता है और इस मूलांक के जातकों पर केतु ग्रह का सीधा प्रभाव रहता है। न्यूमेरोलॉजी के मुताबिक ऐसे लोग स्वभाव से बेहद शांत और गहराई से सोचने वाले होते हैं, इनका नजरिया अक्सर काफी चिंतनशील और गंभीर होता है। लेकिन केतु की ऊर्जा के चलते इनमें कुछ खास कमजोरियां भी पाई जाती हैं, जो अगर समय रहते ना समझी जाएं तो इनकी निजी और सामाजिक जिंदगी में उलझनें खड़ी कर सकती हैं।
छोटी बातों को बार-बार सोचने की आदत
मूलांक 7 वालों की सबसे बड़ी दिक्कत है उनका बार-बार सोचने यानी ओवरथिंकिंग करने का स्वभाव। ये लोग छोटी से छोटी बात को भी अपने दिमाग में कई-कई बार दोहराते रहते हैं और उसे आसानी से भुला नहीं पाते। पुरानी घटनाएं और बीती बातें भी इनके जेहन में लंबे समय तक घूमती रहती हैं, जिसकी वजह से इनका तनाव और बेचैनी लगातार बढ़ती रहती है। न्यूमेरोलॉजी के अनुसार, ऐसे जातकों को अपने मन को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए, वरना यही आदत आगे चलकर बड़ी मानसिक परेशानी का रूप ले सकती है।
अकेलापन पसंद करना और भावनाएं छुपाना
अंक ज्योतिष के मुताबिक मूलांक 7 वालों को अकेले रहने की आदत बहुत ज्यादा होती है। ये लोग अक्सर अपनी अलग दुनिया में रहना पसंद करते हैं और भीड़भाड़ या सामाजिक मेलजोल से दूरी बनाकर रखते हैं। दूसरों के साथ आसानी से घुलते मिलते नहीं, इसी वजह से कई बार लोग इनके शांत और चुप स्वभाव को गलत समझ बैठते हैं। केतु की ऊर्जा के असर से ये अपनी भावनाओं को खुलकर सामने रखने में भी हिचकिचाते हैं, जिसकी वजह से निजी और पेशेवर दोनों तरह के रिश्तों में गलतफहमियां पैदा होने लगती हैं। न्यूमेरोलॉजी कहती है कि अगर ये लोग खुलकर बातचीत करने की आदत डाल लें, तो इनकी ज्यादातर मुश्किलें अपने आप कम हो जाएंगी।
मन की शांति के लिए क्या करें
न्यूमेरोलॉजी के अनुसार मूलांक 7 वालों को मानसिक शांति और भीतरी संतुलन पाने के लिए भगवान गणेश की नियमित पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके साथ ही ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का नियमित जाप करना भी इनके लिए लाभकारी बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय से केतु की नकारात्मक ऊर्जा का असर कम होता है और जातकों को मानसिक स्थिरता, शांति और स्पष्टता के साथ अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीने में मदद मिलती है।


















