गणपति की पूजा में इन फूलों से मिलता है खास आशीर्वाद, ये फूल भूलकर भी न चढ़ाएंधर्म
2 घंटे पहले· 2

गणपति की पूजा में इन फूलों से मिलता है खास आशीर्वाद, ये फूल भूलकर भी न चढ़ाएं

बुधवार को भगवान गणेश की पूजा में गेंदा, गुड़हल, पारिजात, कंद और अपराजिता जैसे फूल शुभ माने जाते हैं, जबकि केतकी और सफेद फूल चढ़ाना वर्जित बताया गया है।

बुधवार का दिन सनातन धर्म में भगवान गणेश की आराधना के लिए खास माना जाता है और किसी भी नए या शुभ काम को शुरू करने से पहले सबसे पहले गणपति बप्पा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर चीज़ का अपना महत्व होता है, और फूलों का चुनाव भी इसी सोच-समझ के साथ करना चाहिए। कुछ फूल गणेश जी को बेहद पसंद माने जाते हैं तो कुछ फूलों को उनकी पूजा में वर्जित बताया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि गणपति बप्पा को कौन-से फूल अर्पित करने चाहिए और किन फूलों से दूरी बनानी चाहिए।

फूल चढ़ाने की परंपरा के पीछे की मान्यता

धार्मिक ग्रंथों में फूलों को श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक बताया गया है। मान्यता है कि जब भक्त किसी देवी-देवता को उनके प्रिय फूल अर्पित करते हैं तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि किसी भी देवता की पूजा से पहले यह जानना जरूरी माना जाता है कि उन्हें कौन-से फूल पसंद हैं, ताकि पूजा पूरी विधि और श्रद्धा के साथ संपन्न हो सके।

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गणपति बप्पा को ये फूल हैं सबसे प्रिय

गणेश जी की पूजा में सबसे ज्यादा गेंदे के फूल चढ़ाए जाते हैं। मान्यता है कि गेंदे का फूल अर्पित करने से आरोग्य यानी अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिलता है और आर्थिक तंगी से जुड़ी परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

इसके अलावा गुड़हल का फूल भी भगवान गणेश को बेहद प्रिय बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि गुड़हल का फूल चढ़ाने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आने लगती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि गणेश जी अपने भक्तों के कष्ट दूर करने में मदद करते हैं जब उन्हें यह फूल अर्पित किया जाता है।

पारिजात, कंद और अपराजिता के फूलों को भी गणपति बप्पा की पूजा में खास स्थान दिया गया है। जिन लोगों को संतान सुख की कामना होती है, उनके लिए पारिजात का फूल शुभ माना जाता है। कंद का फूल चढ़ाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है। वहीं अपराजिता का फूल गणेश जी को अर्पित करने से विवाह में आने वाली अड़चनें दूर होने की मान्यता प्रचलित है।

इन फूलों को भूलकर भी न करें अर्पित

हर फूल गणेश पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। कुछ फूलों को लेकर धार्मिक मान्यताओं में साफ मनाही की गई है।

  • केतकी का फूल गणेश जी की पूजा में वर्जित माना गया है। भगवान शिव को यह फूल प्रिय नहीं है, इसी वजह से गणेश जी की पूजा में भी इसे चढ़ाना उचित नहीं माना गया।
  • इसके अलावा सफेद कनेर और सफेद चमेली जैसे सफेद फूल भी गणेश पूजा में शामिल नहीं करने चाहिए। मान्यता है कि इन फूलों का संबंध चंद्रमा से जोड़ा जाता है, और इसी वजह से इन्हें गणपति बप्पा की पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही फूलों का चयन करने से पूजा की सम्पूर्णता बढ़ती है और भक्तों की आस्था को बल मिलता है। यही वजह है कि गणेश पूजा से पहले फूलों के चुनाव को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

सवाल-जवाब

भगवान गणेश को सबसे प्रिय फूल कौन-सा है?
गेंदे का फूल गणेश जी की पूजा में सबसे ज्यादा चढ़ाया जाता है और इसे उनका सबसे प्रिय फूल माना जाता है।
गुड़हल का फूल चढ़ाने से क्या फायदा होता है?
मान्यता है कि गुड़हल का फूल चढ़ाने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
संतान सुख के लिए कौन-सा फूल शुभ माना जाता है?
पारिजात का फूल संतान सुख की कामना करने वालों के लिए शुभ माना जाता है।
विवाह की बाधाएं दूर करने के लिए कौन-सा फूल अर्पित करें?
मान्यता है कि अपराजिता का फूल गणेश जी को अर्पित करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
गणेश पूजा में कौन-सा फूल वर्जित माना गया है?
केतकी का फूल गणेश जी की पूजा में वर्जित माना गया है, क्योंकि भगवान शिव को यह फूल प्रिय नहीं है।
गणेश पूजा में सफेद फूल क्यों नहीं चढ़ाने चाहिए?
मान्यता है कि सफेद कनेर और सफेद चमेली जैसे फूलों का संबंध चंद्रमा से है, इसलिए इन्हें गणेश पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।
कंद का फूल चढ़ाने से क्या मिलता है?
कंद का फूल चढ़ाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में प्रेम बढ़ता है।
बुधवार का दिन किस देवता को समर्पित है?
सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा को समर्पित माना जाता है।

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