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24 जुलाई को रखा जाएगा साल का खास व्रत, जानें आशा दशमी की पूजा विधि और नियमधर्म
3 जुल॰ 2026, 12:25 am (45 दिन पहले)· 2

24 जुलाई को रखा जाएगा साल का खास व्रत, जानें आशा दशमी की पूजा विधि और नियम

आषाढ़ शुक्ल दशमी को पड़ने वाला आशा दशमी व्रत इस साल 24 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। जानें इसकी सही तारीख, पूजा विधि और व्रत से जुड़े जरूरी नियम।

आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला आशा दशमी व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उपवास रखती हैं। मान्यता है कि दस दिशाओं में मौजूद आशा देवियों की आराधना करने से घर में सुख और समृद्धि आती है। आइए जानते हैं कि यह व्रत क्यों रखा जाता है, इसकी सही तारीख क्या है और पूजा किस विधि से करनी चाहिए।

व्रत की तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 03 मिनट पर शुरू होगी और यह तिथि 24 जुलाई 2026 की सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। चूंकि हिंदू पंचांग में व्रत और त्योहार उदया तिथि के हिसाब से तय होते हैं, इसलिए आशा दशमी का व्रत 24 जुलाई, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।

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आखिर क्यों रखा जाता है यह व्रत

आशा दशमी व्रत को इच्छाओं की पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन मां पार्वती की पूजा करती हैं और अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती के साथ दस दिशाओं की देवियों की पूजा करने से जीवन में आ रही अड़चनें दूर हो जाती हैं। एक और मान्यता यह भी है कि जिन महिलाओं के पति किसी वजह से दूर रहते हैं, उनके लिए यह व्रत खास फायदेमंद माना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति के साथ पुनर्मिलन की संभावना बढ़ जाती है और वैवाहिक सुख भी मिलता है।

पूजा की सही विधि

व्रत रखने वाली महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद शुद्ध शरीर और मन से व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके वहां लाल कपड़ा बिछाना चाहिए और उस पर मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद रोली, चंदन, फूल, धूप और दीप से पूजा की जाती है और खीर का भोग अर्पित किया जाता है। आशा देवियों की पूजा करते समय व्रत कथा सुनना या पढ़ना जरूरी माना गया है। पूजा के दौरान आशा देवियों का ध्यान करते हुए परिवार में मंगल की कामना की जाती है। इसके बाद अपनी क्षमता के मुताबिक दान करना चाहिए। पूजा पूरी होने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।

  • सूर्योदय से पहले स्नान करें
  • शुद्ध मन से व्रत का संकल्प लें
  • लाल कपड़े पर मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें
  • रोली, चंदन, फूल, धूप, दीप और खीर से पूजा करें
  • व्रत कथा सुनें या पढ़ें
  • आशा देवियों का ध्यान करते हुए मंगल कामना करें
  • क्षमता अनुसार दान करें
  • पूजा के बाद सात्विक आहार लें

व्रत से जुड़े नियम क्या कहते हैं

आशा दशमी व्रत को लेकर परंपरा में यह बताया गया है कि इसे कम से कम छह महीने या फिर लगातार एक से दो साल तक करना चाहिए। इसे आषाढ़ के शुक्ल पक्ष से शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार आषाढ़ में ही शुरुआत हो, किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष से यह व्रत शुरू किया जा सकता है। तय समय तक व्रत करने के बाद इसका उद्यापन किया जाता है। इस दौरान सुहागिन महिलाएं साथ मिलकर रात्रि जागरण भी करती हैं। साथ ही ब्राह्मणों के अलावा जरूरतमंद और गरीब लोगों को दान देने की भी परंपरा है।

सवाल-जवाब

आशा दशमी व्रत 2026 में कब रखा जाएगा?
उदया तिथि के आधार पर आशा दशमी व्रत 24 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा।
आशा दशमी तिथि कब शुरू और कब खत्म होगी?
आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 03 मिनट पर शुरू होकर 24 जुलाई 2026 की सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी।
आशा दशमी व्रत किसलिए रखा जाता है?
यह व्रत सुखी वैवाहिक जीवन और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है, इसे सुहागिन महिलाएं रखती हैं।
इस दिन किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन मां पार्वती के साथ दस दिशाओं की आशा देवियों की पूजा की जाती है।
आशा दशमी व्रत कितने समय तक करना चाहिए?
इसे कम से कम छह महीने या फिर लगातार एक से दो साल तक करने की परंपरा है।
पूजा में क्या भोग अर्पित किया जाता है?
पूजा में रोली, चंदन, फूल, धूप, दीप के साथ खीर का भोग अर्पित किया जाता है।
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