अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर इस समय एक नई चर्चा के केंद्र में है। एक तरफ मंदिर परिसर में चंदा चोरी जैसे गंभीर मामलों की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी तरफ साधु-संतों के एक वर्ग ने मंदिर में एक मुख्य पुजारी की नियुक्ति की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संतों का मानना है कि मंदिर की प्राचीन परंपराओं और दैनिक धार्मिक क्रियाकलापों को सही दिशा देने के लिए इस पद का होना बेहद अनिवार्य है। फिलहाल यह पद आचार्य सत्येंद्र दास महाराज के निधन के बाद से खाली पड़ा है, जिसके चलते संतों में असंतोष की स्थिति देखी जा रही है।
धार्मिक अनुशासनों में मुख्य पुजारी का महत्व
राम कचहरी स्थित चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी मठ या प्रमुख धार्मिक स्थल पर मुख्य पुजारी की उपस्थिति सनातन परंपरा का एक अभिन्न अंग रही है। महंत के अनुसार, मुख्य पुजारी का दायित्व केवल स्वयं पूजा अर्चना करना ही नहीं होता, बल्कि वह अन्य पुजारियों का मार्गदर्शन भी करता है। धार्मिक अनुशासन को बनाए रखने और पूजा-पाठ की व्यवस्थाओं में सामंजस्य स्थापित करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
प्रशासनिक और धार्मिक समन्वय की जरूरत
महंत शशिकांत दास ने आगे स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि जैसा विश्व विख्यात मंदिर इस परंपरा से अछूता नहीं रह सकता। भले ही वहां वर्तमान में कई पुजारी अपनी सेवाएं दे रहे हों, लेकिन उनके कार्यों में समन्वय बिठाने के लिए एक प्रमुख नेतृत्व की आवश्यकता बनी रहती है। यदि धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कोई त्रुटि होती है, या किसी धार्मिक प्रक्रिया को लेकर कोई मतभेद उत्पन्न होता है, तो ऐसी स्थिति में जवाबदेही तय करने वाला और समाधान प्रदान करने वाला कोई अनुभवी व्यक्ति होना जरूरी है। बिना मुख्य पुजारी के इन कार्यों का सुचारू संचालन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ट्रस्ट से नियुक्ति की अपील
आचार्य सत्येंद्र दास महाराज के जाने के बाद रिक्त हुए इस पद को लेकर संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है। महंत का मानना है कि वर्तमान में भले ही ट्रस्ट के पदाधिकारी अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे हों, लेकिन धार्मिक मामलों में एक विद्वान और अनुभवी संत का नेतृत्व ही व्यवस्था को व्यवस्थित, अनुशासित और पारदर्शी बना सकता है। संतों ने ट्रस्ट से अपील की है कि वे सनातन परंपराओं का सम्मान करते हुए जल्द ही एक योग्य व्यक्ति का चयन करें, ताकि श्रीराम मंदिर की पूजन पद्धति और परंपराओं में एकरूपता और निरंतरता बनी रहे।











