उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में आकार ले रहा देश का पहला इंटीग्रेटेड बायोप्लास्टिक प्लांट, हजारों करोड़ के निवेश से बदलेंगी स्थानीय तस्वीरेंअसम के श्रीभूमि जिले में बिहू कलाकारों पर हुए हमले में 17 लोग गिरफ्तारअयोध्या के दसवें दीपोत्सव को अलौकिक बनाने में जुटे 60 कारीगर, रोशनी से सजेगी पूरी रामनगरीमथुरा में देवरहा बाबा घाट पर बनेगा छठा क्रूज स्टेशन, एक करोड़ रुपये की लागत से संवरेगा जलमार्गसफेद बालों को प्राकृतिक रूप से गहरा काला करने के लिए अपनाएं इंडिगो पाउडर का नुस्खा31 दिसंबर 2026 तक रिटायर होंगे 18 हजार से अधिक अग्निवीर, जानिए कहां मिलेगी सीधी सरकारी नौकरीईरान और अमेरिका में तनाव गहराया, तेहरान में मक्का पैक्ट के देशों की बड़ी बैठकअंतरिक्ष में चीन का नया कदम, इंटरनेट सैटेलाइट्स की ताजा खेप सफलतापूर्वक लॉन्चगैजेट्स की जगह किताबों से भरी अलमारियां, असिन और राहुल शर्मा ऐसे संवार रहे हैं अपनी बेटी का बचपनब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा की जीत पर पिनराई विजयन ने भरी हुंकार, वामपंथ की ताकत पर दिया जोर
रिश्तों की खातिर जान गंवाने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं, जानिए क्या है इसके पीछे का सचरिश्ते
26 अक्तू॰ 2026, 3:27 pm (53 मिनट पहले)· 0

रिश्तों की खातिर जान गंवाने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं, जानिए क्या है इसके पीछे का सच

रिश्तों में तनाव और शादी को लेकर उपजे विवाद के चलते जान देने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हैदराबाद की एक घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लोग प्यार में असफल होने पर अपनी अनमोल जिंदगी को क्यों खत्म कर लेते हैं।

हैदराबाद में एक एमएनसी में सीनियर एसोसिएट के तौर पर काम करने वाली अर्चना चौधरी मलिक के कदम ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। उत्तराखंड के रहने वाले सहकर्मी भंडारी विमल के साथ उसका पिछले करीब चार साल से प्रेम संबंध चल रहा था। शुरुआती जानकारियों के अनुसार, विमल पहले से ही वैवाहिक बंधन में बंधा हुआ था और अदालत में उसका तलाक का मामला चल रहा था। घटना की रात करीब 2:30 बजे अर्चना ने अपने इसी सहकर्मी को एक वीडियो कॉल की थी। उस समय विमल अपनी मां के साथ किसी अन्य कार्यक्रम में व्यस्त था। बातचीत के दौरान ही अर्चना ने छत के पंखे से दुपट्टा लटका हुआ दिखाया और चेतावनी दी कि अगर उसने शादी नहीं की तो वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर देगी।

वीडियो कॉल के बाद सामने आया खौफनाक सच

स्क्रीन पर मिली इस गंभीर चेतावनी के बाद वह सहकर्मी अगली सुबह करीब 5:30 बजे सीधे उसके अपार्टमेंट पर जा पहुंचा। हालांकि, वहां पहुंचने पर मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक मिला। काफी देर तक खटखटाने और कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उसने तुरंत आपातकालीन नंबर डायल 112 पर कॉल करके पुलिस को स्थिति से अवगत कराया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब किसी तरह दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। अर्चना का शव उसी छत के पंखे से लटकता हुआ मिला जिसे उसने वीडियो कॉल के दौरान दिखाया था।

ये भी पढ़ें

क्यों बिखर जाती है जिंदगी की डोर

इस तरह की दिल दहलाने वाली घटनाएं समाज में आए दिन देखने को मिलती हैं। प्रेम, मोह, तकरार और फिर चरम कदम उठा लेने की ये स्थितियां मन में एक गहरा और गंभीर प्रश्न छोड़ जाती हैं। आखिर क्यों कुछ लोग किसी रिश्ते के खातिर अपनी अमूल्य जिंदगी से इस तरह हार मान बैठते हैं? क्या किसी के जीवन से चले जाने या विवाह से मना कर देने पर जीने की सारी उम्मीदें सचमुच समाप्त हो जाती हैं? क्यों इस दौर के युवाओं का अपनी खुद की सांसों से मोहभंग होता जा रहा है?

आधुनिक जीवनशैली और मानसिक दबाव

वर्तमान दौर भौतिक सुख-सुविधाओं, शोहरत, धन और स्वतंत्रता का तो है, लेकिन इसके साथ ही यह एकाकीपन, मानसिक तनाव और हर पल किसी अपने के बिछड़ जाने के डर को भी साथ लेकर आया है। इसे मौजूदा दौर की बड़ी समस्या कहा जा सकता है। अकेलापन, पीछे छूट जाने का डर और किसी का साथ न मिलने की निराशा आज हर किसी को भीतर से कमजोर कर रही है। विशेष तौर पर बीस से तीस वर्ष की आयु के युवाओं में इस तरह की प्रवृत्ति बहुत अधिक देखने को मिल रही है। आज की युवा पीढ़ी या तो प्रेम और प्रतिबद्धता के मामलों में अत्यधिक परिपक्व हो चुकी है या फिर उनका भावनात्मक लगाव इतना गहरा है कि मनमुताबिक परिणाम न मिलने पर वे अपनी जान देने तक को तैयार हो जाते हैं।

