काशी में भगवान जगन्नाथ पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे, लेकिन अब वे पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। 15 दिनों तक उनका विशेष काढ़े से इलाज किया गया, और स्वस्थ होते ही उन्होंने अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ शहर की सैर पर निकलने का फैसला किया। इस मौके पर उन्हें एक खास डोली में बिठाकर पूरे शहर में भ्रमण कराया गया, जिसे भक्त 'मन फेर' कहते हैं। मान्यता के मुताबिक हर साल एक तय तारीख पर नगर भ्रमण करते हुए भगवान अपने ससुराल पहुंचते हैं, और यहीं से रथयात्रा की नींव पड़ती है।
डमरू की गूंज और जयघोष के साथ निकली डोली यात्रा
बुधवार को अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा शुरू हुई। यात्रा के दौरान डमरू की डम डम आवाज और जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाथों में ध्वज लिए इस यात्रा में शामिल हुए। रास्ते में जगह जगह भक्तों ने डोली यात्रा का स्वागत किया और भगवान पर फूल बरसाए। यात्रा के दौरान द्वारकाधीश मंदिर पर भगवान की विशेष आरती भी उतारी गई।
224 साल पुरानी है यह परंपरा
डोली यात्रा में शामिल भक्त गोविंद शर्मा ने बताया कि काशी में यह परंपरा 224 साल पुरानी है। उन्होंने बताया कि सभी भक्तों को साल भर इस यात्रा का इंतजार रहता है, और जो भक्त प्रभु की डोली को अपने कंधों पर उठाने का मौका पाते हैं, वे खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानते हैं।
अब तीन दिन रथ पर सवार होकर देंगे दर्शन
डोली यात्रा के बाद अब वाराणसी में गुरुवार से रथयात्रा मेले की शुरुआत होगी। तीन दिनों तक भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। साल भर में सिर्फ यही तीन दिन ऐसे होते हैं, जब भगवान मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर सड़क पर भक्तों के बीच रहते हैं और उन्हें करीब से दर्शन देने का मौका मिलता है।
लक्खा मेले में शुमार, पहली बार चढ़ेगा खाजे का भोग
वाराणसी में पर्व और त्योहारों की शुरुआत भी इसी रथयात्रा मेले से मानी जाती है। काशी का यह रथयात्रा मेला लक्खा मेलों में गिना जाता है, यानी इन तीन दिनों में लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। भक्त प्रेम से भगवान को तुलसी और नानखटाई का भोग चढ़ाते हैं। इस बार रथयात्रा मेले में एक खास बात यह होगी कि जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भगवान को पहली बार खाजे का भोग भी लगाया जाएगा। यह खाजा झांसी के रहने वाले एक दंपति ने खासतौर पर तैयार किया है।











