पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की पहचान सिर्फ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की धरती के तौर पर ही नहीं, बल्कि रावण की ससुराल के तौर पर भी है, और यहीं सदर इलाके में बने बिलेश्वरनाथ मंदिर परिसर में हर साल भगवान जगन्नाथ अपने परिवार समेत 450 किलो के चांदी वाले रथ पर सवार होकर पूरे शहर का भ्रमण करने निकलते हैं. इस साल यह भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी और मंदिर प्रशासन ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है.
ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों तरह से खास है मेरठ
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत के लिए मशहूर मेरठ का धार्मिक इतिहास भी उतना ही समृद्ध है. मान्यताओं के अनुसार यह शहर रावण की ससुराल के तौर पर जाना जाता है और यहां कई प्राचीन व ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं. इन मंदिरों को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में गहरी आस्था के साथ-साथ जिज्ञासा भी देखने को मिलती है. इन्हीं में से एक है मेरठ सदर स्थित बिलेश्वरनाथ मंदिर, जहां के परिसर में भगवान जगन्नाथ अपने परिवार सहित विराजमान हैं. यहां हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विशेष श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ के साथ बलदेव और उनकी बहन सुभद्रा भी चांदी के रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं.
65 किलो से 450 किलो तक कैसे पहुंचा रथ
रथ यात्रा आयोजन समिति के मुताबिक यह परंपरा देश की आजादी से पहले से लगातार चली आ रही है. जब मेरठ में इस यात्रा की शुरुआत हुई थी, तब भगवान जगन्नाथ पहली बार सिर्फ 65 किलो चांदी से बने रथ पर सवार होकर निकले थे. इसके बाद से यह सिलसिला बिना रुके जारी है. समिति बताती है कि हर साल रथ की मरम्मत करवाई जाती है और मरम्मत में भी चांदी का ही इस्तेमाल होता है. लगातार हो रही इस मरम्मत और नई चांदी जुड़ने की वजह से रथ का वजन अब बढ़कर 450 किलो से ज्यादा हो चुका है. इसी रथ पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए हर साल शहर के भ्रमण पर निकलते हैं.
झांकियों और भव्य मार्ग से गुजरती है यात्रा
रथ यात्रा के साथ कई धार्मिक झांकियां भी शहर में निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान श्रीगणेश, खाटू श्याम और श्रीराधा-कृष्ण समेत अन्य देवी-देवताओं की झांकियां शामिल रहती हैं. यह पूरी यात्रा रावण की ससुराल से जुड़े इलाके से शुरू होकर भैंसाली मैदान, दालमंडी, बेकर स्ट्रीट, सदर, थाना सदर बाजार, चौक बाजार, मुंबई बाजार, हनुमान चौक, आबू लेन और भारत चौक से होते हुए आगे बढ़ती है. इसके बाद गंज बाजार और ढोलकी मोहल्ला से गुजरते हुए यह यात्रा फिर से मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न होती है. रथ यात्रा के दौरान मेरठ में उत्सव जैसा माहौल रहता है और शहर के लोग बड़ी तादाद में इसमें शामिल होते हैं.
हाथों से रथ खींचते हैं श्रद्धालु, पुरी जैसा नजारा
जिस तरह जगन्नाथ पुरी में श्रद्धालु अपने हाथों से भगवान जगन्नाथ का रथ खींचते हैं, वैसा ही नजारा मेरठ में भी देखने को मिलता है. यहां भी श्रद्धालु विशाल रस्सियों के सहारे चांदी के रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ को अपने हाथों से खींचते हैं. रथ यात्रा के दौरान यही परंपरा सबसे बड़ा आकर्षण मानी जाती है और श्रद्धालु इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं.
मंदोदरी की भक्ति से जुड़ी है बिलेश्वरनाथ की कहानी
जिस मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ अपने परिवार सहित विराजमान हैं, उसी परिसर में भगवान भोलेनाथ बिलेश्वरनाथ के रूप में स्थापित हैं. मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी हर दिन इसी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया करती थीं. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उनसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा था, जिसके जवाब में मंदोदरी ने रावण जैसा विद्वान पति मांगा था.
16 जुलाई को होगा भव्य आयोजन
भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर से यह भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी. जो श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, वे इसमें सम्मिलित होकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन का लाभ उठा सकते हैं. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और उनके दुखों को दूर करते हैं.











