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बाबा बर्फानी का हिमलिंग महज एक फीट रह गया, फिर भी उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़अध्यात्म
2 घंटे पहले· 2

बाबा बर्फानी का हिमलिंग महज एक फीट रह गया, फिर भी उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

अमरनाथ यात्रा शुरू होने के चार दिन में ही 85,779 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, लेकिन पवित्र हिमलिंग तेजी से पिघलकर सिर्फ 1 फीट का रह गया है, फिर भी भक्तों की भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही।

लक्ष्मी गुप्तालक्ष्मी गुप्ताअंक ज्योतिषी 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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अमरनाथ यात्रा शुरू हुए अभी सिर्फ चार दिन बीते हैं और अब तक 85,779 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। सोमवार को अकेले 28,818 भक्तों ने गुफा तक पहुंचकर पवित्र हिमलिंग के दर्शन किए। प्रशासन के मुताबिक हर दिन दर्शन करने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है, लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, गुफा में मौजूद पवित्र हिमलिंग बहुत तेजी से पिघल रहा है और अब उसका आकार घटकर महज 1 फीट रह गया है। सोमवार को आईं ताजा तस्वीरों में बाबा बर्फानी पहले जैसे विशाल रूप में नजर नहीं आ रहे, लेकिन शिवलिंग के छोटे होने के बावजूद भक्तों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिख रही और गुफा तक पहुंचने वालों की कतार लगातार लंबी होती जा रही है।

महीनेभर में सात फीट से एक फीट तक सिमटा हिमलिंग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 23 मई को अमरनाथ हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट मापी गई थी। इसके बाद 29 जून तक यह घटकर 5 फीट का रह गया और अब सोमवार को सामने आई तस्वीरों से साफ पता चलता है कि हिमलिंग पिघलकर सिर्फ एक फीट का बचा है। दर्शन करके लौट रहे कई श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस रफ्तार से बर्फ पिघल रही है, उसे देखते हुए लगता नहीं कि हिमलिंग अब चार-पांच दिन से ज्यादा टिक पाएगा। इस साल की यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और यह रक्षाबंधन तक चलनी है, ऐसे में शुरुआती दिनों में ही हिमलिंग का इतनी तेजी से पिघलना चिंता का विषय बन गया है।

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पहले भी दिख चुकी है ऐसी सूरत, ग्लोबल वार्मिंग बड़ी वजह

विशेषज्ञों की मानें तो यह पहला मौका नहीं है जब हिमलिंग तय समय से पहले पिघल गया हो, बल्कि पिछले कई सालों से ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है। इसके पीछे बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग को बड़ी वजह बताया जा रहा है। अमरनाथ की गुफा चारों तरफ से ग्लेशियरों से घिरी हुई है और जब बड़ी तादाद में श्रद्धालु वहां पहुंचते हैं, तो आसपास का तापमान बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर ग्लेशियरों पर पड़ता है और वे तेजी से पिघलने लगते हैं। साल 2016 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब यात्रा शुरू होने के महज 10 दिन के भीतर ही हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया था। इससे पहले साल 2013 में भी यही हाल देखने को मिला था, जब यात्रा खत्म होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गया था।

57 दिन की यात्रा, 28 अगस्त को होगा समापन

इस बार अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और इसका समापन 28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन होगा। हर साल यह पवित्र यात्रा करीब 57 दिन तक चलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ यात्रा करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। यही वजह है कि अमरनाथ यात्रा को हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में गिना जाता है। मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था, और इसी कथा की वजह से इस यात्रा का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

तेज बारिश के बीच भी नहीं थमा दर्शन का सिलसिला

अधिकारियों के मुताबिक सोमवार को दिनभर कई इलाकों में तेज बारिश होती रही, लेकिन खराब मौसम भी श्रद्धालुओं के हौसले को कम नहीं कर पाया। बालटाल और पहलगाम, दोनों ही मार्गों से भक्त 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा तक पहुंचे और बाबा बर्फानी के दर्शन किए। दर्शन के बाद सोमवार शाम तक ये श्रद्धालु सुरक्षित रूप से बालटाल बेस कैंप लौट भी आए। अधिकारियों का कहना है कि दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित नुनवान बेस कैंप तक वापस पहुंचने में तीन से चार दिन का वक्त लग जाता है, इसलिए पहलगाम मार्ग से यात्रा शुरू करने वाले ज्यादातर श्रद्धालु दर्शन के बाद वापसी के लिए बालटाल मार्ग को ही चुन रहे हैं, क्योंकि इस रास्ते से वे उसी दिन बेस कैंप तक पहुंच सकते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन के व्यापक इंतजाम

यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन ने पुख्ता व्यवस्था की है। दोनों बेस कैंपों के साथ-साथ रास्ते में रुकने की जगहों पर भी सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने जगह-जगह लंगर लगाए हैं, जहां श्रद्धालुओं को मुफ्त में भोजन कराया जा रहा है। इसके अलावा बालटाल और नुनवान-पहलगाम से लेकर पवित्र गुफा तक हजारों टेंट भी लगाए गए हैं, ताकि रास्ते में या ठहरने के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसका आप पर असर

  • भारत भर में: जो श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि हिमलिंग तेजी से पिघल रहा है और आने वाले दिनों में इसका आकार और भी छोटा हो सकता है, इसलिए दर्शन के लिए जल्द निकलना बेहतर रहेगा।
  • जम्मू-कश्मीर में: बालटाल और पहलगाम मार्ग पर मौसम खराब होने के बावजूद यात्रा जारी है, ऐसे में यात्रियों को बारिश और रास्ते की स्थिति को ध्यान में रखकर ही आगे की यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

सवाल-जवाब

अमरनाथ यात्रा 2026 कब शुरू हुई और कब खत्म होगी?
यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और 28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी।
अब तक कितने श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं?
यात्रा शुरू होने के चार दिन में ही 85,779 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जिनमें सोमवार को अकेले 28,818 श्रद्धालु शामिल थे।
हिमलिंग का आकार अब कितना रह गया है?
23 मई को 7 फीट रहा हिमलिंग 29 जून तक 5 फीट का रह गया था और सोमवार की तस्वीरों के मुताबिक अब सिर्फ 1 फीट का बचा है।
हिमलिंग इतनी तेजी से क्यों पिघल रहा है?
विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ती गर्मी, ग्लोबल वार्मिंग और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से तापमान बढ़ने की वजह से आसपास के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
क्या पहले भी हिमलिंग जल्दी पिघला है?
हां, साल 2016 में यात्रा शुरू होने के 10 दिन के भीतर ही हिमलिंग पिघल गया था और 2013 में भी यात्रा खत्म होने से पहले ही यह अंतर्ध्यान हो गया था।
श्रद्धालु किस रास्ते से गुफा तक पहुंच रहे हैं?
श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम, दोनों मार्गों से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा तक पहुंच रहे हैं।
पहलगाम मार्ग से आने वाले श्रद्धालु वापसी के लिए बालटाल को क्यों चुन रहे हैं?
क्योंकि नुनवान बेस कैंप तक लौटने में तीन-चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से श्रद्धालु उसी दिन बेस कैंप वापस पहुंच सकते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए क्या सुविधाएं दी जा रही हैं?
प्रशासन ने दोनों बेस कैंपों और रास्ते में जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई हैं, सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने लंगर लगाए हैं और हजारों टेंट भी लगाए गए हैं।
लक्ष्मी गुप्ता
लेखक के बारे मेंलक्ष्मी गुप्ताअंक ज्योतिषी
विशेषज्ञताभविष्यसूचक अंक ज्योतिष, समग्र उपचार पद्धतियाँ, रिश्ते एवं पारिवारिक ज्योतिष, आध्यात्मिक विकास

एक समर्पित अंक ज्योतिषी, जो अंक ज्योतिष की गणितीय बुनियाद और पारंपरिक ज्योतिषीय पांडुलिपियों के संरक्षण में विशेषज्ञता रखती हैं।

लक्ष्मी पारंपरिक वैदिक ज्योतिष की गहन सटीकता को परामर्श के एक आधुनिक, चिकित्सकीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ती हैं। उनका उद्देश्य अंक ज्योतिष को महज़ भविष्यवाणी से आगे बढ़ाकर आत्म-खोज और सचेत निर्णय लेने का एक सशक्त साधन बनाना है। संस्कृत अध्ययन और आधुनिक मनोविज्ञान की पृष्ठभूमि के साथ वे ऐसे परामर्श देती हैं जो सटीक भी हैं और संवेदनशील भी। चाहे आप करियर बदलाव से गुज़र रहे हों, रिश्तों में स्पष्टता चाहते हों या गहरे आध्यात्मिक उद्देश्य की तलाश में हों — लक्ष्मी सितारों की बुद्धिमत्ता से आपका रास्ता रोशन करती हैं।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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