मनोविज्ञान की नजर में रिश्तों का बोझ

मनोचिकित्सकों का मानना है कि जब कोई इंसान किसी खास रिश्ते को ही अपनी संपूर्ण दुनिया मान बैठਦਾ है, तो उस रिश्ते में दरार आते ही उसका पूरा वजूद खतरे में महसूस होने लगता है। इंसान का मस्तिष्क इस बात को स्वीकार करने से इनकार कर देता है कि उस विशेष व्यक्ति के बिना भी एक सुंदर और जीवंत दुनिया हो सकती है। अर्चना चौधरी के इस हृदयविदारक प्रकरण में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। एकतरफा उम्मीदों, शादी के लिए लगातार बनाए जा रहे दबाव और संवाद में आई कमी ने उसे धीरे-धीरे इस कदर मानसिक अवसाद में धकेल दिया कि उसने मौत को गले लगा लिया।

शिक्षा और जीवन कौशल की कमी

ऐसी दुखद घटनाएं हमारे सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। हम शिक्षा प्रणाली और करियर की दौड़ में आगे बढ़ना तो सीख गए हैं, लेकिन जब कभी जिंदगी की इस लंबी दौड़ में असफलता हाथ लगे, तो उस भारी दबाव और भावनात्मक उथल-पुथल को कैसे नियंत्रित किया जाए, यह हम नहीं सीख पा रहे हैं। यह बात जितनी जल्दी समझी जाए उतना बेहतर है कि जीवन का सफर किसी एक पड़ाव पर आकर नहीं रुकता।

मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना क्यों जरूरी है

हम सभी ने यह कहावत तो बचपन से सुनी होगी कि जान है तो जहान है। परंतु जब कोई व्यक्ति अत्यधिक मानसिक तनाव या गहरे अवसाद के दौर से गुजर रहा होता है, तो उसे ये बातें केवल किताबी और फालतू की बातें लग सकती हैं। ऐसे कठिन समय में यह बेहद आवश्यक हो जाता है कि हम अपने जीवन शैली में कुछ सकारात्मक बदलावों को जगह दें और खुद को संभालें।

अपनी भावनाओं को खुलकर साझा करें

जब कभी मन में घुटन बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो उसे अपने तक सीमित रखने की भूल बिल्कुल न करें। अपनी इस स्थिति के बारे में अपने परिवार के किसी सदस्य, किसी भरोसेमंद मित्र या फिर किसी पेशेवर काउंसलर से खुलकर बातचीत करें। अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब हम अपना दर्द किसी अपने के आगे व्यक्त करते हैं, तो मन का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है और राहत महसूस होती है।

अपनी स्वतंत्र पहचान को बनाए रखें

अपनी व्यक्तिगत पहचान को केवल किसी अन्य व्यक्ति की प्रेमिका, पत्नी या पार्टनर होने तक सीमित न रखें। आप अपने आप में एक पूर्ण और स्वतंत्र इंसान हैं, आपके अपने सपने हैं और आपकी अपनी विशिष्ट क्षमताएं हैं। अपने करियर, अपनी पसंदीदा हॉबी और अपने परिवार के सदस्यों को हमेशा अपनी प्राथमिकताओं की सूची में सबसे ऊपर रखें।

वक्त के साथ हर घाव भर जाता है

दर्द चाहे कितना भी तीव्र और गहरा क्यों न हो, समय के बीतने के साथ उसका प्रभाव कम जरूर होता है। जिस बात या घटना पर आज आपको रोना आ रहा है, कल उसी परिस्थिति से उबरकर मुस्कुराने की शक्ति भी आपके अपने भीतर से ही आएगी। बस आवश्यकता इस बात की है कि आप खुद को थोड़ा सा वक्त दें और इस कठिन दौर को गुजर जाने दें।

जिंदगी हर रिश्ते से बढ़कर है

यह हमेशा याद रखना चाहिए कि रिश्ते हमारी जिंदगी का एक हिस्सा भर हैं, वे पूरी जिंदगी नहीं हो सकते। यदि कोई इंसान आपकी जिंदगी में साथ नहीं रहना चाहता, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि दुनिया में आपकी कोई अहमियत नहीं बची है। आप खुद अपनी कहानी के नायक हैं, इसलिए किसी दूसरे के उठाए गए कदम को अपनी पूरी जिंदगी का अंत कभी मत बनने दीजिए।

समय रहते मदद लेना है जरूरी

यदि आप या आपके आसपास का कोई भी परिचित कभी ऐसे दौर से गुजर रहा हो जहां उसे सब कुछ समाप्त होता हुआ दिखाई दे रहा हो, तो बिना देर किए तुरंत सहायता लें। अपने चाहने वालों का साथ दें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और उन्हें इस बात का पूरा अहसास कराएं कि वे इस दुनिया में अकेले नहीं हैं। समाज और अपनों का संबल ही किसी को अंधेरे से बाहर निकाल सकता है।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां घटी?
यह घटना हैदराबाद में घटी जहां एक एमएनसी में काम करने वाली महिला ने अपने सहकर्मी को वीडियो कॉल करके जान देने की धमकी दी।
अर्चना चौधरी किस पद पर कार्यरत थीं?
अर्चना चौधरी हैदराबाद की एक एमएनसी में सीनियर एसोसिएट के रूप में काम कर रही थीं।
सहकर्मी का क्या नाम था?
अर्चना के सहकर्मी का नाम भंडारी विमल था जो उत्तराखंड का रहने वाला था।
घटना की सूचना पुलिस को किसने दी?
सुबह दरवाजा न खुलने पर सहकर्मी ने डायल 112 के जरिए पुलिस को इस बात की सूचना दी थी।
मनोवैज्ञानिक ऐसे मामलों में क्या सलाह देते हैं?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अपनी भावनाओं को खुलकर साझा करना चाहिए और अपनी पहचान को किसी एक रिश्ते से नहीं जोड़ना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp