वैवाहिक बंधन का अर्थ प्यार और साथ से जुड़ा होता है। जब दो अलग स्वभाव के लोग एक ही छत के नीचे जीवन बिताना शुरू करते हैं, तो उनका पूरा संसार एक-दूसरे के इर्द-गिर्द सिमट जाता है। शुरुआती दौर में हर पल जीवनसाथी के साथ बिताना बेहद सुखद अनुभव होता है, परंतु समय बीतने के साथ यह दिनचर्या काफी थकाने वाली साबित होने लगती है। एक सफल और प्रसन्न वैवाहिक जीवन की गाड़ी को सुचारू रूप से चलाने के लिए जितना महत्व साझा पलों का है, उतना ही महत्व व्यक्तिगत समय यानी मी टाइम का भी माना गया है।
आम तौर पर लोगों के मन में यह गलत धारणा घर कर जाती है कि जीवनसाथी से थोड़ी दूरी बनाने से आपसी संबंधों में दूरियां बढ़ने लगती हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जब कोई व्यक्ति अपने लिए समय निकालता है, तो उसका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और दिमाग तरोताजा महसूस करता है। हर वक्त एक साथ चिपके रहने की वजह से कई बार मामूली बातों पर भी मानसिक घुटन महसूस होने लगती है। ऐसे हालात में कुछ घंटों का अंतराल मूड को तरोताजा रखता है और तनाव को कोसों दूर भगाता है।
व्यक्तिगत समय के दौरान इंसान अपनी मनपसंद पुस्तकें पढ़ सकता है, अपनी किसी पुरानी हॉबी को दोबारा जिंदा कर सकता है, मित्रों से मेलजोल बढ़ा सकता है या फिर बिना किसी शोरगुल के एकांत में शांति के कुछ पल बिता सकता है। इन गतिविधियों से व्यक्ति का आत्मविश्वास मजबूत होता है। जब इंसान भीतर से प्रसन्न और शांत महसूस करता है, तो वह अपने पार्टनर के साथ भी अधिक सकारात्मकता से पेश आता है। इसके बाद घर और रिश्ते की तमाम जिम्मेदारियां बोझ नहीं बल्कि खुशी का जरिया बन जाती हैं।
आपसी रिश्तों में थोड़ी सी दूरी बनाए रखना उनमें नयापन और ताजगी बरकरार रखता है। जब दोनों लोग कुछ वक्त के लिए एक-दूसरे से अलग रहते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे की अहमियत का अहसास और गहराई से होता है। बातचीत करने के लिए नए विषय मिलते हैं और आपसी स्नेह जीवंत बना रहता है। इस बात का अर्थ कदापि यह नहीं है कि कोई अपने साथी से दूर भाग रहा है, बल्कि इसका सीधा मतलब यह है कि दोनों एक-दूसरे की पर्सनल स्पेस का सम्मान कर रहे हैं।
यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मी टाइम की मांग करना किसी भी प्रकार का स्वार्थ नहीं है, बल्कि यह आपसी रिश्ते को दीर्घायु और मजबूत बनाने की एक बेहतरीन कला है। जब इंसान खुद की देखभाल करना सीख जाता है, तभी वह अपने साथी को भी सही मायनों में बेहतर प्यार दे सकता है। इसलिए वैवाहिक जीवन में संतुलन स्थापित करने के लिए खुद को भी थोड़ा समय अवश्य देना चाहिए।
























