पूर्वांचल का बड़ा शहर गोरखपुर सिर्फ अपने रेलवे जंक्शन और गोरखनाथ मंदिर के लिए नहीं, बल्कि कई और ऐसे मंदिरों के लिए भी जाना जाता है, जिनका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और जिनसे जुड़ी मान्यताएं आज भी श्रद्धालुओं को दूर-दूर से खींच लाती हैं। शहर में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां प्राचीन मूर्तिकला के नमूने देखने को मिलते हैं, तो कुछ जगहों पर एक ही परिसर में चारों धाम के दर्शन का पुण्य मिल जाता है। आइए जानते हैं गोरखपुर के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में, जो श्रद्धालुओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
विष्णु मंदिर की प्राचीन प्रतिमा और चारधाम दर्शन
गोरखपुर का विष्णु मंदिर शहर के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। इस मंदिर की पहचान यहां स्थापित भगवान विष्णु की बेहद प्राचीन प्रतिमा से है। माना जाता है कि यह प्रतिमा पाल काल की शैली में बनी है, यानी उस दौर की मूर्तिकला और शिल्पकला की झलक आज भी इसमें साफ नजर आती है। इतिहास और कला में दिलचस्पी रखने वाले लोग खासतौर पर इस दुर्लभ प्रतिमा को देखने यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा इस मंदिर की एक और खासियत इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है, यहां श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में चारों धाम जैसा अनुभव मिल जाता है। मंदिर परिसर में कुछ इस तरह की व्यवस्था की गई है कि भक्त बद्रीनाथ धाम, जगन्नाथ मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और रामेश्वरम मंदिर के प्रतीकात्मक दर्शन एक साथ कर सकते हैं। यही कारण है कि गोरखपुर आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु इस मंदिर को अपनी सूची में जरूर शामिल करते हैं।
गीता वाटिका में भक्ति और साधना का माहौल
गीता वाटिका गोरखपुर के सबसे जाने-माने धार्मिक ठिकानों में शामिल है। यह जगह लंबे समय से सनातन परंपरा, भक्ति और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी रही है। यहां का शांत माहौल, सुंदर मंदिर परिसर और समय-समय पर होने वाले धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को एक अलग तरह की आध्यात्मिक शांति देते हैं। यही वजह है कि देशभर से भक्त दर्शन और ध्यान के लिए खासतौर पर गीता वाटिका आते हैं।
मानसरोवर मंदिर, 250 साल पुरानी आस्था
गोरखपुर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक मंदिरों में मानसरोवर मंदिर का नाम आता है। बीते 250 साल से यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इसकी पुरानी बनावट और धार्मिक अहमियत आज भी लोगों को अपनी तरफ खींचती है। खासतौर पर त्योहारों और बड़े धार्मिक पर्वों के मौके पर यहां भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है।
राप्ती नदी किनारे मुक्तेश्वरनाथ मंदिर
राप्ती नदी के किनारे बना मुक्तेश्वरनाथ मंदिर भगवान शिव का बेहद प्राचीन मंदिर माना जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार यह गोरखपुर के सबसे पुराने शिव मंदिरों में गिना जाता है। सावन के महीने, महाशिवरात्रि और दूसरे धार्मिक मौकों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। नदी के किनारे बसा होने की वजह से यहां का प्राकृतिक नजारा भी श्रद्धालुओं को खासतौर पर लुभाता है।
घंटाघर की कालीबाड़ी मंदिर में खाटू श्याम की प्रतिमा
गोरखपुर के घंटाघर इलाके में बना कालीबाड़ी मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है। इस मंदिर की खास बात यहां स्थापित भगवान खाटू श्याम की प्रतिमा है। शहर के उन गिने-चुने स्थानों में इसका नाम आता है, जहां श्रद्धालु बाबा खाटू श्याम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर महीने के साथ-साथ खास धार्मिक मौकों पर यहां भजन-कीर्तन और अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विंध्यवासिनी पार्क की गणेश प्रतिमा पर रिसर्च
गोरखपुर के विंध्यवासिनी पार्क में भगवान गणेश की एक प्रतिमा मौजूद है, जिसका संबंध पाल वंश से बताया जाता है। कहा जाता है कि यह मूर्ति उस दौर की कला और पत्थर की बनावट को दिखाती है, यही वजह है कि इस पर कई बार रिसर्च भी हो चुकी है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिस्ट्री डिपार्टमेंट की प्रोफेसर प्रज्ञा चतुर्वेदी भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह प्रतिमा पाल काल से जुड़ी हुई है।











