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घर में मां लक्ष्मी का वास चाहिए तो चाणक्य की ये तीन बातें गांठ बांध लेंअध्यात्म
10 जुल॰ 2026, 1:31 pm (111 दिन पहले)· 2

घर में मां लक्ष्मी का वास चाहिए तो चाणक्य की ये तीन बातें गांठ बांध लें

चाणक्य नीति के तीसरे अध्याय के 21वें श्लोक में बताया गया है कि किन आदतों से घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक तंगी दूर रहती है.

अर्थशास्त्र और राजनीति के लिए मशहूर आचार्य चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है और उन्होंने अपनी किताब चाणक्य नीति में जीवन जीने के तमाम व्यावहारिक सूत्र दिए हैं. इसी किताब में उन आम गलतियों का भी जिक्र मिलता है, जो घर में आर्थिक तंगी की जड़ बन जाती हैं. चाणक्य का मानना था कि घर के भीतर की छोटी-छोटी लापरवाहियां ही धीरे-धीरे गरीबी और पैसों की किल्लत को बुलावा देती हैं. लेकिन उन्होंने कुछ आसान उपाय भी बताए, जिन्हें अपनाने पर घर में माता लक्ष्मी खुद चलकर आती हैं और पैसों से जुड़ी दिक्कतें दूर होने लगती हैं.

चाणक्य नीति के तीसरे अध्याय का वह श्लोक

चाणक्य नीति के तीसरे अध्याय के 21वें श्लोक में तीन ऐसी बातों का जिक्र है, जिनसे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. श्लोक के मुताबिक, देवी लक्ष्मी हमेशा उसी घर में रहना पसंद करती हैं, जहां मूर्खों की पूजा या खुशामद नहीं होती, जहां भोजन का सम्मान किया जाता है और अनाज को संभालकर रखा जाता है, और जहां पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और किसी तरह की कलह नहीं होती.

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मूर्खों से दूरी, समझदारों का साथ जरूरी

आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक को समझाते हुए कहा कि जो लोग मूर्खों के मुकाबले अच्छे और समझदार लोगों को ज्यादा सम्मान देते हैं, उन्हें कभी पैसों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता. उनके मुताबिक जो व्यक्ति ज्यादातर वक्त मूर्खों की संगत में बिताता है, उसका सोचने और व्यवहार करने का तरीका भी वैसा ही होने लगता है. वहीं अगर कोई व्यक्ति समझदार और सम्मानित लोगों के बीच रहता है और उनकी इज्जत करता है, तो उसे ज्ञान की कई ऐसी बातें सीखने को मिलती हैं, जो आगे चलकर उसके लिए फायदेमंद साबित होती हैं. यानी संगत का सीधा असर इंसान की सोच और उसकी आर्थिक स्थिति दोनों पर पड़ता है.

भोजन और अनाज का सम्मान क्यों जरूरी

नीति में आगे बताया गया है कि जिन घरों में भोजन का सम्मान किया जाता है, वहां देवी-देवताओं की कृपा हमेशा बनी रहती है. चाणक्य के मुताबिक हर इंसान को ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उसे खाना नसीब हो रहा है, जबकि दुनिया में बहुत से लोगों को यह नसीब भी नहीं होता. इसी वजह से भोजन को कभी बर्बाद नहीं करना चाहिए और उसका पूरा सम्मान करना चाहिए. इसके अलावा जो लोग अपने घरों में तरह-तरह के अनाज का भंडारण करके रखते हैं, वे जीवन में सुख और समृद्धि का अनुभव करते हैं. यानी अनाज की उपलब्धता को हल्के में लेना चाणक्य के मुताबिक सही नहीं है, क्योंकि यह सीधे घर की खुशहाली से जुड़ा है.

पति-पत्नी के प्रेम पर टिका है लक्ष्मी का वास

चाणक्य नीति के मुताबिक जिस घर में पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और कोई कलह नहीं होती, वहां देवी लक्ष्मी का हमेशा वास रहता है. जब घर में पति-पत्नी प्रेम से रहते हैं, तो वहां एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जो हर तरह के दोष दूर कर देती है, क्योंकि प्रेम से बड़ी कोई ताकत नहीं होती. इसके उलट, जिस घर में हमेशा कलह और झगड़ा बना रहता है, वहां माता लक्ष्मी कभी नहीं टिकतीं और घरवालों की तरक्की भी रुक जाती है. चाणक्य के अनुसार देवी लक्ष्मी हमेशा उन्हीं घरों में आती हैं, जहां शांति का माहौल लगातार बना रहता है और वहां रहने वाले लोग तनाव से मुक्त होते हैं. यही वजह है कि रिश्तों का सम्मान करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए.

लक्ष्मी को चंचल क्यों कहा गया है

आचार्य चाणक्य के मुताबिक देवी लक्ष्मी के जिन नामों का जिक्र मिलता है, उनमें से एक नाम चंचल भी है, क्योंकि एक ही जगह टिके रहना उनका स्वभाव नहीं माना जाता. लेकिन एक बार जब देवी लक्ष्मी किसी घर में प्रवेश कर जाती हैं, तो वह अपनी मर्जी से वहां से नहीं जातीं. इसी वजह से चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति संतुष्ट और संतोषी स्वभाव का होता है, उसे अलग से देवी लक्ष्मी की पूजा करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि वह खुद ब खुद उसके घर और परिवार में निवास करने लगती हैं.

सवाल-जवाब

यह बात चाणक्य नीति के किस अध्याय और श्लोक में कही गई है?
यह बात चाणक्य नीति के तीसरे अध्याय के 21वें श्लोक में बताई गई है.
देवी लक्ष्मी किस तरह के घर में रहना पसंद करती हैं?
जहां मूर्खों की पूजा नहीं होती, भोजन और अनाज का सम्मान किया जाता है, और पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है, वहां देवी लक्ष्मी का वास होता है.
मूर्खों की संगत का इंसान पर क्या असर पड़ता है, चाणक्य के मुताबिक?
चाणक्य के मुताबिक जो व्यक्ति ज्यादातर समय मूर्खों की संगत में बिताता है, उसका सोचने और व्यवहार करने का तरीका भी वैसा ही हो जाता है.
घर में अनाज का भंडारण करना क्यों जरूरी बताया गया है?
जो लोग अपने घरों में तरह-तरह के अनाज का भंडारण करके रखते हैं, वे जीवन में सुख और समृद्धि का अनुभव करते हैं.
देवी लक्ष्मी को चंचल क्यों कहा जाता है?
क्योंकि एक ही जगह टिके रहना उनका स्वभाव नहीं माना जाता, हालांकि एक बार घर में प्रवेश करने के बाद वह अपनी मर्जी से वहां से नहीं जातीं.
पति-पत्नी के बीच कलह होने पर घर पर क्या असर पड़ता है?
चाणक्य के अनुसार जिस घर में हमेशा कलह रहता है, वहां माता लक्ष्मी कभी नहीं टिकतीं और घरवालों की तरक्की भी रुक जाती है.
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