हरिद्वार में चातुर्मास के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोलेनाथ की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आप इस विशेष काल में हरिद्वार की पावन भूमि पर भगवान शिव के पौराणिक मंदिरों के दर्शन और पूजा करते हैं, तो आपको अनंत और अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। हरिद्वार को पौराणिक ग्रंथों में हर द्वार यानी भगवान शिव का प्रवेश द्वार कहा गया है। स्कंद पुराण और शिव पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस नगरी को महादेव की प्रिय स्थली बताया गया है, जहां स्थित कई सिद्ध पीठ और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले माने जाते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास की पूरी अवधि में भगवान शिव सृष्टि का संचालन और नियंत्रण अपने हाथों में रखते हैं, इसीलिए इन चार महीनों में की गई उनकी पूजा का फल कई गुना अधिक हो जाता है।
हरिद्वार के पौराणिक शिव स्थलों का महत्व
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, हरिद्वार न केवल गंगा का मायका है, बल्कि यह भगवान शिव की ससुराल भी है। कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। पंडित श्रीधर शास्त्री का कहना है कि चातुर्मास के दौरान शिव जी की उपासना, उनके मंत्रों का जाप और स्तोत्रों का पाठ करने से भक्त अपनी सभी इच्छाओं की पूर्ति कर सकते हैं। सृष्टि के संचालन का दायित्व संभाल रहे भोलेनाथ को दक्षेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, जौ और तिल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि भगवान शिव की विशेष कृपा का मार्ग भी खोलता है।
प्रमुख मंदिरों की सूची और उनकी महिमा
पंडित श्रीधर शास्त्री ने धर्मग्रंथों में वर्णित उन विशेष स्थलों का उल्लेख किया है जो हरिद्वार की आध्यात्मिक आभा को बढ़ाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से कनखल का दक्षेश्वर महादेव मंदिर, नील पर्वत पर स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर और उसी पर्वत की तलहटी में बना गौरी शंकर महादेव मंदिर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हरिद्वार नजीबाबाद मार्ग पर स्थित कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर का भी अपना महत्व है। कनखल में गंगा तट पर स्थित तिलभांडेश्वर महादेव, दरिद्र भंजन महादेव और दुख भंजन महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा के केंद्र हैं। साथ ही बिल्व पर्वत पर विल्वकेश्वर महादेव और हर की पौड़ी के निकट भीमगोडा में स्थित भीमेश्वर महादेव मंदिर का वर्णन भी पुराणों में मिलता है। चातुर्मास में इन मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना करने से जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है और भक्त को शिव कृपा की प्राप्ति होती है।











