हिमाचल सरकार ने मंदिरों के चढ़ावे को लेकर सख्त नियम लागू किए, सीसीटीवी और डबल लॉक होंगे अनिवार्यधर्म
2 घंटे पहले· 2

हिमाचल सरकार ने मंदिरों के चढ़ावे को लेकर सख्त नियम लागू किए, सीसीटीवी और डबल लॉक होंगे अनिवार्य

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के मंदिरों के लिए विस्तृत एसओपी जारी की है, जिसमें छेड़छाड़-रोधी दानपात्र, सीसीटीवी निगरानी और नकदी पर सख्त नियम शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावा चोरी होने की घटना के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों की सुरक्षा और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया, यानी एसओपी, जारी कर दी है। इस एसओपी का मकसद मंदिरों में पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत

भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने राज्य के सभी संबंधित मंदिर प्रबंधनों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे चढ़ावे से जुड़ी हर प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतें। अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए चोरी के मामले ने राज्य सरकार को यह एहसास कराया कि मंदिरों में मौजूद नकदी, आभूषण और अन्य कीमती सामान की सुरक्षा के लिए ठोस और स्पष्ट व्यवस्था होनी ही चाहिए।

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दानपात्र होंगे छेड़छाड़-रोधी, हर एक की अलग पहचान

नई व्यवस्था के तहत मंदिरों के सभी दानपात्र यानी हुंडी छेड़छाड़-रोधी बनाए जाएंगे और उन्हें पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्थापित किया जाएगा। हर दानपात्र को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, ताकि उसकी निगरानी आसान हो सके। दानपात्र खोलने के लिए डबल लॉक या मल्टी-की प्रणाली अपनाई जाएगी, यानी एक व्यक्ति के पास पूरी चाबी नहीं होगी। दानपात्र को खोलने और बंद करने से जुड़ी हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

तय तारीखों पर ही खुलेंगे दानपात्र, गिनती सीसीटीवी की निगरानी में

एसओपी के मुताबिक दानपात्र सिर्फ पहले से तय तारीखों पर ही खोले जाएंगे। इस दौरान मंदिर के अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य और स्वतंत्र गवाह मौजूद रहना अनिवार्य है। चढ़ावे की पूरी गिनती सीसीटीवी की निगरानी में होगी और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। मंदिर परिसरों में उच्च गुणवत्ता वाले नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग सुविधा वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे प्रवेश और निकास द्वार, गर्भगृह के आसपास के इलाके, दानपात्र, गिनती कक्ष और स्ट्रॉन्ग रूम को पूरी तरह कवर करेंगे। सभी सीसीटीवी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच की जा सके।

नकदी रखने पर रोक, हर दिन बैंक में जमा करना जरूरी

वित्तीय प्रबंधन के मामले में भी सरकार ने सख्ती दिखाई है। मंदिरों में जमा होने वाले नकद चढ़ावे को एक दिन के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य होगा। मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में नकदी रखने पर रोक रहेगी, जब तक कि इसके लिए पहले से लिखित अनुमति न ली गई हो। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यमों से दान देने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसके तहत यूपीआई, क्यूआर कोड और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।

आभूषणों की हर तीन महीने में जांच, स्टाफ का पुलिस सत्यापन

एसओपी में मंदिरों के आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। हर तीन महीने में इनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जबकि साल में एक बार सरकार द्वारा नामित एजेंसियों से पूरा ऑडिट कराया जाएगा। जो कर्मचारी नकदी और कीमती सामान संभालते हैं, उनका पुलिस सत्यापन कराना अनिवार्य होगा और समय-समय पर उनकी जिम्मेदारियां भी बदली जाएंगी, ताकि किसी एक व्यक्ति के पास लंबे समय तक नियंत्रण न रहे। मंदिर के संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश के लिए भी सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी।

30 दिन में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट, वरना होगी कार्रवाई

सरकार ने भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को इस पूरी व्यवस्था के लिए राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। राज्य द्वारा प्रबंधित सभी मंदिरों को 30 दिनों के भीतर एसओपी के अनुपालन की रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी की स्थापना, ऑडिट की स्थिति और लागू किए गए अन्य प्रबंधों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले बाकी मंदिरों में भी इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने के लिए जरूरी कदम उठाएं। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई मंदिर एसओपी का पालन नहीं करता है या इसमें लापरवाही बरतता है, तो संबंधित कार्यकारी अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन समितियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

हिमाचल सरकार ने यह एसओपी क्यों जारी की?
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद हिमाचल सरकार ने राज्य के मंदिरों में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह एसओपी जारी की है।
दानपात्र अब कैसे सुरक्षित बनाए जाएंगे?
सभी दानपात्र छेड़छाड़-रोधी बनाए जाएंगे, हर एक को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी और उन्हें खोलने के लिए डबल लॉक या मल्टी-की प्रणाली अपनाई जाएगी।
चढ़ावे की गिनती कैसे होगी?
चढ़ावा केवल पहले से तय तारीखों पर, मंदिर अधिकारियों, प्रशासन के प्रतिनिधियों, लेखा अधिकारियों, प्रबंधन समिति सदस्यों और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी में गिना जाएगा।
सीसीटीवी फुटेज कितने दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी?
एसओपी के मुताबिक सभी सीसीटीवी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखनी अनिवार्य होगी।
मंदिरों में नकदी रखने को लेकर क्या नियम हैं?
नकद चढ़ावा एक दिन के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा और बड़ी मात्रा में नकदी रखने पर रोक रहेगी, जब तक इसके लिए पूर्व लिखित अनुमति न हो।
आभूषणों और कीमती सामान की जांच कितनी बार होगी?
मंदिरों के आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं का हर तीन महीने में भौतिक सत्यापन होगा और साल में एक बार सरकार द्वारा नामित एजेंसियों से ऑडिट कराया जाएगा।
मंदिरों को अनुपालन रिपोर्ट कब तक देनी होगी?
सभी राज्य प्रबंधित मंदिरों को 30 दिनों के भीतर एसओपी के अनुपालन की रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
नियम न मानने पर क्या होगा?
एसओपी का पालन न करने या लापरवाही बरतने पर संबंधित कार्यकारी अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन समितियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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