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सावन में 18 अगस्त को रखा जाएगा तीसरा व्रत, जानें मंगला गौरी पूजा के नियमधर्म
18 अग॰ 2026, 12:27 am (1 घंटे पहले)· 3

सावन में 18 अगस्त को रखा जाएगा तीसरा व्रत, जानें मंगला गौरी पूजा के नियम

सावन के तीसरे मंगलवार यानी 18 अगस्त 2026 को मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा, जिसमें देवी पार्वती की पूजा होकर वैवाहिक सुख-सौभाग्य की कामना की जाती है।

सावन के महीने में पड़ने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है, जिसमें माता पार्वती यानी देवी गौरी की पूजा की जाती है। इसे मोराकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है और इस सीजन का तीसरा व्रत 18 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। सावन जैसे पवित्र महीने में हर मंगलवार का अपना अलग धार्मिक महत्व माना गया है, इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा से जुड़े नियमों को लेकर खासा सतर्क रहती हैं और छोटी-छोटी गलतियों से भी बचने की कोशिश करती हैं।

शास्त्रों में क्यों खास मानी गई है यह पूजा

पुराणों के मुताबिक भगवान शिव और माता पार्वती को सावन का महीना बेहद प्रिय है, यही वजह है कि इस महीने सोमवार को शिव जी की और मंगलवार को देवी गौरी की आराधना को शास्त्रों में बहुत शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता है कि मंगला गौरी का व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मिठास बनी रहती है, वैवाहिक रिश्ते मजबूत होते हैं और महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं हर साल इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियम-निष्ठा के साथ करती हैं।

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व्रत के दिन इन गलतियों से बचें

अगर आप मंगला गौरी का व्रत रख रही हैं तो कुछ बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है, वरना पूजा का असर अधूरा रह सकता है।

  • गुस्सा न करें और किसी से बहस या झगड़ा न करें, ऐसा माना जाता है कि इससे व्रत खंडित हो सकता है।
  • घर के बड़े-बुजुर्गों का अनादर न करें, नहीं तो व्रत का पूरा पुण्य फल नहीं मिलता।
  • किसी के लिए भी कठोर या अपशब्द न बोलें, वाणी में मिठास बनाए रखना इस दिन जरूरी माना गया है।
  • काले, गहरे नीले या स्लेटी रंग के कपड़ों से दूरी बनाएं, क्योंकि पूजा-पाठ में इन रंगों को अशुभ माना जाता है।
  • सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार पूरा करके ही पूजा में बैठना चाहिए, सिंदूर और बिंदी लगाना बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि अधूरे श्रृंगार में की गई पूजा शुभ नहीं मानी जाती।

थाली से बाहर रखें ये चीजें

खान-पान को लेकर भी इस व्रत में काफी सख्त नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना व्रत की पूर्णता के लिए जरूरी समझा जाता है।

  • गेहूं और चावल से बनी चीजें इस दिन वर्जित मानी जाती हैं।
  • तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
  • खाने में रोजमर्रा वाले सफेद नमक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • फलाहार बनाते समय हल्दी और सरसों तेल से बचना चाहिए, इसकी जगह देसी घी या मूंगफली तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इस दिन घर की रसोई में प्याज और लहसुन का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें भी तामसिक श्रेणी में गिना जाता है।

व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं

तो सवाल उठता है कि आखिर इस दिन खाया क्या जाए। दरअसल इस दिन सिर्फ सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए, जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखता है।

  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से पूड़ी या पराठा बनाया जा सकता है, साथ ही आलू, लौकी और कद्दू की सब्जी भी खाई जा सकती है।
  • नमक के तौर पर साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करना ठीक रहता है।
  • साबूदाने की खिचड़ी या खीर भी बनाई जा सकती है।
  • सेब, केला, पपीता जैसे मौसमी फल भी फलाहार में शामिल किए जा सकते हैं, जिससे व्रत के दौरान ऊर्जा भी बनी रहती है।

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

सवाल-जवाब

तीसरा मंगला गौरी व्रत कब रखा जाएगा?
18 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा।
मंगला गौरी व्रत में किसकी पूजा की जाती है?
इस व्रत में माता गौरी यानी पार्वती जी की पूजा की जाती है।
मंगला गौरी व्रत का दूसरा नाम क्या है?
इसे मोराकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
व्रत के दिन कौन से रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए?
काले, गहरे नीले या स्लेटी रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि ये रंग पूजा में अशुभ माने जाते हैं।
व्रत में अनाज के तौर पर क्या खाया जा सकता है?
गेहूं और चावल की जगह कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी पूड़ी-पराठा और साबूदाने की खिचड़ी या खीर खाई जा सकती है।
फलाहार बनाते समय कौन सा तेल इस्तेमाल करना चाहिए?
हल्दी और सरसों तेल की जगह देसी घी या मूंगफली तेल इस्तेमाल करना बेहतर माना गया है।
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