हिंदू पंचांग में हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, दोनों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है। इस व्रत की खास बात यह है कि इसका नाम उस दिन के वार से तय होता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है। यानी अगर त्रयोदशी सोमवार को आए तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, और मंगलवार को आए तो भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। जुलाई 2026 में प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इस बार इसे रवि प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु दिन भर व्रत रखकर शाम को भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे मनचाही इच्छाओं की पूर्ति होने की मान्यता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत किस तारीख को पड़ेगा, पूजा का सबसे उत्तम समय कौनसा रहेगा और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है।
जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब पड़ेगा
पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई को सुबह 02 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी। यही तिथि उसी दिन यानी 12 जुलाई की रात 10 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। चूंकि प्रदोष व्रत का समय शाम के प्रदोष काल के हिसाब से तय किया जाता है, इसलिए जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई 2026, रविवार के दिन ही रखा जाएगा। रविवार को पड़ने की वजह से इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
रवि प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 20 मिनट से रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष काल का यही समय सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा जो श्रद्धालु सुबह जल्दी पूजा-पाठ करना पसंद करते हैं, उनके लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 42 मिनट से 5 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। वहीं दिन में शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इन तीनों मुहूर्त में से प्रदोष काल का मुहूर्त इस व्रत की पूजा के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।
रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
रवि प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की भी पूजा करने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक रखने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके साथ ही समाज में मान-सम्मान बढ़ने की भी बात कही जाती है। लंबी उम्र यानी दीर्घायु और अच्छी सेहत के लिए भी यह व्रत बेहद उत्तम माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ रवि प्रदोष का व्रत करता है, उसे पारिवारिक सुख, आत्मबल यानी मानसिक मजबूती और समाज में प्रतिष्ठा मिलती है।
जुलाई का दूसरा प्रदोष व्रत कब है
जुलाई महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 27 जुलाई को शाम 4 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। इस दूसरे प्रदोष व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 17 मिनट से रात 9 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। चूंकि यह व्रत भी रविवार को ही पड़ रहा है, इसलिए इसे भी रवि प्रदोष के नाम से जाना जाएगा।
यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, जिसकी कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।











