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गोंडा के जयप्रभा गांव में मां काली की पिंडी पूजा से जुड़ी है दशकों पुरानी आस्थाधर्म
7 जुल॰ 2026, 7:27 am (45 दिन पहले)· 2

गोंडा के जयप्रभा गांव में मां काली की पिंडी पूजा से जुड़ी है दशकों पुरानी आस्था

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की जयप्रभा ग्राम पंचायत में बना काली माता मंदिर सच्ची श्रद्धा और मनोकामना पूरी होने की मान्यता के लिए जाना जाता है, नवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में इटियाथोक विकासखंड की जयप्रभा ग्राम पंचायत में बना काली माता मंदिर आसपास के पूरे इलाके में गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है। हर दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां काली के दर्शन करने पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में प्रार्थना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि पूरे साल इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है और आस्था का यह सिलसिला दशकों से बिना रुके चला आ रहा है।

पिंडी से मूर्ति तक, मंदिर के निर्माण की कहानी

मंदिर के पुजारी राजकिशोर मिश्रा के मुताबिक यह मंदिर काफी पुराना है। शुरुआत में इस जगह मां काली पिंडी के रूप में विराजमान थीं और गांव के लोग उसी पिंडी की श्रद्धापूर्वक पूजा किया करते थे। समय बीतने के साथ गांव वालों ने आपस में मिलकर मंदिर बनवाने का फैसला किया और यहां मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित करवाई। खास बात यह है कि मंदिर परिसर में वह प्राचीन पिंडी आज भी मौजूद है, और श्रद्धालु नई प्रतिमा के साथ-साथ उस पुरानी पिंडी की भी पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं। यही प्राचीनता इस मंदिर को आसपास के अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है।

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नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़

पुजारी राजकिशोर मिश्रा बताते हैं कि इस मंदिर में सिर्फ गोंडा जिले के ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में खासतौर पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। इन दिनों मंदिर परिसर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, साथ ही भजन-कीर्तन और कई तरह के धार्मिक कार्यक्रम भी लगातार होते रहते हैं। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इन आयोजनों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

यहां न दरबार लगता है, न कुछ मांगा जाता है

पुजारी राजकिशोर मिश्रा के मुताबिक इस मंदिर में किसी तरह का कोई दरबार नहीं लगाया जाता और न ही श्रद्धालुओं से कुछ मांगा जाता है। उनका कहना है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से मां काली की आराधना करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। इसी अटूट भरोसे के चलते लोग बार-बार इस मंदिर में दर्शन के लिए लौटते हैं और अपनी परेशानियां मां के दरबार में लेकर आते हैं।

श्रद्धालुओं का अनुभव, तीन दशक पुरानी पूजा

गांव के ही रहने वाले सुकाई राम कसौधन पिछले 25 से 30 वर्षों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर बनने से पहले भी वह यहां पिंडी की पूजा करने आया करते थे। उनके मुताबिक यहां पूजा करने से उन्हें सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति दोनों मिलती है।

श्रद्धालु शिव शंकर कसौधन का पूरा परिवार भी बरसों से इस मंदिर में दर्शन करने आता रहा है। उनका कहना है कि मां काली की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती रही हैं। अगर किसी दिन वह मंदिर नहीं पहुंच पाते, तो उन्हें महसूस होता है जैसे उस दिन जीवन में कुछ अधूरा रह गया हो। श्रद्धालुओं की यही अटूट आस्था इस मंदिर को गोंडा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार करती है।

सवाल-जवाब

गोंडा का काली माता मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के इटियाथोक विकासखंड की जयप्रभा ग्राम पंचायत में स्थित है।
मंदिर का इतिहास क्या है?
पहले यहां मां काली पिंडी रूप में विराजमान थीं, बाद में गांव के लोगों के सहयोग से मंदिर बनवाया गया और मूर्ति स्थापित की गई।
मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कब रहती है?
चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।
क्या मंदिर में कोई दरबार लगता है?
नहीं, पुजारी राजकिशोर मिश्रा के मुताबिक यहां कोई दरबार नहीं लगाया जाता और न ही श्रद्धालुओं से कुछ मांगा जाता है।
सुकाई राम कसौधन कब से यहां पूजा कर रहे हैं?
वह पिछले 25 से 30 वर्षों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
शिव शंकर कसौधन का मंदिर से क्या जुड़ाव है?
उनका पूरा परिवार वर्षों से इस मंदिर में दर्शन करने आता है और वे मां काली की कृपा से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की बात कहते हैं।
क्या प्राचीन पिंडी आज भी मंदिर में मौजूद है?
हां, मंदिर परिसर में वह प्राचीन पिंडी आज भी मौजूद है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।
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