अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने गठन के बाद पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति करने जा रहा है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पद सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि महिलाओं के लिए भी बराबर मौका दिया गया है, यानी मंदिर ट्रस्ट को उसकी पहली महिला CEO भी मिल सकती है. यह फैसला राम मंदिर में दान की राशि चोरी होने से जुड़े विवाद के बीच सामने आया है.
पहली बार क्यों बनाया जा रहा है CEO का पद
अब तक राम मंदिर ट्रस्ट का रोजमर्रा का कामकाज सीधे ट्रस्टियों और मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के जरिए संभाला जाता रहा है, लेकिन मंदिर परिसर बड़ा होने और व्यवस्थाओं के लगातार बढ़ने के बाद ट्रस्ट ने महसूस किया कि एक पूर्णकालिक CEO की जरूरत है जो पूरे प्रशासन की निगरानी कर सके. खबरों के मुताबिक, नया CEO मंदिर से जुड़े करीब 2500 कर्मचारियों की टीम की जिम्मेदारी संभालेगा और उसे मंदिर प्रबंधन से जुड़े नए अधिकार भी दिए जाएंगे.
CEO चुनने की प्रक्रिया कैसे होगी
CEO के चयन के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यों की एक समिति बनाई है. इस समिति से उम्मीद है कि वह अगले 30 दिनों के भीतर चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर लेगी और नए CEO के नाम का एलान कर देगी. खबरों के मुताबिक सिर्फ ऊंची डिग्री होना ही काफी नहीं होगा, उम्मीदवार को लेकर कुछ और अहम शर्तें भी रखी गई हैं. चयन समिति के एक सदस्य ने कहा कि ट्रस्ट का CEO राम भक्त होना जरूरी है, क्योंकि यह सवाल सीधे जनता के भरोसे से जुड़ा है.
दान चोरी विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब राम मंदिर में दान की राशि से जुड़ा विवाद पहले से ही चर्चा में है. ऐसे में नए CEO पद पर निगरानी और पारदर्शिता से जुड़ी जिम्मेदारी की उम्मीद और बढ़ जाती है. यह खबर लगातार अपडेट हो रही है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, तस्वीर और साफ होती जाएगी.











